Wednesday, January 14, 2026

Opposition meet Patna: 23 जून को पटना में जुटेंगे विपक्ष के दिग्गज,2024 में मोदी सरकार को पटखनी देने के लिए बनेगी रणनीति

12 जून को पटना में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक अब 23 जून को होगी. 23 जून की तारीख पर मुहर लगाते हुए गुरुवार को शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि, “2024 के आम चुनाव से पहले विपक्षी दलों की यह बैठक एक सकारात्मक और ऐतिहासिक पहल साबित होगी. बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे के साथ विस्तृत बातचीत की है. उद्धव ठाकरे  भी बैठक में शामिल होंगे.”

12 जून की तारीख को लेकर कुछ मुद्दे थे- तेजस्वी यादव

जनता दल-युनाइटेड (जद-यू) के नेता ललन सिंह ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि देश में अघोषित आपात काल लागू है, इसलिए जरुरी है कि विपक्ष एक होकर देश में लोकतंत्र को दोबारा स्थापित करने के लिए रणनीति बनाये . जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि 23 तारीख को होने वाली बैठक में समस्त विपक्ष शामिल होगा.
मीडियाकर्मियों के साथ इस बातचीत में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी शामिल थे. जद-यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि 12 जून की बैठक स्थगित कर दी गई थी क्योंकि “तारीख को लेकर कुछ मुद्दे थे और कांग्रेस के शीर्ष नेता पहले की नियोजित तारीख के लिए उपलब्ध नहीं थे.”
ललन सिंह ने कहा कि, “अब, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, तमिलनाडु के सीएम एम.के. स्टालिन, वामपंथी नेता डी. राजा, सीताराम येचुरी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और भाकपा माले के राष्ट्रीय सचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने इस बैठक की तारीख पर सहमति जता दी है . बैठक का स्थान पटना है, ”

कांग्रेस को थी 12 जून की तारीख और बैठक के स्थान पर आपत्ति

इससे पहले कांग्रेस ने कहा था कि राहुल गांधी अमेरिका में हैं और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के भी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम हैं जिन्हें टाला नहीं जा सकता.
हलांकि सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस को मूल तिथि पर आपत्ति थी क्योंकि 12 जून वह दिन था जब जयप्रकाश नारायण ने 1975 में पटना में कांग्रेस पार्टी के खिलाफ संपूर्ण क्रांति आंदोलन शुरू किया था.
सूत्रों की माने तो इतिहास की इस घटना के साथ ही कांग्रेस पटना में बैठक करने को लेकर भी सहज नहीं थी. सुूत्रों का कहना है कि, “12 जून को लेकर कांग्रेस को बेचैनी महसूस हो रही थी. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व आयोजन स्थल से भी संतुष्ट नहीं थे. वे चाहते थे कि बैठक उन राज्यों में से एक में हो जहां कांग्रेस सत्ता में है. शिमला को एक संभावित स्थल के रूप में प्रस्तावित किया गया था.
हालांकि, सूत्र के अनुसार, नीतीश कुमार आयोजन स्थल पर बहुत दृढ़ थे, और ममता बनर्जी भी.

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