‘छिपाने के लिए कुछ नहीं है, बस ED को झेलना है क्योंकि वो सरकार के इशारे पर चलती है’ मनी लॉन्ड्रिंग केस में ज़मानत मिलने पर बोले रॉबर्ट वाड्रा

कांग्रेस MP प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा Robert Vadra ने शनिवार को कहा कि शिकोहपुर लैंड डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद उनके पास “छिपाने के लिए कुछ नहीं है”. इस केस की जांच एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) कर रहा है. वाड्रा ने यह भी आरोप लगाया कि ED प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार के “इशारे पर” काम कर रही है.

‘ED को झेलना है क्योंकि वो सरकार के इशारे पर चलती है’-Robert Vadra

ज़मानत मिलने के बाद कोर्ट परिसर के बाहर वाड्रा ने रिपोर्टरों से कहा, “मुझे इस देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है. मुझे पता है कि ED को सरकार चला रही है और ED सरकार के इशारों पर ही काम करती रहेगी…मुझे देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है…मैं हमेशा यहीं रहूंगा और सभी सवालों के जवाब दूंगा…मैं निडर हूं और मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है….”


खुद को “निडर” बताते हुए वाड्रा ने कहा कि वह कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं और जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ेगा, वह सभी प्रोसेस की ज़रूरतों का पालन करेंगे.
वाड्रा को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा मामले में चार्जशीट पर संज्ञान लेने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली वाड्रा की याचिका पर सुनवाई के बाद जमानत मिली है.

शिकोहपुर लैंड डील से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस क्या है?

प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) केस फरवरी 2008 के एक ट्रांज़ैक्शन से जुड़ा है जिसमें स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, एक कंपनी जिसमें रॉबर्ट वाड्रा पहले डायरेक्टर थे, ने हरियाणा के शिकोहपुर में ₹7.5 करोड़ में लगभग 3.5 एकड़ ज़मीन खरीदी थी.
बाद में यह ज़मीन 2012 में रियल एस्टेट की बड़ी कंपनी DLF को ₹58 करोड़ में बेच दी गई, जिससे इसकी कीमत में काफ़ी बढ़ोतरी हुई.
ED के मुताबिक, यह ट्रांज़ैक्शन एक बड़ी स्कीम का हिस्सा था जिसमें क्राइम से कमाए गए पैसे को जमा करना और लेयर में डालना शामिल था. एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इस प्रोसेस के दौरान गलत फ़ायदे दिए गए, जिसमें ज़मीन का जल्दी म्यूटेशन और डेवलपमेंट परमिशन देना शामिल था, जिससे इसकी मार्केट वैल्यू काफ़ी बढ़ गई.

कोर्ट की सुनवाई

गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में रॉबर्ट वाड्रा की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कथित अपराध 2008 और 2012 के बीच के हैं, जबकि कुछ अपराधों को PMLA के शेड्यूल में बाद में जोड़ा गया था.
ED की तरफ से पेश हुए एडवोकेट ज़ोहेब हुसैन ने याचिका का विरोध किया और दलील दी कि याचिका कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है. जस्टिस मनोज जैन ने मामले की अगली सुनवाई 18 मई को तय की.
एक दिन बाद, सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत, एडवोकेट प्रतीक चड्ढा और अक्षत गुप्ता के साथ, वाड्रा की तरफ से राउज़ एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए. वाड्रा शिकोहपुर लैंड डील से जुड़े PMLA केस में जारी समन के बाद भी कोर्ट में पेश हुए.
कोर्ट ने पिछले महीने इस मामले में उनके और दूसरों के खिलाफ फाइल की गई ED की चार्जशीट पर संज्ञान लिया था.
कोर्ट ने ED की इस बात पर भी ध्यान दिया कि आगे की जांच चल रही है, खासकर FIR में नामजद दूसरी एंटिटीज़ के रोल के बारे में. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि जांच एजेंसी पूरी जांच पक्की करने के लिए इन सभी पहलुओं की अच्छी तरह से जांच करेगी.

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