तेल की आग बुझना मुश्किल! होर्मुज में बिछा है ईरानी माइंस का जाल, 6 महीने तक बंद रहेगा रास्ता

Strait of Hormuz : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में यदि स्थायी युद्धविराम हो भी जाता है, तब भी दुनिया के लिए संकट कम होने वाला नहीं है. वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात सामान्य होने में अभी लंबा समय लगेगा. पेंटागन की एक ताजा रिपोर्ट ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है, जिसमें कहा गया है कि इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने में महीनों का वक्त लग सकता है.

Strait of Hormuz पर पेंटागन की ब्रीफिंग में बड़ा खुलासा

अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने सांसदों को दी गई एक गोपनीय ब्रीफिंग में चौंकाने वाला खुलासा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में इस कदर बारूदी सुरंगों का जाल बिछाया है कि उन्हें पूरी तरह हटाने में कम से कम छह महीने का समय लगेगा. द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, यह जानकारी हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सदस्यों के साथ साझा की गई है, जिससे अमेरिकी गलियारों में निराशा का माहौल है.

महंगा होगा पेट्रोल और गैस, अर्थव्यवस्था पर मार

इस समुद्री मार्ग के बाधित रहने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है. पेंटागन के आकलन के अनुसार, जब तक रास्ता साफ नहीं होता, तब तक ऊर्जा की कीमतों में गिरावट की कोई संभावना नहीं है. अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों तक तेल और पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर बनी रह सकती हैं. इस देरी की सबसे बड़ी वजह यह है कि जब तक संघर्ष पूरी तरह थम नहीं जाता, तब तक सुरंगों को हटाने का जोखिम भरा अभियान शुरू नहीं किया जा सकता.

होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक और आर्थिक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद संकरा और महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है. 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत के बाद से ही यहां आवाजाही ठप है. ईरान फिलहाल केवल चुनिंदा जहाजों को ही एक विशेष चैनल के जरिए गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन चरमरा गई है.

दुनिया भर में मंडराया ऊर्जा संकट

ईरान और अमेरिका की इस घेराबंदी ने न केवल खाड़ी देशों बल्कि दक्षिण एशिया सहित पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है. जहाजों की आवाजाही रुकने से तेल की किल्लत बढ़ रही है, जिसका असर वैश्विक बाजारों में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समुद्री मार्ग साल के अंत तक बहाल नहीं हुआ, तो दुनिया को एक बड़े आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है.

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