नीतीश कुमार 12 मार्च को दे सकते हैं मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा, फेयरवेल प्लान तैयार !

Nitish Kumar Resignation पटना : नीतीश कुमार के इस्तीफे और प्रदेश के नये मुख्यमंत्री के नाम को लेकर लगातार सियासी हलकों में कयासों का दौर जारी है. इस बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है . जानकारी के मुताबिक  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अगले कदम को लेकर  चल रहा सस्पेंस अब खत्म होता दिखाई दे रहा है. नीतीश कुमार, जो हाल ही में 16 मार्च को निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं, अब बिहार की सत्ता की कमान सौंपकर दिल्ली की ओर रुख करने के लिए तैयार हैं. खबर है कि सीएम नीतीश पद छोड़ने से पहले 8 अप्रैल को पटना में अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसके बाद उनके इस्तीफे और नए उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी.

Nitish Kumar 9 मार्च को पहुंचेंगे दिल्ली  

नीतीश कुमार का आगामी दिल्ली दौरा बिहार की भविष्य की राजनीति के लिए निर्णायक साबित होने वाला है. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नीतीश कुमार  9 अप्रैल को दिल्ली पहुंचकर  जेडीयू की एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेंगे. इसके बाद वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे. 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करते ही नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा दिग्गजों की सूची में शामिल हो जाएंगे, जिन्हें संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों—लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद—का सदस्य बनने का गौरव प्राप्त है.

पीएम और एचएम  के साथ नीतीश कुमार करेंगे सीएम का नाम तय

इस पूरी कवायद का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिहार के नए मुख्यमंत्री का चयन है. दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली बैठक का मुख्य एजेंडा उत्तराधिकारी के नाम पर मुहर लगाना होगा. कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार खुद अपने उत्तराधिकारी के लिए कुछ नाम सुझा सकते हैं. 11 अप्रैल को पटना वापसी के तुरंत बाद, 12 अप्रैल की तारीख बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक तारीख बन सकती है, जब नीतीश कुमार औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद से अपना त्यागपत्र सौंपेंगे.

 बिहार में भाजपा के लिए नये युग की शुरुआत

नीतीश कुमार का पद से हटना भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए बिहार में एक स्वर्णिम युग की शुरुआत माना जा रहा है. पिछले दो दशकों से अधिक समय से एनडीए गठबंधन का हिस्सा रहने और राज्य में सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरने के बावजूद, भाजपा अब तक केवल उपमुख्यमंत्री पद तक ही सीमित रही है. यह पहला मौका होगा जब बीजेपी हिंदी पट्टी के इस सामरिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाकर सीधे तौर पर शासन करेगी.

 बिहार में कौन बनेगा अगला मुख्यमंत्री ?

मुख्यमंत्री की रेस में इस समय जातीय समीकरण और कद दोनों को तौला जा रहा है. जानकारों का मानना है कि बिहार जैसे जटिल राज्य में किसी नए या अनुभवहीन चेहरे पर दांव लगाना जोखिम भरा हो सकता है. ऐसे में चर्चा है कि अगला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक प्रभाव का और उन्हीं के समुदाय (कुर्मी-कुशवाहा) से होना चाहिए, जो राज्य में यादवों के बाद दूसरा सबसे बड़ा ओबीसी समूह है. वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहा है. सम्राट चौधरी को अमित शाह और नीतीश कुमार दोनों का विश्वासपात्र माना जाता है, जिससे उनकी दावेदारी सबसे मजबूत नजर आती है.

हालांकि, राजनीतिक पंडितों का एक वर्ग यह भी मानता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी हमेशा की तरह किसी अप्रत्याशित चेहरे को सामने लाकर सबको चौंका सकती है. जिस तरह हाल के वर्षों में राजस्थान, मध्य प्रदेश और ओडिशा में मुख्यमंत्री के चयन ने सबको हैरान किया, वैसी ही संभावना बिहार में भी जताई जा रही है. माना जा रहा है कि बिहार मे ंकिसी महिला को भी मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. फिलाहल पूरी देश की नजर 12 अप्रैल पर टिकी हैं, जब बिहार की सत्ता की बागडोर एक नए हाथों में जा सकती है.

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