UP Agriculture Master Plan लखनऊ : उत्तर प्रदेश के किसानों और ग्रामीण गरीब परिवारों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. गुरुवार को लखनऊ स्थित योजना भवन में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की. इस दौरान किसानों को राहत देने के लिए रबी विपणन वर्ष 2026-27 की एमएसपी खरीद अवधि बढ़ाने की मंजूरी दी गई, वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के नए चरण के तहत उत्तर प्रदेश को 6,18,482 नए पक्के मकानों की स्वीकृति भी प्रदान की गई.
बैठक में कृषि क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक वैज्ञानिक रोडमैप, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां, अल नीनो की आशंका और ग्रामीण आवास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से मंथन किया गया.
UP Agriculture Master Plan: कृषि में यूपी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की कृषि व्यवस्था का प्रमुख आधार है. उन्होंने बताया कि देश के कुल गेहूं उत्पादन का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश से आता है. ऐसे में देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य को पूरा करने में यूपी की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियां, बढ़ता तापमान और लगातार घटता भूजल स्तर कृषि के सामने गंभीर चुनौतियां बनकर उभरे हैं. इन चुनौतियों का सामना करने के लिए उत्तर प्रदेश के लिए एक वैज्ञानिक और दीर्घकालिक कृषि रोडमैप तैयार किया जा रहा है.
इस रोडमैप में फसल चक्र, सिंचाई व्यवस्था, जल संरक्षण, उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और कृषि विपणन जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाएगा. बैठक में इसका प्रारंभिक मसौदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और अन्य अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया.
किसानों को बड़ी राहत, 8 जुलाई तक होगी MSP पर खरीद
बैठक की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा किसानों के लिए रही। केंद्रीय कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वह स्वीकृति पत्र सौंपा, जिसमें रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं, चना और मसूर जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद अवधि बढ़ाने की मंजूरी दी गई है.
अब किसानों की उपज की खरीद 24 जून से बढ़ाकर 8 जुलाई 2026 तक की जाएगी. यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
सरकार का मानना है कि मौसम की अनिश्चितता, मंडियों में भीड़ और फसल की तुलाई में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के कारण कई किसान समय पर अपनी फसल नहीं बेच पाते. खरीद अवधि बढ़ने से लाखों किसानों को फायदा मिलेगा और उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय गेहूं, चना और मसूर उत्पादक किसानों के लिए आर्थिक रूप से काफी राहतकारी साबित हो सकता है.
अल नीनो और कम बारिश को लेकर सरकार सतर्क
बैठक में इस वर्ष संभावित अल नीनो प्रभाव और कम वर्षा की संभावना पर भी गंभीर चर्चा हुई. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शुरुआती मानसूनी गतिविधियों में अपेक्षित बारिश नहीं हुई है और आगे भी वर्षा कम रहने की आशंका जताई जा रही है.
ऐसी स्थिति में सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि खेत खाली न रहें, किसानों की आय प्रभावित न हो और देश की खाद्य सुरक्षा बनी रहे.
इसके लिए प्रत्येक जिले की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों के अनुसार विशेष कंटिंजेंसी प्लान तैयार किया जाएगा. जिन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता कम है, वहां कम पानी में तैयार होने वाली और कम अवधि वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा.
कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से किसानों को समय पर सलाह, बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वे मौसम की चुनौतियों के बावजूद बेहतर उत्पादन कर सकें.
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यूपी को 6.18 लाख मकानों की मंजूरी
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश को बड़ी उपलब्धि मिली है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के नए चरण के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के लिए 6,18,482 पक्के मकानों की स्वीकृति का पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा.
यह मंजूरी केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक चलाए जा रहे नए आवास अभियान का हिस्सा है. इस चरण में देशभर में दो करोड़ अतिरिक्त पक्के मकान बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
इनमें से 6.18 लाख से अधिक मकानों का आवंटन उत्तर प्रदेश को किया गया है, जिससे राज्य के लाखों गरीब और जरूरतमंद परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हो गया है.
सर्वे पूरा, अब लाभार्थियों तक पहुंचेंगे पक्के घर
बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आवास सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है. उन परिवारों की पहचान भी कर ली गई है जो अभी कच्चे मकानों में रह रहे हैं और पक्के घर के पात्र हैं.
अब अगले चरण में इन पात्र परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत मकान उपलब्ध कराए जाएंगे.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है कि देश का कोई भी गरीब परिवार बिना पक्के घर के न रहे. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आवास योजना को तेज गति से लागू किया जा रहा है.
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार वित्तीय और तकनीकी दोनों स्तरों पर उत्तर प्रदेश को हर संभव सहायता प्रदान करेगी.
पारदर्शिता और गुणवत्ता पर रहेगा विशेष जोर
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि मकानों की स्वीकृति के बाद अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए. साथ ही गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन हो और कोई भी पात्र लाभार्थी योजना से वंचित न रहे.
इसके लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली और पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाने पर विशेष बल दिया जाएगा. सरकार चाहती है कि योजना का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचे और निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता न हो.
केंद्र और राज्य सरकार का साझा विजन
इस महत्वपूर्ण बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं ग्रामीण विकास मंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, राजस्व राज्य मंत्री सुरेंद्र दिलेर सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
बैठक से यह स्पष्ट संकेत मिला कि कृषि और ग्रामीण विकास को केवल सरकारी योजनाओं के रूप में नहीं बल्कि एक व्यापक विकास मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को जलवायु अनुकूल बनाने और ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में काम कर रही हैं.
बैठक के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच स्पष्ट है—किसान समृद्ध हो, गांव विकसित हों और कोई गरीब परिवार बिना पक्के घर के न रहे. एमएसपी खरीद अवधि बढ़ाने और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों मकानों की स्वीकृति इसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार का यह साझा प्रयास आने वाले वर्षों में राज्य को कृषि और ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

