मीसा भारती ने CM सम्राट चौधरी के खिलाफ FIR की मांग की,पुलिस ने नहीं लिया आवेदन

Misa Bharti पटना: बिहार में जमुई की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करने का मामला अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पुलिस की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद में बदल गया है.राजद सांसद मीसा भारती ने 25 सितंबर को पटना के सचिवालय थाने पहुंचकर मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि करीब पांच से छह घंटे इंतजार करने के बावजूद पुलिस ने उनका शिकायत आवेदन स्वीकार नहीं किया.

विवाद के बीच सचिवालय थाने में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की खबर सामने आई. कर्मचारी पर मुख्यमंत्री के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर अपलोड करने का आरोप है. इस मामले में राजद ने कानून के समान रूप से लागू होने का सवाल उठाया है.

यह मामला 19 सितंबर 2026 को बिहार के जमुई जिले में हुई एक घटना से जुड़ा है. कोचिंग से लौट रही कक्षा 10 की एक नाबालिग छात्रा और उसके साथी को कुछ युवकों ने रास्ते में रोक लिया था. दोनों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की.

इस घटना के बाद पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी पुलिस ने कार्रवाई की. नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करने का मामला इसलिए संवेदनशील है, क्योंकि कानून में यौन अपराधों से पीड़ित बच्चों की पहचान सुरक्षित रखने के प्रावधान हैं.

CM सम्राट चौधरी की पोस्ट से क्यों मचा बवाल?

जमुई की घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी. मुख्यमंत्री ने परिवार को जल्द न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया था.

इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के आधिकारिक एक्स हैंडल से पीड़िता और उसके परिजनों के साथ तस्वीर साझा की गई. तस्वीर में उनके चेहरे स्पष्ट नजर आने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए. विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट को हटा दिया गया.

राजद नेताओं का आरोप है कि तस्वीर सार्वजनिक होने से नाबालिग की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ. पार्टी ने इसे पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन का मामला बताते हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की.

राजद सांसद मीसा भारती शुक्रवार देर शाम अपने समर्थकों के साथ पटना के सचिवालय थाने पहुंचीं. वह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ लिखित शिकायत देकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रही थीं.

मीसा भारती का आरोप था कि मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा किए जाने के मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब नाबालिग की पहचान उजागर करने के आरोप में अन्य लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं, तो मुख्यमंत्री के मामले में भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए.

मीसा भारती ने पुलिस पर पांच से छह घंटे तक इंतजार कराने और शिकायत आवेदन स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक सांसद को एफआईआर दर्ज कराने के लिए इतनी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों की शिकायतों पर पुलिस का रवैया कैसा होगा.

उन्होंने कहा कि वह जाति की राजनीति करने नहीं, बल्कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर शिकायत दर्ज कराने आई हैं. मीसा ने यह भी कहा कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री होने के साथ गृह विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं. ऐसे में उनके खिलाफ शिकायत पर कार्रवाई नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है.

मीसा भारती ने चेतावनी दी कि यदि उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय का रुख करेंगी. हालांकि, थाने में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाने को लेकर उनका पक्ष सामने आया है,जबकि पुलिस की ओर से इस आरोप पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है.

मीसा भारती की शिकायत के बीच सचिवालय थाने में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कर्मचारी की पहचान सागर प्रसाद के रूप में हुई है. उन पर मुख्यमंत्री के आधिकारिक एक्स हैंडल से पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर पोस्ट किए जाने के मामले में आरोप लगाया गया है.

रिपोर्टों के अनुसार, मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 23 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. शिकायत में तस्वीर के प्रसार से नाबालिग की निजता और पहचान प्रभावित होने की आशंका जताई गई है. मामले की जांच पुलिस कर रही है.

पॉक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम में क्या है प्रावधान?

पॉक्सो एक्ट की धारा 23 यौन अपराध से पीड़ित बच्चे की पहचान और उससे जुड़ी जानकारी के मीडिया में प्रकाशन से संबंधित है. वहीं, किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम की धारा 74 बच्चों की पहचान उजागर करने पर रोक से जुड़ी है.

इन प्रावधानों का उद्देश्य बच्चे की निजता, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करना है. किसी मामले में इन धाराओं का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह तथ्यों, तस्वीर के संदर्भ, पहचान उजागर होने की स्थिति और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय किया जाता है.

इस मामले में राजद का आरोप है कि मुख्यमंत्री के आधिकारिक हैंडल से तस्वीर साझा होने के कारण कानून का उल्लंघन हुआ. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री कार्यालय के कर्मचारी के खिलाफ दर्ज मामले की जांच के निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं.

तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल

राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को घेरा. उन्होंने आरोप लगाया कि नाबालिग की पहचान उजागर करने के मामले में कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए.

राजद का कहना है कि जब सोशल मीडिया पर वीडियो या तस्वीर साझा करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, तो मुख्यमंत्री से जुड़े मामले में भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. पार्टी ने इस पूरे प्रकरण को सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं.

फिलहाल इस विवाद में दो प्रमुख सवाल हैं—पहला, क्या मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा होने के मामले में कानून का उल्लंघन हुआ?

दूसरा, मीसा भारती की ओर से मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की मांग पर पुलिस का क्या रुख रहा?

मुख्यमंत्री कार्यालय के कर्मचारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच इन सवालों के जवाब सामने लाने में अहम होगी। मीसा भारती ने भी कानूनी विकल्प अपनाने की बात कही है.

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