Monday, June 29, 2026
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राम मंदिर के बाहर मीडिया कवरेज पर पाबंदी, कवरेज से पहले प्रशासन से लेनी होगी अनुमति 

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Ram Mandir Media Restriction
Ram Mandir Media Restriction

Ram Mandir Media Restriction: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद को लेकर चल रही छानबीन के  बीच अयोध्या पुलिस ने राम मंदिर के बाहर मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी है. श्री राम मंदिर के बाहर से रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों से कहा जा रहा है कि वो यहां कवरेड करने से पहले  एसपी सिक्योरिटी (SP Security) से अनुमति लें. पत्रकारों के लिए यहां से रिपोर्टिंग करने के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई है. जो पत्रकार यहां बिना प्रशासन के अनुमति के पहुंचे हैं उन्हें पुलिस के द्वारा जनबर हटाया जा रहा है.

‘भक्तों से बात नहीं करनी, चढ़ावा चोरी नहीं दिखानी’

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक पुलिस अधिकारी कथित तौर पर मीडिया कर्मियों से यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि, “यहां से चले जाइए, भक्तों से बात नहीं करनी है, चढ़ावा चोरी का मामला नहीं दिखाना है.” वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस अधिकारी पत्रकार से कह रहे हैं कि आप यहां से चले जाइये. हमारे पर उपर से आदेश आ रहे हैं, और हमें उस आदेश का पालन करना है. हैरानी का बात ये है कि पुलिस पत्रकारों को यहां आ रहे श्रद्धालुओं से बी बात नहीं करने दे रही है.

अब सड़क से करनी पड़ रही है रिपोर्टिंग

मीडिया कर्मियों का आरोप है कि उन्हें मुख्य मंदिर क्षेत्र के सामने बैरिकेड के अंदर रिपोर्टिंग की अनुमति नहीं दी जा रही. इसके चलते उन्हें सड़क किनारे खड़े होकर कवरेज करनी पड़ रही है. पत्रकारों का कहना है कि इससे घटनास्थल की वास्तविक स्थिति दर्शकों तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है.

चढ़ावा चोरी विवाद के बीच बढ़े सवाल

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर के चढ़ावे से कथित चोरी का मामला पहले से चर्चा में है. ऐसे में पत्रकारों को श्रद्धालुओं से बातचीत और इस विषय पर रिपोर्टिंग से रोकने के आरोपों ने पूरे विवाद को और संवेदनशील बना दिया है.

विपक्षी दलों और कई पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर मीडिया की पहुंच सीमित की जाती है तो इससे पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है. उनका तर्क है कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका केवल सूचना देना ही नहीं बल्कि सार्वजनिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है.

प्रशासन का पक्ष क्या हो सकता है?

हालांकि इस फैसले को लेकर  प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मौके पर काम कर रहे सुरक्षा अधिकारियों ने बताया है कि उन्हें आदेश दिये जा रहे हैं, इस लिए मीडिया को राम मंदिर के बाहर से हटाया जा रहा है. एजेंसियों का संभावित तर्क मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखना हो सकता है. बड़े धार्मिक स्थलों पर संवेदनशील क्षेत्रों में मीडिया की आवाजाही को नियंत्रित करने की व्यवस्था पहले भी विभिन्न अवसरों पर लागू की जाती रही है.

क्या सवालों से बचने की है कवायद ?

यह पूरा मामला एक बड़े सवाल को जन्म देता है—क्या सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर मीडिया की पहुंच सीमित की जा सकती है? या फिर सार्वजनिक महत्व के मामलों, विशेषकर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और दान से जुड़े मुद्दों पर स्वतंत्र रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए?

यदि पत्रकारों को वास्तव में श्रद्धालुओं से बातचीत या सार्वजनिक महत्व के मामलों की रिपोर्टिंग से रोका जा रहा है, तो यह प्रेस की स्वतंत्रता और सरकारी पारदर्शिता पर गंभीर बहस का विषय बन सकता है. वहीं यदि प्रतिबंध केवल सुरक्षा कारणों से लगाए गए हैं, तो प्रशासन के लिए स्पष्ट और सार्वजनिक दिशा-निर्देश जारी करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि भ्रम और विवाद की स्थिति समाप्त हो सके.

राम मंदिर देश की आस्था का केंद्र है और उससे जुड़ी हर गतिविधि स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक महत्व रखती है. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था और मीडिया की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. जब तक प्रशासन इस मामले पर स्पष्ट और विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं करता, तब तक संदेह की स्थिति बनी रहेगी. पूरा देश ये जानना चाहता है कि आखिर राम मंदिर औऐर इसके आस पास क्या गतिविधियां चल रही हैं ? यहां सनातन और प्रभु श्रीराम के साथ जिन लोगों चंदा चोरी का जघन्य अपराध किया है, उसके साथ प्रशासन क्या कर रहा है.सवाल ये भी है कि मीडिया कवरेज रोक कर सरकार क्या साबित करना चाहती है ?