‘नई यात्रा शुरू हुई’, J&K के CM उमर अब्दुल्ला ने पत्रकार निधि राजदान संग रचाई शादी

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला Omar Abdullah ने शनिवार को अपनी ज़िंदगी के बारे में एक जानकारी साझा करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया. उमर की पोस्ट में पत्रकार निधि राजदान के साथ तस्वीरें शेयर कीं, जिसमें दोनों शादी के कपड़ों में नज़र आ रहे थे.

“कल एक नया सफ़र शुरू हुआ”- Omar Abdullah

अब्दुल्ला ने X पर एक पोस्ट में निधि को टैग करते हुए लिखा, “कल एक नया सफ़र शुरू हुआ,” और एक रिंग इमोजी भी जोड़ा. निधि ने भी अपने सोशल मीडिया से वही तस्वीरें शेयर कीं और लिखा, “हो गया ब्रो.” उन्होंने पोस्ट के साथ एक रिंग इमोजी भी जोड़ी.

हाल ही में निधि को उमर के साथ पब्लिक इवेंट्स में देखी गई थी

Omar Abdullah के पहली शादी से दो बेटे हैं

उमर की पहली शादी 1994 में पायल नाथ से हुई थी और उनकी पहली शादी से उनके दो बेटे – ज़ाहिर और ज़मीर हैं. हालाँकि, कपल 2009 से अलग रहने लगे. तब से, उमर J&K में ही रहे जबकि उनकी पत्नी और बेटे दिल्ली में रहे.
सालों की कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार इस साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तलाक दे दिया.
तलाक का सेटलमेंट तब हुआ जब J&K के CM ने दिल्ली हाई कोर्ट के 12 दिसंबर, 2023 के फैसले को चुनौती दी, जिसमें उनके इस दावे पर सवाल उठाया गया था कि उनकी अलग रह रही पत्नी पायल ने उन्हें छोड़ दिया है और तलाक का आदेश पाने के लिए यह मानसिक क्रूरता है. HC ने अगस्त 2016 में दिल्ली की एक अदालत के पहले के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें क्रूरता का कोई आधार न बनाने के लिए उन्हें दोषी ठहराया गया था.
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्रूरता के आरोपों को “अस्पष्ट” पाया और उनकी याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने पत्नी की दलीलों को भी सही पाया, जिसने दावा किया कि वह सुरक्षा चिंताओं और बच्चों की पढ़ाई के कारण कश्मीर में नहीं बसी, जो दिल्ली में स्कूल जा रहे थे. इन आधारों पर, 30 अगस्त, 2016 को ट्रायल कोर्ट ने भी क्रूरता के आधार पर उसे तलाक देने से इनकार कर दिया था.
इससे पहले, हाई कोर्ट ने उमर को पायल को उसके खर्चों के लिए हर महीने अंतरिम मेंटेनेंस के तौर पर ₹1.5 लाख और दोनों बेटों की पढ़ाई के लिए हर एक को ₹60,000 देने का निर्देश दिया था. हालांकि, पत्नी ने अपना अंतरिम मेंटेनेंस बढ़ाने की मांग की थी, जिसे हाई कोर्ट ने अगस्त 2023 में एक अलग आदेश पारित करके मना कर दिया था. इस आदेश को भी टॉप कोर्ट में अपील में शामिल किया गया था.

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