Japan Earthquake : गुरुवार को दक्षिणी जापान के क्यूशू द्वीप पर 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया. भूकंप के कारण पश्चिमी मियाज़ाकी प्रान्त में आई सुनामी ने तबाही मचा दिया है.जापान के मौसम विभाग के मुताबिक भूकंप का केंद्र जापान के दक्षिणी मुख्य द्वीप क्यूशू के पूर्वी तट पर लगभग 30 किलोमीटर की गहराई पर था.
JAPAN JUST HAD AN EARTHQUAKE OF 7.1! This is CRAZY! Let us hope that the tsunami that comes after is NOT the one like in 2011 below!! ❗️❗️❗️❗️
Keep Japan in your hearts!#japan #地震 #earthquake #japan #Sismo #deprem #breaking #earthquake_jp #tsunami #tsunamijp pic.twitter.com/jy18XzbrbX
— Brandon (@callofboring) August 8, 2024
Japan Earthquake : तबाही से निबटने के लिए सरकार ने बनाई स्पेशल टास्क फोर्स
समचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक जापानी सरकार ने भूकंप से आई तबाही से निबटने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है.एफएफपी के मुताबिक फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है.
BREAKING: A 7.1 magnitude #earthquake struck southern Japan, triggering a tsunami that has reached western Miyazaki prefecture.
The quake, centered off Kyushu’s eastern coast at a depth of 30 km, prompted a tsunami warning, according to the Japan Meteorological Agency. 🇯🇵 pic.twitter.com/44BnvaFsqc
— Beats in Brief (@beatsinbrief) August 8, 2024
जापान में हर साल आते हैं कम से कम 1500 भूकंप
राहत की बात ये है कि 7.1 तीव्रता के भूकंप में भी तकनीकि रुप से समृद्ध जापान मे बने मकान भरभराकर नही गिरे. जापान दुनिया के सबसे अधिक टेक्टोनिक रूप से सक्रिय देशों में से एक है यहां के मकान ऐसे मानकों के साथ बनाए गये हैं और ये सुनिश्चित किया गया है कि इन के कंस्ट्रक्श भारी से भारी भूकंप को भी झेल सकें. आपको बता दें कि जापान 125 मिलियन की आबादी में इस देश में लगभग हर साल छोटे बड़े कम से कम 1500 भूकंप के झटके आते हैं. इनमें से ज्यादातक झटके हल्के होते हैं.
साल के शुरुआत में आये भूकंप में कम से कम 260 लोगों की मौत हुई थी मौत ..
जापान में अब तक का सबसे बड़ा भूकंप मार्च 2011 में आया था जब जापान के पूर्वोत्तर तट पर समुद्र के नीचे 9.0 तीव्रता का एक बड़ा झटका लगा था. भूकंप के कारण आई सुनामी में लगभग 18,500 लोग मारे गए य़े या लापता हो गए थे. 2011 के भूकंप ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में तीन रिएक्टरों को पिघला दिया. जिससे जापान में युद्ध के बाद की सबसे खराब आपदा और चेरनोबिल के बाद सबसे गंभीर परमाणु दुर्घटना हुई.





