Saturday, July 4, 2026
Home Breaking News राम मंदिर चढ़ावा चोरी छिपाने के लिए डिलीट किये गये CCTV फुटेज…आरोपी...

राम मंदिर चढ़ावा चोरी छिपाने के लिए डिलीट किये गये CCTV फुटेज…आरोपी ने किये बड़े खुलासे 

0
14
Ram Mandir Donation Theft
Ram Mandir Donation Theft

Ram Mandir Donation Theft Investigation Update अयोध्या : राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पूरे नेटवर्क से जुड़े नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से हुई पूछताछ में चोरी की रकम के बंटवारे, सबूत मिटाने के लिए CCTV फुटेज डिलीट करने और पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं. हालांकि इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.

Ram Mandir Donation Theft: 45 दिनों की CCTV फुटेज दिखाने के बाद पूछताछ में अहम खुलासे

मंदिर में चोरी के मामले में गिरफ्तार आरेपियों से लगातार SIT की टीम पूछताछ कर रही है. पूछताछ को लेकर सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी अविनाश शुक्ला को पुलिस ने करीब 45 दिनों के CCTV फुटेज  दिखायें, जिसके बाद उसने चोरी में अपनी भूमिका स्वीकार करते हुए कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं. इसके बाद 13 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पूरी होने पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

रकम का होता था बंटवारा

सूत्र के मुताबिक पूछताछ में आरोपी अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर बताया कि चढ़ावे से निकाली गई रकम सभी आरोपियों के बीच बांटी जाती थी. अधिकांश मामलों में बराबर हिस्सेदारी होती थी, जबकि कुछ अवसरों पर कुछ लोगों को अधिक हिस्सा भी मिलता था.

CCTV फुटेज डिलीट कर मिटाए जाते थे सबूत

जांच में सामने आया है कि चोरी को छिपाने के लिए कंट्रोल रूम तक पहुंचकर CCTV रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ की जाती थी. सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने कई बार फुटेज डिलीट करने की कोशिश की और एक-दो बार इसमें सफलता भी मिली. हालांकि पुलिस का दावा है कि जांच के लिए जरूरी अहम फुटेज उसके कब्जे में हैं, जिनके आधार पर पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है.

टिन्नू यादव की भूमिका पर जांच एजेंसियों की नजर

पूछताछ में सामने आया कि पूरे नेटवर्क में टिन्नू यादव का प्रभाव सबसे अधिक था. वह सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा होने के कारण बाकी आरोपियों को सतर्क करता था और कथित तौर पर भरोसा दिलाता था कि “कुछ नहीं होगा, CCTV फुटेज डिलीट कर दिए जाएंगे.” जांच एजेंसियां उसकी भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही हैं.

कंट्रोल रूम तक ऐसे चलता था पूरा खेल

जांच के मुताबिक, जब चढ़ावे की गणना होती थी, तब कंट्रोल रूम की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाती थी. यदि कोई कर्मचारी कंट्रोल रूम की ओर बढ़ता दिखाई देता, तो उसका ध्यान दूसरी तरफ भटकाने की कोशिश की जाती थी ताकि चोरी और CCTV से छेड़छाड़ की भनक किसी को न लगे.

चोरी के पैसों से खरीदी गई ब्रेजा कार!

सूत्रों के अनुसार, अविनाश शुक्ला ने पूछताछ में बताया कि चोरी की रकम का इस्तेमाल निजी जरूरतों में किया गया. उसने चंदे की चोरी से मिले पैसो से  ब्रेजा कार खरीदी, जिसे अपने भाई के नाम पर रजिस्टर कराया. इसके अलावा गांव में मकान बनवाने और परिवार को बड़ी रकम देने की बात भी बताई .

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की रकम से और कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदी गईं तथा पैसा किन माध्यमों से खर्च किया गया.

चोरी के बाद सुनसान इलाके में होती थी बैठक

जांच में यह भी सामने आया कि चोरी की वारदात के बाद आरोपी 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के सुनसान इलाके में बैठक करते थे. सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों में गिरोह के सभी प्रमुख सदस्य शामिल होते थे और आगे की रणनीति तय की जाती थी. बताया जा रहा है कि मामला सार्वजनिक होने से ठीक पहले भी ऐसी एक बैठक हुई थी.

अब किन बिंदुओं पर हो रही जांच?

पुलिस और जांच एजेंसियां अब कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच कर रही हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • चोरी कब से चल रही थी?

  • कुल कितनी रकम की हेराफेरी हुई?

  • CCTV फुटेज कितनी बार डिलीट की गई?

  • किस स्तर पर किसने मदद की?

  • चोरी की रकम किन-किन लोगों तक पहुंची?

  • आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और हाल की खरीद-फरोख्त का विवरण।

फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क तथा चोरी की वास्तविक रकम का पता लगाने में जुटी हैं. मामले में सामने आए अधिकांश खुलासे पुलिस सूत्रों और पूछताछ के आधार पर हैं, जिनकी अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी.