Saharanpur Mosque Demolition सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद शुरू हुआ विवाद अब सियासी और कानूनी दोनों मोर्चों पर चर्चा में है। इसी बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर में आयोजित PDA कार्यक्रम में मस्जिद को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को संयम और धैर्य बनाए रखना होगा। उनका दावा है कि मस्जिद दोबारा वहीं बनेगी और इस मामले की लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी। यह बयान इकरा हसन के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के हवाले से सामने आया है।
इकरा हसन ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि कानूनी लड़ाई में उनका पक्ष मजबूत है। उन्होंने लोगों से कुछ समय धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले महीनों में इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया सामने आएगी।
Saharanpur Mosque Demolition: ‘मस्जिद वहीं बनेगी और जरूर बनेगी’
PDA कार्यक्रम के दौरान इकरा हसन ने कहा कि लोगों को इस मुद्दे पर सब्र रखना चाहिए। उनके मुताबिक, “मस्जिद वहीं बनेगी और जरूर बनेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को अदालत में चुनौती दी जाएगी और उन्हें अपने दस्तावेजों पर भरोसा है।
सांसद ने बीजेपी और उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिदों को लेकर विवाद खड़ा करके धार्मिक ध्रुवीकरण का मुद्दा उठाया जा रहा है। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं और इन पर सरकार या बीजेपी का पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है।
‘सहारनपुर को दूसरा संभल बनाने की कोशिश थी’
इकरा हसन ने आरोप लगाया कि सहारनपुर को दूसरे संभल में बदलने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद स्थानीय लोगों ने संयम बनाए रखा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सहारनपुर में अलग-अलग समुदायों के लोगों से बातचीत के दौरान उन्हें मस्जिद गिराए जाने को लेकर आपत्ति सुनने को मिली। उनके मुताबिक, धार्मिक आस्था से जुड़े किसी भी स्थल को इस तरह हटाया जाना उचित नहीं है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि सहारनपुर को ‘दूसरा संभल बनाने’ का आरोप इकरा हसन की राजनीतिक टिप्पणी है। इसे प्रशासन द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
क्या है सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर काफी समय से जमीन और निर्माण की वैधता का विवाद चल रहा था। प्रशासन की ओर से इसे सरकारी जमीन पर बना अनधिकृत निर्माण बताया गया था। सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही करीब 315 वर्ग मीटर जमीन से जुड़े मामले में मस्जिद प्रबंधन पर 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति भी लगाई गई थी।
मस्जिद प्रबंधन की ओर से इस आदेश को चुनौती दी गई। इसके बाद सहारनपुर जिला जज ने 2 सितंबर 2026 को अपील खारिज कर दी। इसके कुछ ही दिन बाद 5 सितंबर 2026 की सुबह प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
मुस्लिम पक्ष का क्या दावा है?
मस्जिद से जुड़े पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि यह पुरानी मस्जिद थी और जमीन को लेकर उनका पक्ष अलग है। मीडिया रिपोर्टों में मस्जिद के मुतवल्ली की ओर से इसे करीब एक सदी से भी अधिक पुरानी बताया गया है। वहीं प्रशासन का पक्ष रहा है कि निर्माण सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से किया गया था। इस तरह विवाद का एक प्रमुख हिस्सा जमीन के स्वामित्व और निर्माण की कानूनी स्थिति से जुड़ा है।
मामला अब इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा
ध्वस्तीकरण के बाद विवाद अब इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है। 9 सितंबर को दायर याचिका में सिटी मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई के आदेश और जिला जज के 2 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई है। याचिका में दोनों आदेशों के अधिकार क्षेत्र और कानूनी आधार पर सवाल उठाए गए हैं।
बाद की न्यायिक कार्रवाई में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मस्जिद से जुड़े 6.41 करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली पर फिलहाल रोक भी लगाई गई है और मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित बताई गई है। इससे साफ है कि ध्वस्तीकरण के बाद भी इस विवाद का कानूनी अध्याय खत्म नहीं हुआ है।
ध्वस्तीकरण के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
5 सितंबर को मस्जिद गिराए जाने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर हलचल बढ़ी। इकरा हसन ने दावा किया था कि उन्हें सहारनपुर जाने से पहले कैराना स्थित आवास पर नजरबंद किया गया। उस समय पुलिस और प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बढ़ाई गई थी।
वहीं, प्रशासन की कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार जिला अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा था, जिसके बाद ध्वस्तीकरण हुआ। इसलिए इस पूरे मामले में राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ अदालतों में चल रही कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है।
यूपी चुनाव से पहले मुद्दे ने पकड़ा जोर
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि में सहारनपुर मस्जिद विवाद को लेकर नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं। इकरा हसन ने अपने बयान में इसे धार्मिक ध्रुवीकरण से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है, जबकि प्रशासन की कार्रवाई का आधार अदालतों के आदेश और सरकारी जमीन पर कथित अनधिकृत निर्माण से जुड़ा रहा है।
अब इस मामले में आगे की दिशा इलाहाबाद हाई कोर्ट की सुनवाई और संबंधित पक्षों की कानूनी दलीलों से तय होगी। फिलहाल इकरा हसन का स्पष्ट कहना है कि “मस्जिद वहीं बनेगी” और वह इस मुद्दे को अदालत में आगे ले जाने की बात कर रही हैं।

