कांग्रेस के सीनियर नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत Harish Rawat ने शनिवार को साफ़ किया कि उन्होंने पार्टी के किसी भी पद से इस्तीफ़ा नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि अगर एनफ़ोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की कार्रवाई से भ्रष्टाचार से लड़ने की कांग्रेस की बात कमज़ोर होती है, तो वे अपने पदों से इस्तीफ़ा देने को तैयार हैं.
रावत ने कहा कि अगर देहरादून में हाल ही में ED की कार्रवाई से भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्टी का स्टैंड कमजोर होता है, तो वह स्टेट एग्जीक्यूटिव कमेटी और AICC वर्किंग कमेटी के मेंबर के तौर पर इस्तीफा देने पर विचार करेंगे.
कांग्रेस की मेंबरशिप उनके “खून और हड्डियों” में है- हरिश रावत
एक सोशल मीडिया पोस्ट में, रावत ने कहा कि कांग्रेस की मेंबरशिप उनके “खून और हड्डियों” में है, और इसे अपनी पहचान का सेंटर बताया और कहा कि यह उनके साथ मरने के बाद भी रहेगी.
देहरादून में हाल ही में ED की तलाशी को “दिखावटी तमाशा” बताते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी कोई भी कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्टी की लड़ाई को कमजोर करे.
यह सफाई ED द्वारा चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर तलाशी के बाद आई, जो अभी रावत के पर्सनल असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहे हैं और इससे पहले 2014 से 2017 तक रावत के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उनके ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के तौर पर काम कर चुके हैं.
ये तलाशी 2016 उत्तराखंड सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन कमीशन भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई थी.
सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में हरीश रावत के पीए के पास भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी आदि पकड़ी गई या पकड़ाई गई, इस तथ्य का खुलासा तो आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैं जितने भी पदों पर रहा, चाहे पार्टी में रहा या सरकार में रहा,… pic.twitter.com/Z6rZYcVev0
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) September 11, 2026
कांग्रेस के प्रति उनका कमिटमेंट उनकी पहचान का आधार है- हरिश रावत
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रति उनका कमिटमेंट उनकी पहचान का आधार है, साथ ही उन्होंने यह भी साफ़ किया कि वह नहीं चाहते कि उनसे जुड़ी कोई भी चीज़ भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्टी के कैंपेन पर बुरा असर डाले.
यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है जब BJP और कांग्रेस दोनों ने 2027 के उत्तराखंड असेंबली इलेक्शन से पहले ऑर्गेनाइज़ेशनल एक्टिविटी तेज़ करना शुरू कर दिया है.
Harish Rawat का राजनीतिक सफर
हरीश रावत अब तक नौ बार लोकसभा इलेक्शन लड़ चुके हैं. वह पाँच बार MP रह चुके हैं. तीन बार, वह 1980, 1984 और 1989 में अल्मोड़ा सीट से चुने गए, जबकि एक बार 2009 में हरिद्वार से। वह 2002 से 2008 के बीच राज्यसभा MP भी रहे.
वह 2012-14 तक UPA-2 में सेंट्रल वॉटर रिसोर्स मिनिस्टर थे और 2014 में धारचूला से लेजिस्लेटिव सीट जीती थी. 2017 के असेंबली इलेक्शन में दो सीटों, हरिद्वार रूरल और किच्छा से रावत की हार के बावजूद, पार्टी की सेंट्रल लीडरशिप ने उन्हें 2019 के लोकसभा इलेक्शन में नैनीताल-उधम सिंह नगर सीट से टिकट दिया.
इस चुनाव में भी उन्हें BJP के अजय भट्ट ने 3,39,096 वोटों के अंतर से हराया था. 2022 के विधानसभा चुनाव में, वह लालकुआं से BJP के मोहन सिंह बिष्ट से 17,527 वोटों से चुनाव हार गए थे.
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