Sunday, June 28, 2026
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ऑपरेशन सिंदूर में शहीद जवानों के नाम पहली बार हुए सार्वजनिक? सरकार ने बताया पूरा सच

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Operation Sindoor Martyrs
Operation Sindoor Martyrs

Operation Sindoor Martyrs : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह वीर सैनिकों की पहचान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन में शहीद हुए जवानों की जानकारी सरकार ने सार्वजनिक नहीं की और उनके नाम राष्ट्रीय समर स्मारक पर अंकित होने के बाद ही सामने आए।

हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया है कि यह कहना गलत है कि इन सैनिकों को पहली बार अब आधिकारिक मान्यता मिली है। मंत्रालय के अनुसार, इन सभी वीर सैनिकों को समय-समय पर सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दी गई, उनके बलिदान को स्वीकार किया गया और बाद में वीरता पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।

Operation Sindoor Martyrs:रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?

रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर में सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह सैनिकों की पहचान पहली बार राष्ट्रीय समर स्मारक पर नाम अंकित होने के बाद सार्वजनिक हुई. मंत्रालय ने इसे पूरी तरह तथ्यात्मक रूप से गलत बताया.

मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्र ने इन सभी वीर सैनिकों को बहुत पहले ही श्रद्धांजलि अर्पित कर दी थी और उनके बलिदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जा चुका था.

11 मई 2025 को ही दी गई थी श्रद्धांजलि

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 11 मई 2025, यानी ऑपरेशन सिंदूर समाप्त होने के अगले दिन आयोजित तीनों सेनाओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने सार्वजनिक रूप से इन सैनिकों को श्रद्धांजलि दी थी.

उन्होंने कहा था कि इन सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपना कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया और राष्ट्र उनके प्रति सदैव ऋणी रहेगा.

वीरता पुरस्कारों से भी हुए सम्मानित

सरकार ने बताया कि बाद में इन वीर सैनिकों को उनकी असाधारण बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. 14 अगस्त 2025 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इन सम्मानों की जानकारी सार्वजनिक की गई थी. यह भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च परंपरा के अनुरूप उनके शौर्य और बलिदान की औपचारिक राष्ट्रीय मान्यता थी.

व्हाइट नाइट कोर ने भी दी थी श्रद्धांजलि

भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिना किसी देरी के इन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी थी।

इसके अलावा—

  • 15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित आर्मी डे परेड के दौरान थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने तीन शहीद सैनिकों के परिजनों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया।
  • 8 अक्टूबर 2025 को वायुसेना दिवस समारोह में वायुसेना प्रमुख ने संबंधित वीर सैनिकों के परिवारों को वीरता सम्मान प्रदान किया.
राष्ट्रीय समर स्मारक पर नाम अंकित करने की क्या है प्रक्रिया?

रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीद सैनिकों के नाम अंकित करने की एक निर्धारित और व्यवस्थित प्रक्रिया होती है.

भारतीय सशस्त्र बल इस प्रक्रिया का पूरी गरिमा, सम्मान और नियमों के अनुसार पालन करते हैं. इसलिए यह कहना कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया या जानबूझकर देरी की गई, पूरी तरह तथ्यहीन है.

ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए 6 वीर सैनिकों के नाम

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह सैनिकों के नाम इस प्रकार हैं—

  1. सूबेदार मेजर पवन कुमार – पंजाब रेजीमेंट
  2. राइफलमैन सुनील कुमार – जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंट्री (JAK LI)
  3. लांस नायक दिनेश कुमार – फील्ड रेजीमेंट (तोपखाना)
  4. अग्निवीर मुद मुरली नाइक – लाइट रेजीमेंट (तोपखाना)
  5. हवलदार सुनील कुमार सिंह – ईएमई
  6. सार्जेंट सुरेंद्र कुमार – भारतीय वायुसेना

रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बीएसएफ के एक सब-इंस्पेक्टर और एक जवान ने भी देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया.

सरकार ने विपक्ष के दावों पर जताई आपत्ति

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर बिना तथ्यों के बहस छेड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसे दावे न केवल वास्तविक तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करते हैं, बल्कि शहीदों के परिवारों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचा सकते हैं.

मंत्रालय ने दोहराया कि भारतीय सशस्त्र बल हर उस सैनिक के सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं जिसने देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है.

ऑपरेशन सिंदूर के छह वीर सैनिकों की पहचान पहली बार सार्वजनिक होने का दावा रक्षा मंत्रालय ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. सरकार का कहना है कि इन सभी शहीदों को ऑपरेशन के तुरंत बाद सार्वजनिक श्रद्धांजलि दी गई, वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया और अब राष्ट्रीय समर स्मारक पर उनके नाम अंकित कर राष्ट्र ने उन्हें स्थायी सम्मान प्रदान किया है. इन वीरों का साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा.