Sunday, June 28, 2026
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भविष्य का वैश्विक शहर होगा ‘हाथरस अर्बन सेंटर’: यीडा ने शुरू किया ‘मास्टर प्लान 2041’

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Hathras Urban Center
Hathras Urban Center

Hathras Urban Center ग्रेटर नोएडा/हाथरस : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में औद्योगिक क्रांति को गति देने के साथ-साथ एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की नींव रख दी है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने अपने फेज-2 विकास के तहत ‘महायोजना/मास्टर प्लान 2041’ के अंतर्गत ‘हाथरस अर्बन सेंटर’ पर काम तेज कर दिया है। यह नया शहर न केवल एक हाईटेक औद्योगिक और आवासीय सैटेलाइट टाउन बनेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र की राजनीति में विकासवाद का नया अध्याय भी लिखेगा।

Hathras Urban Center : ब्रज क्षेत्र में विकास की राजनीति

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दृष्टिकोण से हाथरस और उसके आस-पास के क्षेत्र (अलीगढ़, मथुरा, आगरा) बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाते रहे हैं। पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र की राजनीति में जातीय समीकरणों का भारी प्रभाव रहा है। हालांकि, योगी सरकार द्वारा हाथरस को एक विशाल इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में चुनना, इस पूरे क्षेत्र को ‘जातिवाद’ से ‘विकासवाद’ की ओर मोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। लाखों रोजगार के अवसरों का सृजन कर सरकार युवाओं और स्थानीय आबादी को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर रही है, जिससे विपक्ष के पारंपरिक जातीय गोलबंदी के दांव कमजोर पड़ सकते हैं।

10 हजार एकड़ में बसेगा अत्याधुनिक हाईटेक शहर

इस महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के लिए हाथरस और सासनी तहसील के कुल 50 से अधिक गांवों को अधिसूचित किया गया है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 4 हजार हेक्टेयर (करीब 10 हजार एकड़) होगा। इस अत्याधुनिक शहर के सुनियोजित नियोजन के लिए कंसल्टेंट कंपनी ‘आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड’ को नियुक्त किया गया है, जो जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तकनीक पर आधारित नक्शों के जरिए इसका विकास सुनिश्चित कर रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का यह एकीकरण स्थानीय स्तर पर भूमि के मूल्यों में भारी वृद्धि लाएगा, जिससे किसानों और भूमिस्वामियों में सरकार के प्रति सकारात्मक संदेश जा रहा है।

अर्बन सेंटर की चार प्रमुख श्रेणियां

मास्टर प्लान 2041 के तहत इस अर्बन सेंटर को चार मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जो इसे पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएंगे:

  1. औद्योगिक जोन: इस विशाल भूभाग का मुख्य ध्यान भारी विनिर्माण इकाइयों और फैक्ट्रियों पर केंद्रित होगा, जो वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बनेंगी।

  2. आवासीय क्षेत्र: यहां काम करने वाले अधिकारियों और श्रमिकों के लिए आधुनिक सोसायटियां, फ्लैट्स और किफायती आवास विकसित किए जाएंगे।

  3. कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स हब: व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मॉल, कमर्शियल टावर, होटल्स और विशाल वेयरहाउस के लिए विशेष स्थान आरक्षित किए गए हैं।

  4. ग्रीन बेल्ट: पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए कुल योजना क्षेत्र का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरी तरह हरित और खुले क्षेत्र के रूप में संरक्षित रहेगा।

सामरिक लाभ और शानदार कनेक्टिविटी

प्रस्तावित हाथरस अर्बन सेंटर की भौगोलिक स्थिति इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यह नया शहर सीधे नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के कैचमेंट एरिया में आता है, जिसके लिए यीडा एक नया एक्सप्रेस-रोड नेटवर्क विकसित कर रहा है। इसके साथ ही यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेसवे के काफी करीब है और नेशनल हाईवे-93 (आगरा-अलीगढ़), बरेली-मथुरा हाईवे तथा स्टेट हाईवे-33 से शानदार तरीके से जुड़ा हुआ है। इसे आगरा के एक ‘सैटेलाइट टाउन’ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे ताजनगरी का औद्योगिक दबाव भी कम होगा।

स्थानीय उद्योगों को वैश्विक मंच और ओडीओपी को नई उड़ान

हाथरस में वर्तमान में सक्रिय 10 हजार से अधिक पंजीकृत एमएसएमई (MSME) इकाइयों को इस सेंटर में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत हाथरस की विश्वप्रसिद्ध ‘हींग’ और ‘गुलाल’ उद्योग को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पैकेजिंग और एक्सपोर्ट हब की सुविधाएं मिलेंगी। इसके अतिरिक्त, ब्रज क्षेत्र की कृषि प्रधानता को देखते हुए बड़े कोल्ड स्टोरेज, food processing units और डेयरी प्लांट्स को प्राथमिकता दी जाएगी।

लाखों रोजगार की संभावनाएं और सामाजिक बदलाव

यीडा के अनुसार, इस महायोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है। हाथरस अर्बन सेंटर में रेडीमेड गारमेंट्स, ग्लास बीड्स (कांच के मोती), पीतल के आभूषण (पायल), मशीन टूल्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के कलपुर्जों के लिए विशेष ब्लॉक बनाए जाएंगे। अगले चरण में मेडिकल-सर्जिकल उपकरण जैसी वैश्विक कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल स्थानीय युवाओं के लिए लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे, बल्कि पलायन रुकेगा और पश्चिमी यूपी की आर्थिक व राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।