उत्तराखंड के हल्द्वानी में नैनीताल HC के आदेश के बाद माहौल तनावपूर्ण है.इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल किया गया है जिसपर गुरुवार को सुनवाई होगी.
HC के आदेश के बाद 50 हजार परिवार बेघर होने की कगार पर
नैनीताल हाइकोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर बसी कॉलोनी को एक हफ्ते के अंदर नोटिस देकर हटाने के लिए आदेश दिया है. कोर्ट के आदेश के बाद करीब 50 हजार लोगों के बेघरबार हो जाने का खतरा मंडरा रहा है .अगर कोर्ट के फैसले का पालन किया गया तो इस जमीन पर बसे करीब 50 हजार लोग बेघर हो जाएंगे. यहां रहने वाली आबादी ज्य़ादातर मुस्लिम है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद नैनीताल के जिलाअधिकारी धीरज सिंह गब्रयाल ने बयान दिया है कि प्रशासन इस अतिक्रमण को हटाने के लिए तैयारी में है. अतिरिक्त फोर्स की मांग की गई है.आने वाले समय में उन्हें हटाया जायेगा.
वहीं कुमाउं रेंज के DIG नीलेश भरणे के मुताबिक उच्च न्यायलय के आदेश के बाद तमाम संगठनों और लोगों से बात की गई है. पूरे इलाके को सुपर जोन, और सेक्टर्स में बांट दिया गया है. प्रशासन सभी जोन का आंकलन गंभीरता से कर रहा है.
शाहीनबाग की तर्ज पर बनफूलपुरा में आंदोलन तेज
नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले के बाद बनभूलपुरा की पूरी अबादी सड़कों पर है और विरोध प्रदर्शन कर रही है. लोग अपने घर बार बचाने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं. ये मामला 2016 से कोर्ट में है . इस मामले में सुनवाई के दौरान रेलेव की तरफ से कहा गया कि रेलवे की 29 एकड़ जमीन पर अवैध अतिक्रमण है. यहां 4365 अतिक्रमणकारी मौजूद हैं. कोर्ट को आदेश के बाद इन लोगों को पीपी एक्ट के तहत नोटिस दिया गया था, जिसके बाद रेलवे में भी सुनवाई पूरी हो गई है .किसी के भी पास जमीन के कागजात नहीं हैं.
आंदोलन के बीच विपक्षी नेताओं ने उठाई आवाज
अब इस मामले में उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत सामने आये हैं. रावत ने सीएम पुष्कर सिंह रावत को सोशल मीडिया पर खुला पत्र लिखा है. रावत ने लिखा है- कानून अपनी जगह पर ठीक है लेकिन मानवीय पक्ष को देखते हुए कोई बीच का रास्ता निकाल जाना चाहिये . हरीश रावत ने सीएम धामी को संबोधित करते हुए कहा है कि अगर यहां से 50 हजार लोगों के हटाया जायेगा तो ये लोग कहां जायेंगे ? एक अशांति का वातावरण पूरे हल्द्वानी और कुमाउं के अंचल में फैलेगा. रावत ने सीएम को संबोधित करते हुए लिखा है कि कड़कड़ती ठंढ़ में केवल कानूनी पक्ष देखकर या कानूनी आदेश को अलग तरह से इंटरप्रेट करके 50 हजार लोगों से उनकी छतों को छीनने जा रहे हैं.
बीएसपी प्रमुख मायावती ने ट्वीटर पर लिखा है: “उत्तराखण्ड स्टेट के हल्द्वानी में बर्फीले मौसम में ही अतिक्रमण हटाने के नाम पर हजारों गरीब व मुस्लिम परिवारों को उजाड़ने का अमानवीय कार्य अति-दुःखद। सरकार का काम लोगों को बसाना है, न कि उजाड़ना। सरकार इस मामले में जरूर सकारात्मक कदम उठाये .
उत्तराखण्ड स्टेट के हल्द्वानी में बर्फीले मौसम में ही अतिक्रमण हटाने के नाम पर हजारों गरीब व मुस्लिम परिवारों को उजाड़ने का अमानवीय कार्य अति-दुःखद। सरकार का काम लोगों को बसाना है, न कि उजाड़ना। सरकार इस मामले में जरूर सकारात्मक कदम उठाये, बी.एस.पी. की यह माँग।
— Mayawati (@Mayawati) January 4, 2023
लोग सोशल मीडिया के जरिये अवाज उठा रहे हैं.
BREAKING: Local administration prepares an action plan to carry out the demolition exercise in #Haldwani.
Over 50,000 Muslims on the verge of being homeless. pic.twitter.com/BrTfzRx3Sf
— Shuja (@shuja_2006) January 4, 2023
सवाल ये है कि हल्द्वानी में जिस 29 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण का मामला है, वो रेलवे की जमीन है. और वर्षो से यहां अतिक्रमण चल रहा है . ऐसे में सरकारी जमीन पर सालों से कब्जा होता आ रहा था और तब प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा. लोग धीरे धीरे वहां जमते गये. ऐसे में तो कानून का डंडा उन अधिकारियों और सत्ता के नुमाइंदो पर चलना चाहिये जिन के रहते हुए ये गैर कानूनी बसाहट हुई.सवाल प्रशासन की नीयत का भी है.

