EPF पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 15,000 से बढ़कर 25,000 रुपये हुई वेतन सीमा; 51 लाख कर्मचारियों को फायदा

EPF Wage Ceiling Hike:केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF (Employees’ Provident Fund) से जुड़े कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दी है. सरकार के मुताबिक इस बदलाव से करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आ सकेंगे.

इस फैसले का सीधा संबंध उन कर्मचारियों से है, जिनकी मासिक सैलरी अभी 15,000 रुपये से अधिक लेकिन 25,000 रुपये तक है। नई सीमा लागू होने के बाद ऐसे कर्मचारियों के लिए EPFO के जरिए भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का दायरा बढ़ेगा।

EPF Wage Ceiling Hike:15 हजार से 25 हजार हुई EPF की वेतन सीमा

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, EPF के तहत मौजूदा वेतन सीमा 15,000 रुपये प्रति माह थी. यह सीमा सितंबर 2014 में निर्धारित की गई थी. अब इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है. इस बदलाव को लंबे समय से की जा रही मांगों के संदर्भ में देखा जा रहा है.

सरकार की ओर से बताया गया है कि इस प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के स्तर पर चर्चा हुई थी. व्यय वित्त समिति ने भी 16 जून 2026 की बैठक में इस संबंध में सिफारिश की थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने 16 सितंबर 2026 को प्रस्ताव को मंजूरी दी.

51 लाख कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

सरकार के अनुसार, नई EPF वेतन सीमा का सबसे बड़ा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनकी मासिक सैलरी 15,000 से 25,000 रुपये के बीच है. करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारी EPFO की वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हो सकेंगे.

इस फैसले के लिए केंद्र सरकार को हर साल करीब 11,339 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च उठाना होगा. वहीं पांच साल की अवधि में अनुमानित खर्च लगभग 56,696 करोड़ रुपये बताया गया है.

सरकार का तर्क है कि बदलते वेतन स्तर और औपचारिक रोजगार के विस्तार को देखते हुए सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया जाना जरूरी है.

कर्मचारियों को मिलेंगे EPF, पेंशन और बीमा के फायदे

EPF वेतन सीमा बढ़ने से पात्र कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा के तीन प्रमुख रास्ते मजबूत होंगे.

पहला, EPF बचत: कर्मचारी भविष्य निधि के जरिए नौकरी के दौरान नियमित रूप से सेवानिवृत्ति के लिए बचत का प्रावधान रहता है.

दूसरा, EPS पेंशन: कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS के तहत पात्र कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन संबंधी सुरक्षा मिलती है.

तीसरा, EDLI बीमा: कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना यानी EDLI के तहत कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने की स्थिति में पात्र परिवार को बीमा लाभ मिलता है.

केंद्र सरकार ने भी EPF, EPS और EDLI को संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा के प्रमुख साधनों के रूप में रेखांकित किया है.

सरकार का खर्च बढ़कर 11,339 करोड़ रुपये होगा

EPF की वेतन सीमा बढ़ाने का असर सिर्फ कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा कवरेज तक सीमित नहीं है. सरकार को इसके लिए अतिरिक्त वित्तीय भार भी उठाना होगा.

सरकार के अनुमान के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत वार्षिक सरकारी व्यय करीब 11,339 करोड़ रुपये होगा. वर्तमान बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये बताई गई है.

पांच वर्षों में इस फैसले से अनुमानित कुल सरकारी खर्च लगभग 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.

EPFO के दायरे का होगा विस्तार

भारत में EPFO संगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराता है. सरकार लगातार EPFO के कवरेज को बढ़ाने और अधिक कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दे रही है.

फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने भी बताया था कि EPFO के प्रावधानों का दायरा बढ़ाया गया है और सामाजिक सुरक्षा कवरेज को व्यापक बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं.

कर्मचारियों और कंपनियों के बीच बढ़ सकता है सामाजिक सुरक्षा का भरोसा

सरकार का कहना है कि रोजगार सिर्फ मासिक वेतन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि कर्मचारियों को भविष्य के लिए सामाजिक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए. EPF की वेतन सीमा बढ़ाने का फैसला इसी दृष्टिकोण से जोड़ा जा रहा है.

नई व्यवस्था से कंपनियों में काम करने वाले उन कर्मचारियों का सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ेगा जो अब तक 15,000 रुपये की सीमा के कारण EPFO की अनिवार्य कवरेज व्यवस्था से बाहर रह सकते थे.

सरकार के मुताबिक सामाजिक सुरक्षा का व्यापक कवरेज कर्मचारियों को लंबे समय तक औपचारिक रोजगार से जुड़े रहने में मदद कर सकता है और नियोक्ताओं के लिए भी स्थिर कार्यबल तैयार करने में सहायक हो सकता है.

EPF की नई सीमा से क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन वाले कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग EPFO की वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आएगा.

इससे कर्मचारियों को भविष्य निधि बचत, पेंशन और बीमा से संबंधित सुरक्षा तक पहुंच मिलेगी. हालांकि, किसी कर्मचारी के वास्तविक PF योगदान की गणना उसकी नौकरी, EPFO कवरेज और लागू नियमों के अनुसार होगी; इसलिए केवल वेतन सीमा बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी के हाथ में मिलने वाली सैलरी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी.

सामाजिक सुरक्षा को विस्तार देने की दिशा में कदम

केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से औपचारिक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने पर जोर दे रही है. EPFO की ओर से 2026 में ऐसे कर्मचारियों को भी EPF व्यवस्था से जोड़ने के लिए Employees’ Enrolment Campaign 2026 चलाया जा रहा है, जिसमें पात्र कर्मचारियों को पिछली अवधि की कुछ शर्तों के तहत EPF कवरेज में शामिल करने का अवसर दिया गया है. यह अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक चलना है.

ऐसे में EPF की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार की इसी व्यापक दिशा का हिस्सा माना जा रहा है.

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