डेमोक्रेट्स ने मंगलवार को मिडटर्म चुनावों में US हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों में जीत हासिल करके इतिहास रच दिया. प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप Donald Trump को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा और अब उनके बाकी कार्यकाल के लिए कांग्रेस पर रिपब्लिकन का कंट्रोल खत्म हो गया.
महंगाई, ईरान युद्ध और घटती लोकप्रियता रही हार की वजह
प्रेसिडेंट की कम अप्रूवल रेटिंग, बढ़ती कीमतों पर वोटरों का गुस्सा और ईरान में एक अनपॉपुलर युद्ध ने डेमोक्रेट्स को टेक्सास, साउथ कैरोलिना, कैंसस और आयोवा जैसे कभी भरोसेमंद रिपब्लिकन गढ़ों में निर्णायक जीत दिलाने में मदद की. कांग्रेस पर कंट्रोल के साथ, डेमोक्रेट्स के पास अब ट्रंप के घरेलू और विदेश नीति के एजेंडे को रोकने के लिए काफी पावर होगी.
डेमोक्रेट्स को मिला 20 साल की सबसे अच्छी जीत
NBC न्यूज़ के अनुमान के मुताबिक, डेमोक्रेट्स 435 सदस्यों वाले हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स में 255 सीटें जीतने की तरफ़ बढ़ रहे है. ये पार्टी की पिछली सीटों से 40 से ज़्यादा सीटें ज़्यादा और लगभग 20 सालों में उनका सबसे अच्छा नतीजा है. इन नतीजों ने रिप्रेजेंटेटिव हकीम जेफ़रीज़ को हाउस का स्पीकर बनने की लाइन में ला दिया.
डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने सीनेट पर भी कब्ज़ा कर लिया, उन राज्यों में जीत हासिल की जहां दशकों से उनकी पार्टी को राज्य स्तर पर कोई पद नहीं मिला था. सैंतीस साल पुराने राजनीतिक नेता जेम्स टैलारिको ने टेक्सास में रिपब्लिकन केन पैक्सटन को हराया, और 1988 के बाद राज्य में सीनेट सीट जीतने वाले पहले डेमोक्रेट बने. साउथ कैरोलिना में, एनी एंड्रयूज ने डार्लिन ग्राहम को हराया, यह सीट दो दशकों से ज़्यादा समय से दिवंगत लिंडसे ग्राहम के पास थी, जबकि पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने नॉर्थ कैरोलिना में खाली सीट जीती. शेरोड ब्राउन ने ओहियो में सीनेटर जॉन हस्टेड को हराया, और एडम हैमिल्टन ने कैंसस में सीनेटर रोजर मार्शल को हराया.
मंगलवार रात रिपब्लिकन की हार के पैमाने से कई जानकार हैरान थे. डेमोक्रेट जीना हिनोजोसा ने टेक्सास में तीन बार के गवर्नर ग्रेग एबॉट को हराया, और 1994 के बाद गवर्नरशिप जीतने वाली पहली डेमोक्रेट और राज्य की पहली लैटिना गवर्नर बनीं. एडम हैमिल्टन 1932 के बाद US सीनेट में कैंसस को रिप्रेजेंट करने वाले पहले डेमोक्रेट बन जाएंगे.
Donald Trump ने अपनी हार पर क्या कहा
US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर वह पोल में बैलेट पर होते तो पार्टी जीत जाती. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मैं बैलेट पर नहीं था और अगर होता, तो हम भारी मतों से जीत जाते! इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद. प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे. ट्रंप.”
हार से Donald Trump के लिए क्या बदला
दोनों चैंबर में कब्ज़ा होने से डेमोक्रेट्स को ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन को कंट्रोल में रखने की काफी पावर मिलती है. हाउस सरकारी खर्च को कंट्रोल करता है और एडमिनिस्ट्रेशन की जांच शुरू कर सकता है, जबकि सीनेट प्रेसिडेंट के नॉमिनी को कन्फर्म करती है, जिसमें कैबिनेट अधिकारी, जज और एम्बेसडर शामिल हैं. ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन हर बिल को पास कराना चाहता है, जिसमें सरकारी फंडिंग भी शामिल है, अब उसे डेमोक्रेटिक सपोर्ट की ज़रूरत होगी.
डेमोक्रेट्स ने पहले ही अपनी कुछ खास प्रायोरिटीज़ बता दी हैं, जिनमें ईरान के साथ युद्ध, प्रेसिडेंट ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ और ट्रंप परिवार के बिज़नेस डीलिंग्स से जुड़े कथित कॉन्फ्लिक्ट्स ऑफ़ इंटरेस्ट की जांच शामिल हैं.
भारत के लिए Donald Trump की हार के क्या मायने हैं
नई दिल्ली में नतीजों पर करीब से नज़र रखी जाएगी. ग्रेगरी मीक्स – जो हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन होने वाले हैं – समेत ज़रूरी कमेटियों को लीड करने की लाइन में लगे डेमोक्रेट्स ने लंबे समय से US-इंडिया पार्टनरशिप का सपोर्ट किया है और इंडिया के साथ रिश्तों को संभालने के एडमिनिस्ट्रेशन के तरीके की आलोचना की है. डेमोक्रेटिक हाउस से यह भी उम्मीद है कि वह ट्रंप के परिवार और साथियों से जुड़े बिज़नेस के साथ पाकिस्तान के लेन-देन की भी जांच करेगा.
मिडटर्म नतीजे 2028 के प्रेसिडेंशियल इलेक्शन की रेस को भी शेप देंगे. इस हार से ट्रंप के बाद रिपब्लिकन पार्टी के अंदर अपने भविष्य को लेकर बहस और तेज़ होने की उम्मीद है. डेमोक्रेट्स के लिए, एक मज़बूत प्रदर्शन से 2028 के संभावित कंटेंडर्स जैसे कमला हैरिस, गेविन न्यूज़ॉम और एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ का कॉन्फिडेंस बढ़ना चाहिए, क्योंकि वे पार्टी के नॉमिनेशन पर नज़र रखे हुए हैं.
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