दिल्ली के स्कूल में 12वीं की छात्रा की जलने से मौत, मिला तीन पन्नों का सुसाइड नोट…

Krishnanagar school Student Death नई दिल्ली :  राजधानी दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके में एक सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है. शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को करीब 17 वर्षीय छात्रा का शव स्कूल परिसर में गार्ड रूम के पीछे जली हुई अवस्था में मिला. घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. इस घटना के बाद स्कूल परिसर में छात्रा की मौत को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

घटना को लेकर शुरुआती जानकारी में छात्रा के सुसाइड नोट लिखने और खुद को आग लगाने की बात कही जा रही है. हालांकि, पुलिस ने अभी तक बरामद सामग्री का पूरा विवरण या मौत की परिस्थितियों को लेकर पूरी जानकारी साझा नहीं किया है.

इस घटना के बारे में कृष्णानगर के विधायक अनिल गोयल ने कहा कि  ‘यह घटना बेहद कष्टदायक और आश्चर्यजनक है. उसके बैग से कुछ लेटर मिले हैं, जिनकी पुलिस जांच कर रही है.’

स्कूल परिसर में मिला छात्रा का शव

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शनिवार को स्कूल परिसर में आग लगने की सूचना मिलने के बाद कृष्णा नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची. वहां गार्ड रूम के पीछे छात्रा का शव मिला, जिस पर जलने के निशान थे.

मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया. टीम ने मौके का निरीक्षण किया और जांच के लिए जरूरी साक्ष्य जुटाए. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटना से पहले स्कूल परिसर में क्या हुआ था.

तीन पन्नों के सुसाइड नोट को लेकर क्या जानकारी है?

घटना के संबंध में तीन पन्नों के सुसाइड नोट की चर्चा हो रही है. हालांकि, पुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

पुलिस और क्राइम टीम ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया. क्राइम टीम ने घटनास्थल से संबंधित साक्ष्य जुटाए हैं. जांच में घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध सामग्री का विश्लेषण किया जा रहा है.

स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने स्कूल परिसरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और संकट की परिस्थितियों में समय पर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी ध्यान खींचा है. ऐसी घटनाओं में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो और तथ्यों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जाए. साथ ही, विद्यार्थियों को मानसिक और भावनात्मक परेशानी की स्थिति में मदद मिल सके, इसके लिए स्कूलों और परिवारों के बीच संवाद तथा परामर्श की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है.

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