Garhwali Jewellery देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून के राजपुर रोड स्थित होटल में सर्राफ मंडल देहरादून की ओर से आयोजित भव्य आभूषण एग्जीबिशन का अवलोकन किया. मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न प्रकार के आभूषणों, पारंपरिक डिजाइनों और स्वर्णकारों की कला एवं हुनर को देखा. उन्होंने आयोजन के लिए सर्राफ मंडल और स्वर्णकार समाज को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं.
Garhwali Jewellery:आभूषण सिर्फ श्रृंगार नहीं,संस्कृति और परंपरा की पहचान: धामी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस तरह के आयोजन भारतीय कला, संस्कृति, परंपरा और स्थानीय हुनर को नई पहचान देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं. स्वर्णकार समाज केवल आभूषण तैयार करने का काम नहीं करता, बल्कि देश की गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने तथा उसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
उन्होंने कहा कि विवाह, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठानों सहित जीवन के अनेक शुभ अवसरों पर आभूषण हमारी परंपराओं, भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक रहे हैं.
‘वोकल फॉर लोकल’ से स्थानीय हुनर को मिल रहा नया बाजार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से देश के कारीगरों, स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी हुनर को नई पहचान और नए अवसर मिल रहे हैं.
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य के अनुरूप भारत को वैश्विक ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइनिंग का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
गढ़वाली नथ से कुमाऊंनी गुलोबंद तक, पारंपरिक आभूषणों को मिले वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में पारंपरिक आभूषणों का विशेष स्थान है. गढ़वाली नथ, पौंजी, चंपकली हार, कुमाऊंनी गुलोबंद, पिचौरा हार और झूमका जैसे पारंपरिक आभूषण राज्य की विशिष्ट संस्कृति और पहचान को दर्शाते हैं. उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक आभूषणों को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की जरूरत है. इसके लिए पारंपरिक डिजाइनों को आधुनिक जरूरतों और बदलते समय के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए.
युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक आभूषणों को आधुनिक डिजाइन और वैश्विक बाजार से जोड़ने से उत्तराखंड के स्थानीय कारीगरों और स्वर्णकारों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. इससे युवा पीढ़ी भी अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से अधिक मजबूती से जुड़ सकेगी.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक कौशल, हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ कौशल विकास और आर्थिक सहायता के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.0
स्वर्णकारों के कौशल विकास के लिए प्रभावी कदम उठाएगी सरकार
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पारंपरिक आभूषणों के संरक्षण के साथ स्वर्णकार समाज के कौशल विकास पर भी सरकार विशेष ध्यान देगी. इस दिशा में आवश्यक योजना तैयार कर स्वर्णकारों और कारीगरों को आगे बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का ‘सर्वश्रेष्ठ राज्य’ बनाने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ काम कर रही है. इस संकल्प को साकार करने में उन्होंने स्वर्णकार समाज से सक्रिय सहयोग और सहभागिता का आह्वान किया.
कार्यक्रम में सर्राफ मंडल देहरादून के पदाधिकारी एवं सदस्य, स्वर्णकार समाज के प्रतिनिधि, आभूषण व्यवसायी, कारीगर और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे.

