Friday, June 26, 2026
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खेत बचाओ अभियान’ को उत्तराखंड से मिली नई ताकत, सीएम धामी बोले- ‘धरती माता बीमार हो गई है,अब प्राकृतिक खेती ही भविष्य’

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Uttarakhand Khet Bachao Abhiyan (Save the Farms Campaign) देहरादून :  उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में चल रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ को देश के किसानों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा जन-आंदोलन बताया. उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल खेती बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने का राष्ट्रीय संकल्प है.

Uttarakhand Khet Bachao Abhiyan की जरुरत क्यों ?

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हमें यह सवाल खुद से पूछना चाहिए कि आखिर इस अभियान की जरूरत क्यों पड़ी. इसका सबसे बड़ा कारण वर्षों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग है, जिसने हमारी धरती की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाया है.

‘धरती माता अब बीमार और कमजोर हो गई है’

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान देश की आत्मा हैं और उन्हीं की मेहनत से हर घर की थाली तक अन्न पहुंचता है लेकिन अधिक उत्पादन की होड़ में खेतों में जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता लगातार खराब होती चली गई.

उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि धरती माता बीमार और कमजोर हो गई है. मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा तेजी से घट रही है, जिसका असर खेती की उत्पादकता और फसलों की गुणवत्ता दोनों पर पड़ रहा है.

मिट्टी की जांच कराने की अपील

सीएम धामी ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि हर किसान को अपने खेत की मिट्टी की नियमित जांच करानी चाहिए. इससे यह पता चलेगा कि जमीन को वास्तव में किन पोषक तत्वों की आवश्यकता है और उसी के अनुसार उर्वरकों का उपयोग किया जा सकेगा.

उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ेगी और अनावश्यक खर्च से भी बचा जा सकेगा.

प्राकृतिक खेती अपनाने का दिया संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि किसान अपनी पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटें और प्राकृतिक खेती को अपनाएं. इससे न केवल मिट्टी की सेहत सुधरेगी बल्कि खेती की लागत भी काफी कम होगी.

उन्होंने कहा कि यदि किसान प्राकृतिक खेती अपनाते हैं तो उन्हें बाजार से महंगे रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. इससे उनकी आय बढ़ेगी और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी.

आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करने का संकल्प

धामी ने कहा कि खेत बचाओ अभियान केवल वर्तमान की जरूरत नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का भी अभियान है. यदि आज मिट्टी को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.

उन्होंने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और समाज के सभी वर्गों से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने की अपील की.

केंद्र सरकार चला रही है कई योजनाएं

केंद्र सरकार किसानों को टिकाऊ खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चला रही है. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card Scheme) के माध्यम से किसानों को उनकी मिट्टी की गुणवत्ता की जानकारी दी जा रही है, जबकि प्राकृतिक खेतीजैविक खेतीनैनो यूरिया, जल संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे कार्यक्रमों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैविक विकल्पों को बढ़ावा और मिट्टी की नियमित जांच से कृषि उत्पादन को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सकता है.

सीएम धामी ने कहा कि यदि किसान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ खेती करेंगे तो इससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, उत्पादन लागत घटेगी और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी. उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहा ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों के लिए एक नई दिशा साबित होगा और देश को टिकाऊ कृषि मॉडल की ओर आगे बढ़ाएगा.