नेपाल में भारी बारिश से गंडक नदी उफान पर, बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा

Bihar Flood Alert:नेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज से सोमवार सुबह 5.43 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का रिकॉर्ड डिस्चार्ज दर्ज किया गया. गंडक नदी के उफान पर आने से पश्चिमी चंपारण समेत कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने की आशंका है. बिहार सरकार ने संबंधित अधिकारियों को अलर्ट रहने और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश होने से गंडक नदी में पानी का प्रवाह तेजी से बढ़ा है. इसका सीधा असर बिहार के सीमावर्ती जिलों में दिखाई दे रहा है. वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज पर सोमवार, 28 सितंबर की सुबह पानी का डिस्चार्ज इस साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया.

जल संसाधन विभाग के अनुसार, सुबह करीब 5 बजे बैराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी का अधिकतम डिस्चार्ज दर्ज किया गया. इसके बाद सुबह 7 बजे पानी का डिस्चार्ज घटकर 4,97,200 क्यूसेक रह गया. शुरुआती गिरावट से कुछ राहत के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन बैराज से छोड़े गए पानी को निचले इलाकों तक पहुंचने में समय लगेगा. ऐसे में नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा अभी बना हुआ है.

गंडक नदी में पानी का दबाव बढ़ने के कारण पश्चिमी चंपारण के निचले इलाकों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं. इससे पहले रविवार को भी नदी का जलस्तर बढ़ने से वाल्मीकिनगर के भेरिहारी गांव के निचले हिस्सों में बाढ़ का पानी पहुंच गया था. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है.

पश्चिमी चंपारण से सुपौल तक बाढ़ का असर

गंडक और अन्य नदियों में बढ़ते जलस्तर के बीच उत्तर बिहार के कई जिलों में बाढ़ का असर सामने आया है. बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी चंपारण और सुपौल जिलों के 11 प्रखंडों की 23 ग्राम पंचायतों में करीब 82 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.

बिहार सरकार अलर्ट, मुख्यमंत्री ने लिया हालात का जायजा

गंडक नदी में रिकॉर्ड डिस्चार्ज के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया है. जल संसाधन विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने रातभर हालात की निगरानी की और अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए कहा.

प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. इससे पहले 26 सितंबर को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भी नेपाल में भारी बारिश के मद्देनजर संबंधित जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी. इसमें नदी के जलस्तर, तटबंधों, निचले इलाकों, पुलों और सड़कों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया था.

गंडक नदी में पानी बढ़ने के साथ तटबंधों की सुरक्षा भी अहम हो गई है. जल संसाधन विभाग ने संवेदनशील तटबंधों, स्लुइस गेट और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों को रात में गश्त करने और किसी भी तरह की क्षति के संकेत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है.

तटबंधों पर सीपेज यानी पानी का रिसाव, कटाव, ऊपर से पानी बहने या तटबंध टूटने जैसी स्थिति बाढ़ के खतरे को बढ़ा सकती है. इसलिए ऐसे स्थानों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है. विभाग ने अधिकारियों को पर्याप्त कर्मियों, रोशनी और संचार सुविधाओं के साथ सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं.

नेपाल में भारी बारिश का असर केवल गंडक नदी तक सीमित नहीं है. बिहार में कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है.

बिहार के आधिकारिक बाढ़ पूर्वानुमान पोर्टल पर 28 सितंबर 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक नदी का जलस्तर 63.58 मीटर दर्ज किया गया, जो वहां के 62.22 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर था. पश्चिमी चंपारण के बगहा में जलस्तर 91.02 मीटर दर्ज किया गया, जो 89.30 मीटर के खतरे के निशान से भी अधिक था.

नेपाल में बारिश से क्यों बढ़ जाता है बिहार में बाढ़ का खतरा?

गंडक नदी का जलग्रहण क्षेत्र नेपाल के पहाड़ी और तराई इलाकों तक फैला हुआ है. इन क्षेत्रों में जब लगातार भारी बारिश होती है, तो नदी और उसकी सहायक धाराओं में पानी तेजी से बढ़ता है. यह पानी आगे चलकर बिहार में प्रवेश करता है.

नेपाल से आने वाले पानी का दबाव बढ़ने पर वाल्मीकिनगर बैराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़ाना पड़ सकता है. इसके बाद नदी के निचले हिस्सों में जलस्तर बढ़ने का खतरा रहता है. यदि पहले से जमीन पर पानी जमा हो, नदियां उफान पर हों या तटबंध कमजोर हों, तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

इसी वजह से नेपाल में होने वाली बारिश का असर बिहार के सीमावर्ती जिलों में तेजी से दिखाई देता है. गंडक के साथ कोसी और अन्य नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश होने पर उत्तर बिहार के बड़े हिस्से में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है.

फिलहाल क्या है स्थिति?

सोमवार सुबह वाल्मीकिनगर बैराज पर अधिकतम डिस्चार्ज दर्ज होने के बाद पानी के बहाव में गिरावट आई है. यह एक राहत का संकेत है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है.

प्रशासन के सामने फिलहाल प्रभावित लोगों की सुरक्षा, तटबंधों की निगरानी और निचले इलाकों में राहत व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है.

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