94 विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे CM भगवंत मान, राष्ट्रपति से करेंगे ‘राइट टू रिकॉल’ की मांग

Bhagwant Mann President Meeting : पंजाब की सियासत में आज एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है. मुख्यमंत्री भगवंत मान अपनी पार्टी के सभी 94 विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे हैं. खास बात यह है कि मुख्यमंत्री और सभी विधायक किसी वीआईपी काफिले के बजाय 3 लग्जरी वॉल्वो बसों में सवार होकर दिल्ली पहुंचे  हैं. यह शक्ति प्रदर्शन सीधे तौर पर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों को एक कड़ा संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है.

Bhagwant Mann :दोपहर 12.30 बजे करेंगे राष्ट्रपति से मुलाकात 

मुख्यमंत्री भगवंत मान को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने का समय दोपहर 12:30 बजे मिला है. तय कार्यक्रम के अनुसार, सीएम मान राष्ट्रपति से अकेले मुलाकात करेंगे. इस दौरान उनके साथ आए सभी 94 विधायक राष्ट्रपति भवन के बाहर मौजूद रहकर अपना समर्थन दर्ज कराएंगे.

मुलाकात का मुख्य एजेंडा: दलबदल पर ‘हल्ला बोल’

इस मुलाकात का सबसे बड़ा कारण आम आदमी पार्टी के 6 राज्यसभा सांसदों का पाला बदलना है. हाल ही में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल,राघव चढ्ढा, हरभजन सिंह ,संदीप पाठक,अशोक मित्तल,राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी ने  AAP छोड़कर बीजेपी (BJP) का दामन थाम लिया था. भगवंत मान राष्ट्रपति के सामने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएंगे. उनका तर्क है कि जनता जिस पार्टी के नाम पर वोट देती है, प्रतिनिधि का उसे छोड़कर दूसरी पार्टी में जाना जनादेश का अपमान है.

‘राइट टू रिकॉल’ की मांग: क्या है सीएम मान का प्लान?

मुख्यमंत्री भगवंत मान राष्ट्रपति से ‘राइट टू रिकॉल’ (Right to Recall) कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग करेंगे.

  • क्या है राइट टू रिकॉल? इस कानून के तहत यदि जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधि (विधायक या सांसद) के काम या उसके दलबदल के फैसले से खुश नहीं है, तो उसे कार्यकाल खत्म होने से पहले वापस बुलाने या हटाने का अधिकार मिलता है.

  • उद्देश्य: मान का मानना है कि इस कानून के आने से ‘खरीद-फरोख्त’ की राजनीति पर लगाम लगेगी और चुने हुए प्रतिनिधि अपनी पार्टी के प्रति जवाबदेह रहेंगे।

पंजाब की राजनीति में उबाल

आम आदमी पार्टी का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को लेकर खींचतान मची है. 94 विधायकों को एक साथ दिल्ली ले जाना यह भी दर्शाता है कि भगवंत मान अपनी कैबिनेट और विधायकों के बीच पूरी तरह से पकड़ बनाए हुए हैं और पार्टी में किसी भी तरह की टूट की खबरों को सिरे से खारिज कर रहे हैं.

अब देखना दिलचस्प होगा कि कि राष्ट्रपति के साथ इस मुलाकात के बाद केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इस दिशा में क्या रुख अपनाते हैं.

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