Akhilesh Yadav Jauhar University लखनऊ : समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के प्रशासनिक आदेश पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इस कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा शिक्षा को भी सांप्रदायिक नजरिये से देखती है.
भाजपा को शिक्षा में भी साम्प्रदायिकता नज़र आती है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा के बाद मिलनेवाली नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं।
भाजपा अपने अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के अवैधानिक भवनों को कब ढहाएगी? जब संगी-साथी ही अपंजीकृत है, तो उनके भवन, कार्यालय, संस्थान कैसे… pic.twitter.com/f4A7YHQcbO
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 16, 2026
Akhilesh Yadav Jauhar University: ‘भाजपा को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता नजर आती है’
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि भाजपा के एजेंडे में शिक्षा, शिक्षक, छात्र और शिक्षा के बाद मिलने वाली नौकरी जैसे मुद्दे नहीं हैं. उन्होंने लिखा कि भाजपा शिक्षा के क्षेत्र में भी सांप्रदायिक सोच के साथ काम कर रही है.
सपा प्रमुख ने कहा कि शिक्षा संस्थानों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और सरकार को शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए.
BJP से पूछा बड़ा सवाल
अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि वह अपने “अपंजीकृत संगी-साथियों” के कथित अवैध भवनों पर कार्रवाई कब करेगी. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि जब संगी-साथी ही अपंजीकृत हैं तो उनके भवनों, कार्यालयों और संस्थानों को वैध कैसे माना जा सकता है. उन्होंने पूरे घटनाक्रम को “निंदनीय” बताया.
38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश
यह बयान उस समय आया है जब रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है. प्राधिकरण का कहना है कि इन भवनों का निर्माण स्वीकृत भवन मानचित्र के बिना किया गया था और यह नियमानुसार नहीं है.
मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान ने की थी. आजम खान वर्तमान में विभिन्न मामलों में जेल में बंद हैं.
राजनीतिक बयानबाजी तेज
जौहर विश्वविद्यालय पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. एक ओर प्रशासन इसे नियमों के पालन से जुड़ी कार्रवाई बता रहा है, वहीं समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक और शिक्षा विरोधी कदम बता रही है.

