पंजाब की सियासत में ‘सुनामी’: क्या गिरने वाली है भगवंत मान की सरकार?

Bhagwant Mann government : पंजाब की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है. आम आदमी पार्टी के भीतर मचे घमासान ने अब सरकार के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. हरियाणा ‘आप’ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद के एक ताजा दावे ने चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है. जयहिंद का कहना है कि पंजाब के करीब 28 विधायक जल्द ही पार्टी को अलविदा कह सकते हैं. अगर यह दावा सच साबित होता है, तो मुख्यमंत्री भगवंत मान की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है.

Bhagwant Mann government :7 सांसदों के बाद अब विधायकों की बारी…

राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने की खबरों के बाद नवीन जयहिंद ने आग में घी डालने का काम किया है. उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है. उनके मुताबिक, जो सांसद पार्टी छोड़कर गए हैं, उनके साथ अंदरूनी तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट तक की गई है. जयहिंद ने साफ तौर पर कहा कि दबाव और खींचतान की वजह से अब 28 विधायक भी बगावत की राह पर हैं, जिससे पंजाब की मौजूदा सरकार संकट के मुहाने पर खड़ी हो गई है.

मनीष सिसोदिया की एक्टिवनेस और मंत्रियों की दिल्ली दौड़

पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए ‘आप’ के संकटमोचक मनीष सिसोदिया पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गए हैं. गुजरात दौरे से लौटते ही सिसोदिया सीधे अरविंद केजरीवाल से मिलने पहुंचे. इस मुलाकात के बाद शनिवार सुबह पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलवीर सिंह ने दिल्ली जाकर सिसोदिया से सीक्रेट मीटिंग की. डॉ. बलवीर ने पंजाब में बीजेपी पर ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने का सीधा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि जो सांसद पार्टी छोड़कर गए हैं, उन्होंने पंजाब की जनता के विश्वास के साथ बड़ा धोखा किया है.

दलबदल कानून के तहत एक्शन की तैयारी, सदस्यता रद्द करने की मांग

इस सियासी जंग में अब आम आदमी पार्टी कानूनी लड़ाई लड़ने के मूड में है. पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने एलान किया है कि पार्टी जल्द ही राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल की सदस्यता खत्म करने की मांग करेगी. संजय सिंह इस मामले में उपराष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेंगे. चीमा ने दावा किया कि केवल 3 सांसद ही भाजपा में शामिल हुए हैं, जबकि स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता के मामले में फर्जी हस्ताक्षर का सहारा लिया गया है.

आंतरिक कलह या बाहरी साजिश, क्या बचेगा मान का किला?

पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. एक तरफ जहां विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, वहीं पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि विधायकों और मंत्रियों के बीच तालमेल की भारी कमी है. नवीन जयहिंद का 28 विधायकों वाला आंकड़ा अगर हकीकत में बदलता है, तो पंजाब में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे. अब देखना यह होगा कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया इस ‘सियासी पतझड़’ को रोकने में कितने कामयाब हो पाते हैं.

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