Chamoli Tunnel Accident चमोली : उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में THDC की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है. हादसे के करीब 36 घंटे से अधिक समय बाद भी बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर लगातार जमा हो रहा पानी और मलबा है. ताजा अपडेट के मुताबिक हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 मजदूर अब भी लापता हैं. रेस्क्यू टीम लगातार उनकी तलाश में जुटी है.
A horrifying disaster inside the Chamoli, Uttarakhand tunnel.
A sudden leak triggered a torrent of water and mountain debris, turning the tunnel into a deadly quagmire. Six workers have died, two are still missing, and around 14 others remain injured and under treatment.
With… pic.twitter.com/TXkoKo8W1g
— Kailash Vashi (@KailashVashi) August 14, 2026
यह हादसा चमोली के मायापुर-पीपलकोटी क्षेत्र में विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (VPHEP) की निर्माणाधीन टनल में हुआ. THDC की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह 444 मेगावाट क्षमता की परियोजना है.
Chamoli Tunnel Accident:टनल में पानी बना सबसे बड़ी चुनौती
हादसे के बाद टनल के भीतर पानी और मलबा भर गया. बचाव दल लगातार पंपों की मदद से पानी बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पानी का रिसाव पूरी तरह थम नहीं रहा है. यही वजह है कि रेस्क्यू टीमों को टनल के अंदर आगे बढ़ने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
बाहर लगातार बारिश का दौर भी राहत एवं बचाव अभियान के लिए चुनौती बढ़ा रहा है. टनल के अंदर पानी कम करने के साथ-साथ मलबे को हटाकर लापता मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है.
हादसे के बाद अब तक क्या हुआ?
हादसे के समय टनल के अंदर कुल 22 मजदूरों के मौजूद होने की जानकारी सामने आई थी. पानी और मलबा अचानक टनल में घुसने के बाद मजदूर फंस गए थे. रेस्क्यू टीमों ने कई मजदूरों को बाहर निकाला, लेकिन कुछ मजदूरों की जान नहीं बचाई जा सकी.
ताजा अपडेट में एक और शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या 8 हो गई है और 2 मजदूरों की तलाश जारी है.
NDRF, SDRF और अन्य एजेंसियां जुटीं
रेस्क्यू अभियान में NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय प्रशासन की टीमें जुटी हुई हैं. बचावकर्मी टनल के भीतर पानी निकालने और मलबा हटाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. अस्थिर परिस्थितियों के कारण टीमों को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है.
रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घटनास्थल का जायजा लिया और अधिकारियों को बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए. उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायल श्रमिकों का हाल भी जाना.
2 मजदूरों की तलाश में ‘ऑपरेशन जिंदगी’
रेस्क्यू टीमों की पूरी कोशिश अब टनल के उस हिस्से तक पहुंचने की है जहां लापता मजदूरों के होने की आशंका है. पानी और मलबे की वजह से रास्ता बेहद मुश्किल है. बचावकर्मी पहले पानी का स्तर कम करने और रास्ता सुरक्षित बनाने में जुटे हैं, ताकि आगे की खुदाई और खोज अभियान को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि दो लापता मजदूर टनल के किस हिस्से में हैं और उनकी स्थिति क्या है. जब तक बचाव दल उस स्थान तक नहीं पहुंचता, तब तक उनकी स्थिति के बारे में निश्चित जानकारी सामने नहीं आ सकती.
2025 में भी हुई थी टनल में मॉक ड्रिल
इस हादसे के बीच THDC की अपनी पुरानी सुरक्षा तैयारियों की जानकारी भी चर्चा में है. कंपनी ने जुलाई 2025 में इसी विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में बाढ़ जैसी स्थिति को लेकर बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल आयोजित की थी. इसमें NDRF, SDRF, CISF, पुलिस और परियोजना की सुरक्षा टीमों ने हिस्सा लिया था.
इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य टनल में अचानक पानी भरने जैसी आपात स्थिति में बचाव और निकासी की तैयारियों को परखना था. मौजूदा हादसे के बाद टनल सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है.
चमोली टनल हादसा: अब तक की स्थिति
- कुल प्रभावित मजदूर: 22
- मौत: 8
- लापता: 2
- रेस्क्यू अभियान: लगातार जारी
- मुख्य चुनौती: टनल में पानी और मलबा
- रेस्क्यू एजेंसियां: NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय प्रशासन
- स्थान: मायापुर-पीपलकोटी, चमोली, उत्तराखंड
रेस्क्यू टीमों के सामने इस समय समय के साथ दौड़ है। पानी और मलबे के बीच दो लापता मजदूरों को तलाशने के लिए अभियान लगातार जारी है.

