झारखंड की तैमारा घाटी क्यों है इतनी खास? घड़ी और तारीख से जुड़ा है अनोखा दावा

रांची| रांची और जमशेदपुर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-33 अपनी प्राकृतिक सुंदरता और घुमावदार मोड़ों के लिए प्रसिद्ध है। इसी हाईवे पर राजधानी रांची से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित तैमारा घाटी प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत मनोरम है। चारों ओर ऊंचे पर्वतों और सघन हरियाली से आच्छादित यह घाटी अपने सौंदर्य के साथ-साथ कई अनोखी घटनाओं और रहस्यमयी दावों के लिए लगातार चर्चा में रहती है।

स्मार्टफोन की घड़ी और तारीख में अचानक बदलाव का दावा

तैमारा घाटी के लगभग एक किलोमीटर के क्षेत्र में प्रवेश करते ही मोबाइल नेटवर्क गायब होने तथा इलेक्ट्रॉनिक घड़ियों व कैलेंडर में स्वतः परिवर्तन होने की बातें कही जाती हैं। स्थानीय यात्रियों का दावा है कि यहां समय आगे या पीछे चला जाता है और फोन में साल तक बदल जाता है। क्षेत्र के एक स्थानीय विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार, समय और तिथि में होने वाली इस गड़बड़ी के कारण डिजिटल बायोमेट्रिक प्रणाली काम नहीं करती, जिससे उपस्थिति मैन्युअल रजिस्टर में दर्ज करनी पड़ती है। घाटी पार करते ही मोबाइल समय पुनः सामान्य हो जाता है।

सड़क दुर्घटनाएं और स्थानीय जनश्रुतियां

तैमारा घाटी में होने वाले सड़क हादसों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोगों द्वारा राह में अचानक कोई आकृति दिखने और वाहनों के अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त होने के दावे किए जाते हैं। क्षेत्र में शांति बनाए रखने और हादसों पर अंकुश की कामना को लेकर मार्ग के किनारे एक मंदिर का निर्माण भी कराया गया है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनसामान्य के विचार

इस विषय पर अलग-अलग मत देखने को मिलते हैं:

  • भौगोलिक व चुंबकीय प्रभाव: कुछ विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र से कर्क रेखा गुजरने के कारण उत्पन्न भौगोलिक या चुंबकीय प्रभाव इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है।

  • केवल अफवाह का तर्क: दूसरी ओर, कई स्थानीय निवासियों व नियमित यात्रियों का मानना है कि समय बदलने और रहस्यों से जुड़ी बातें केवल सुनी-सुनाई बातें व अफवाहें मात्र हैं।

वर्तमान में फोरलेन बनने के बाद यह मार्ग अत्यंत सुगम हो चुका है और मानसून के समय बड़ी संख्या में पर्यटक यहां के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने पहुंचते हैं।

Latest news

Related news