बिहार की राजनीति में नई हलचल, आनंद मोहन के समर्थन से एनडीए के सीट बंटवारे पर सवाल

सारण। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (03-सारण) का चुनाव नजदीक आते ही क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां बेहद तेज हो गई हैं। पूर्व सांसद आनंद मोहन द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज को खुला समर्थन देने का ऐलान करने के बाद चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। उनके इस अहम फैसले से जहां एक ओर चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है, वहीं दूसरी ओर एनडीए के आंतरिक राजनीतिक समीकरणों और सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर जोरदार बहस छिड़ गई है। इसी बीच शिक्षक मतदाताओं के बीच भी राहुल राज के पक्ष में लामबंदी तेज होने की खबरें सामने आ रही हैं।

राजपूत समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर उठाए तीखे सवाल

पूर्व सांसद आनंद मोहन ने सारण प्रमंडल में राजपूत समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा प्रमुखता से उठाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में राजपूत समाज से आने वाले नौ विधायक, एक विधान पार्षद (एमएलसी) और तीन सांसद मौजूद हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल खड़ा किया कि समाज की इतनी बड़ी और प्रभावी राजनीतिक भागीदारी होने के बावजूद उसके हक और प्रतिनिधित्व को नजरअंदाज करके कोई भी फैसला कैसे लिया जा सकता है। चुनावी माहौल के बीच इस मुद्दे के जोर पकड़ने से राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी बढ़ गई है।

एनडीए के सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीति पर हमला

सीटों के तालमेल को लेकर आनंद मोहन ने एनडीए की रणनीति पर भी खुले तौर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गणित समझाते हुए कहा कि यदि कुल आठ सीटों पर चुनाव होना था और उनमें से एक-एक सीट जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा तथा चिराग पासवान की पार्टियों को दी जाती, तो भी पांच सीटें शेष बचती थीं। उन बची हुई सीटों पर भाजपा और जदयू आपस में मिलकर आसानी से फैसला कर सकते थे। उन्होंने सवाल दागा कि ऐसी परिस्थितियों में गठबंधन की एकजुटता का क्या औचित्य रह जाता है और फैसले लेने की प्रक्रिया में सभी घटकों को उचित तवज्जो दी जानी चाहिए।

उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और खींचतान जारी

सारण के इस चुनावी समर में जहां आनंद मोहन ने निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज के पक्ष में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं जदयू के आधिकारिक प्रत्याशी आनंद पुष्कर के समर्थन को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं बाजार में गर्म हैं। जानकारी के अनुसार, रणधीर कुमार सिंह अपनी दलीय निष्ठा को निभाते हुए जदयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर का समर्थन कर सकते हैं, हालांकि अंदरूनी तौर पर उनकी व्यक्तिगत पसंद को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही आनंद पुष्कर के लगभग छह महीने पूर्व सीपीआई छोड़कर जदयू में शामिल होने के घटनाक्रम को भी इस चुनाव में अहम बिंदु मानकर देखा जा रहा है।

Latest news

Related news