गयाधाम में दिख रही सनातन संस्कृति की झलक, दीवारों पर सजी रामायण की गाथा

गया। विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले से पहले मोक्षनगरी गयाजी का धार्मिक और सांस्कृतिक श्रृंगार पूरे भक्तिभाव के साथ किया जा रहा है। आगामी 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस महामेले में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरे शहर को एक नया स्वरूप दिया जा रहा है।

विभिन्न घाटों और वेदियों पर उकेरे जा रहे भित्तिचित्र

प्रशासन की पहल पर विष्णुपद मंदिर, सीताकुंड, देवघाट, गदाधर घाट और अक्षयवट वेदी के आसपास की दीवारों पर मनमोहक भित्तिचित्र तैयार किए जा रहे हैं।

  • पौराणिक प्रसंग: मधुबनी और मंजूषा कला शैली में रामायण, श्रीहरि विष्णु, राधा-कृष्ण के मिलन, भगवान राम और माता सीता के पिंडदान तथा उनके विवाह प्रसंग से जुड़े चित्र उकेरे जा रहे हैं।

  • सांस्कृतिक झलक: गयाजी आने वाले पर्यटकों को बिहार की लोकसंस्कृति से परिचित कराने के लिए छठ महापर्व के दृश्यों को भी दीवारों पर प्रदर्शित किया जा रहा है।

'पेंट द सिटी' अभियान और बच्चों की भागीदारी

जिलाधिकारी शशांक शुभंकर के मार्गदर्शन में जुलाई माह से ही शुरू हुई तैयारियों के तहत 'पेंट द सिटी' अभियान चलाया गया है। इसके लिए 27 छात्र समूहों का चयन किया गया है, जो शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और घाटों की दीवारों को अपनी कला से सजा रहे हैं। इतना ही नहीं, इस बार मेले का आधिकारिक लोगो भी गया के बच्चों द्वारा ही तैयार किया गया है।

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

धार्मिक और पौराणिक चित्रों के साथ-साथ दीवारों पर 'स्वच्छ गया-स्वस्थ गया', 'जल संरक्षण' और 'प्लास्टिक मुक्त गया' जैसे सामाजिक संदेश भी लिखे जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को आस्था के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। इन कलाकृतियों के माध्यम से इस बार गयाधाम आने वाले श्रद्धालुओं को हर घाट और हर दीवार पर आस्था, इतिहास और संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

Latest news

Related news