JDU Name Change पटना: बिहार की सियासत में जनता दल यूनाइटेड यानी JDU के नाम को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की ओर से पार्टी का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ करने की बात सामने आने के बाद अब जेडीयू के दो वरिष्ठ नेताओं ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है.
शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने संजय झा के बयान पर अपनी सहमति जताई. दोनों नेताओं के रुख के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि क्या आने वाले दिनों में जेडीयू के नाम में नीतीश कुमार का नाम जोड़ने का औपचारिक फैसला लिया जाएगा.
हालांकि, फिलहाल पार्टी की ओर से नाम बदलने का अंतिम फैसला घोषित नहीं किया गया है. नेताओं के बयान से इतना जरूर साफ है कि पार्टी के भीतर इस प्रस्ताव को लेकर समर्थन का माहौल बनता दिखाई दे रहा है.
JDU Name Change:श्रवण कुमार बोले- ‘सर्वसम्मति से पास होने योग्य प्रस्ताव’
जेडीयू के वरिष्ठ नेता और नीतीश कुमार के पुराने सहयोगी श्रवण कुमार ने संजय झा के बयान का खुलकर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने जो बात कही है, वह बिल्कुल सही है और वह उनके बयान का समर्थन करते हैं.
श्रवण कुमार के मुताबिक, जेडीयू की राजनीति नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके काम से जुड़ी हुई है. उन्होंने नीतीश कुमार को पार्टी का सर्वमान्य नेता बताते हुए कहा कि उनके नाम और काम को महत्व देते हुए पार्टी का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया है तो यह सर्वसम्मति से पास होने योग्य है.
उन्होंने यहां तक कहा कि यदि नाम बदलना है तो इसमें ज्यादा देर नहीं होनी चाहिए और इसे जितनी जल्दी संभव हो, कर देना चाहिए.
‘नीतीश कुमार हमारे विश्वकर्मा, विकास पुरुष हैं’
श्रवण कुमार ने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए उन्हें ‘विश्वकर्मा’ और बिहार का ‘विकास पुरुष’ बताया. उनके इस बयान को जेडीयू में नीतीश कुमार के राजनीतिक कद को लेकर पार्टी के भीतर की सोच के तौर पर देखा जा रहा है.
दरअसल, जेडीयू की राजनीति लंबे समय से नीतीश कुमार के नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है. ऐसे में पार्टी के नाम में उनके नाम को शामिल करने का प्रस्ताव संगठन और बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है.
बिजेंद्र यादव ने भी किया समर्थन
जेडीयू के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी संजय झा की मांग का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि यह पार्टी के अंदर का मामला है और यदि ऐसा फैसला होता है तो वह इसका समर्थन करेंगे.
बिजेंद्र यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि नाम बदलने का फैसला पार्टी के भीतर निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा. यानी नेताओं की ओर से समर्थन जरूर सामने आया है, लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी के स्तर पर होना बाकी है.
उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर इस विषय पर निर्णय लिया जाएगा और इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.
बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुर’ करने पर भी चर्चा
इस राजनीतिक बहस के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जन्मस्थान बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ करने को लेकर भी चर्चा सामने आई है.
बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस पर कहा कि किसी के कह देने मात्र से किसी शहर या स्थान का नाम नहीं बदल जाता. इसके लिए सरकार को निर्णय लेना होगा.
वहीं श्रवण कुमार ने इस मामले में अपेक्षाकृत सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि अगर सभी लोगों की राय है तो सरकार को इस पर विचार करना चाहिए.
इस तरह जेडीयू के दो नेताओं के बयानों ने बिहार की राजनीति में नाम बदलने की बहस को दो स्तरों पर ला दिया है—एक तरफ पार्टी का नाम ‘जनता दल नीतीश’ करने का प्रस्ताव और दूसरी तरफ बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ करने की चर्चा.
JDU में नीतीश के नाम को लेकर क्या है सियासी संदेश?
जेडीयू के नाम में नीतीश कुमार को शामिल करने की मांग को केवल संगठनात्मक बदलाव के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी. इसके पीछे स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी हो सकता है.
नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति के सबसे प्रमुख चेहरों में रहे हैं. जेडीयू की पहचान भी उनके नेतृत्व के साथ गहराई से जुड़ी रही है. ऐसे में पार्टी के नाम में ‘नीतीश’ जोड़ने का अर्थ संगठन की पहचान को सीधे उसके सबसे बड़े नेता के नाम से जोड़ना है.
यह कदम पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच नीतीश कुमार की भूमिका को और स्पष्ट करने का प्रयास भी माना जा सकता है.
संजय झा के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की ओर से ‘जनता दल नीतीश’ नाम का सुझाव सामने आने के बाद पार्टी के भीतर से जिस तरह समर्थन के स्वर आए हैं, उससे इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है.
श्रवण कुमार ने जहां इसे सर्वसम्मति से पारित किए जाने योग्य प्रस्ताव बताया, वहीं बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी कहा कि अगर ऐसा निर्णय होता है तो वह उसका समर्थन करेंगे.
अब नजर इस बात पर होगी कि जेडीयू के संगठनात्मक स्तर पर इस प्रस्ताव को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है और क्या पार्टी की बैठक में इस पर औपचारिक निर्णय लिया जाता है.

