BIHAR AIMIM : बिहार में चुनाव की तारीखों का ऐलान अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने जा रहा है . सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी गोटी फिट करने में लगे हैं लेकिन कुछ पार्टियां अभी भी ऐसी है जिनका इकबाल तो है लेकिन उसे कोई अपने गठबंधन में शामिल करने के लिए तैयार नहीं है. इनमें सबसे पहला नाम है AIMIM का… इस पार्टी ने पहले कांग्रेस-राजद की अगुवाई वाली महागठबंधन में शामिल होने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी तो अब बिहार में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तारुल इमान अपने समर्थकों के साथ लालू यादव के घर पहुंच गये और अपने गठबंधन को महागठबंधन में शामिल करने की गुहार लगाई. AIMIM के समर्थक लाल यादव के घऱ पर ये नारे लगाते नजर आये.
‘लालू-तेजस्वी अपने कानों को खोल, तेरे दरवाजे पर बज रहा है ढोल, गठबंधन के लिए अपना दरवाजा खोल,
लेकिन समसर्थकों की आवाज पर ना तो लालू यादव के घर का दरवाजा खुला और ना ही गठबंधन का. सवाल उठता है कि इस तरह से लगातार इगनोर होने केबावजूद ओवैसी गठबंधन में शामिल होने के लिए क्यों बेताब है?
BIHAR AIMIM राज्य में 6 सीटों पर लड़ना चहती है चुनाव
एआईएमआईएम य़ानी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए बेताब है. इस लिए बिहार प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष (एआईएमआईएम) अख्तरुल ईमान ने महागठबंधन को एक पत्र लिखा जिसमें अपनी पार्टी को शामिल करने की मांग की. AIMIM न अपनी चिट्ठी लालू प्रसाद यादव को भेजी. यहां भी जब बात नही बनी तो प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान अपने समर्थकों के साथ लालू यादव के घर पहुंच गये. अख्तरुल इमान ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि वो गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़े और उन्हें लड़ने के लिए 6 सीटें मिले.
ओवैसी बिहार में गठबंधन के लिए बेताब ?
महागठबंघन में शामिल होने के सवाल पर AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान का कहना है कि सांप्रदायिक तकतों को हराने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर लड़ना चाहिये. AIMIM का कहना है कि कोई भी अकेली पार्टी सांप्रदायिक ताकतों को नहीं हरा सकती. महागठबंधन ने अगर मिलकर चुनाव नहीं लड़ा तो वोटों का बंटवारा होगा और सांप्रदायिक ताकतों को फायदा. हमने कई बार गठबंधन के लिए राजद के पास प्रस्ताव भेजा, लेकिन अनसुना कर दिया गया. हम केवल 6 सीट मांग रहे हैं , कोई मंत्रालय नहीं.. आरजेडी द्वारा उनके चार विधायकों को तोड़कर अपने पाले में करने की बात का जिक्र करते हुए अख्तरुल ईमान ने कहा कि बिहार राज्य से सांप्रदायिक शक्तियों को हारने के लिए हम इतने गंभीर हैं कि हमारे सीने पर खंजर घोंपा गया फिर भी हम उनसे हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं, वह नुकसान हमें हुआ है, लेकिन हम बिहार की जनता को नुकसान नहीं होने देना चाहते हैं. इमान का कहना है कि बिहार अगर उनकी पार्टी को महागठबंधन में शामिल नहीं किया गया तो मुसलमानों के वोट बंट जायेगा और सभी का नुकसान हो जयेगा.
ओवैसी को साथ लेने के लिए कोई दल तैयार नहीं
हलांकि खुद को मुसलमानों का रहनुमा और मुस्लिम वोटबैंक के बंटने की बात कहकर ओवैसी खुद को महागठबंधनमें शामिल करने और मुस्लिम बहुल 6 सीटें देने की मांग कर रहे हैं. इसके बाद भी ना को कांग्रेस और ना ही राजद, कोई भी इन्हें अपने साथ लेने के लिए तैयार नहीं है . बिहार के कांग्रेस प्रभारी कृष्ण अल्लावरू ने एआईएमआईएम से गठबंधन का मामला लालू यादव की तरफ बढ़ा दिया है. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने गठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव लालू प्रसाद यादव के सामने रखा है तो उसका जवाब वही देंगे.
ओवैसी गठबंधन के लिए क्यों बेचैन?
दरअसल ओवैसी अपने आप को मुसलमानों के रहनुमा मानते हैं लेकिन जब बिहार में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने मिलकर यात्रा की है तब से AIMIMको अपनी जमीन खिसकती दिखाई दे रही है. बिहार में आरजेडी और कांग्रेस दोनों का कोर बोट बैंक मुस्लिम है और AIMIM की नजर भी मुस्लिमों पर ही टिकी है. आरजेडी की कोशिश मुस्लिम वोटों को अपने साथ बांधकर रखने की है और इसके लिए तेजस्वी यादव वक्फ कानून का विरोध करके पसमांदा मुस्लिमों को साधने में में लगे हैं. राहुल गांधी भी ‘वोट अधिकार यात्रा’ निकालकर मुस्लिमों को अपने पक्ष में करते नजर आए हैं. जिसके काऱण ओवैसी की बेचैनी बढ़ी हुई गई है. देखा जा रहा है कि बिहार में विधानसभा चुनाव लगभग एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच सिमटता नजर आ रहा है, जिसके चलते एआईएमआईएम की सियासी राह काफी मुश्किल दिख रही है.

