Wednesday, February 11, 2026

SC on Buldozer Action: ‘दिशानिर्देशों का पालन किए बिना और 15 दिन के नोटिस के बिना तोड़फोड़ नहीं की जाएगी’

SC on Buldozer Action: बुधवार को बुलडोज़र एक्शन के खिलाफ सख्त दिशा निर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना संपत्ति के मालिक को 15 दिन का पूर्व नोटिस दिए बिना ध्वस्तीकरण नहीं किया जाना चाहिए.
कोर्ट ने इसके साथ ही ध्वस्तीकरण से पहले वैधानिक दिशानिर्देशों का पालन करने को लेकर भी कड़े निर्देश दिए.

SC on Buldozer Action: डाक से भेजा जाए नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटिस मालिक को पंजीकृत डाक से भेजा जाएगा और उसे संरचना के बाहरी हिस्से पर चिपकाया जाएगा। नोटिस में अनधिकृत निर्माण की प्रकृति, विशिष्ट उल्लंघन का विवरण और विध्वंस के आधार शामिल होने चाहिए। विध्वंस की वीडियोग्राफी की जानी चाहिए और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन अवमानना को आमंत्रित करेगा.

कानून का शासन मनमाने ढंग से की गई कार्रवाई के विरुद्ध है-कोर्ट

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा, ” “कानून का शासन और कार्यपालिका की मनमानी कार्रवाई के खिलाफ नागरिकों को अधिकार…. कानूनी प्रक्रिया ऐसी कार्रवाई को माफ नहीं कर सकती… कानून का शासन मनमाने ढंग से की गई कार्रवाई के विरुद्ध है. उल्लंघन से अराजकता को बढ़ावा मिल सकता है और संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा के लिए नागरिक अधिकारों की सुरक्षा आवश्यक है.” पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि कार्यपालिका न्यायपालिका के मूल कार्यों को करने में उसकी जगह नहीं ले सकती.

राज्य आरोपी या दोषी के खिलाफ मनमानी कार्रवाई नहीं कर सकता -कोर्ट

अदालत ने कहा, “यदि कार्यपालिका न्यायाधीश की भूमिका निभाती है और कानून की प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी घर को गिराने का आदेश देती है, तो यह कानून के शासन का उल्लंघन है. राज्य कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना आरोपी या दोषी के खिलाफ मनमानी कार्रवाई नहीं कर सकता है.”

बुलडोज़र एक्शन के मामलों में जिला मजिस्ट्रेटों को जवाबदेह बनाया

सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि अधिकारियों को यह दिखाने में सक्षम होना चाहिए कि विध्वंस ही एकमात्र उपाय है, यहां तक कि उन मामलों में भी जहां कुछ अतिक्रमण हैं.
पीठ ने निर्देश देते हुए कहा कि सभी नोटिस नगर निकाय के निर्दिष्ट पोर्टल पर डाले जाने चाहिए, जबकि नोटिस पंजीकृत डाक के माध्यम से भी भेजे जाने चाहिए.
अदालत ने कहा कि अनुपालन की निगरानी के लिए जिला मजिस्ट्रेटों को जवाबदेह बनाया गया है.

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