मंगलवार को असम के मुख्यमंत्री हिमांता बिसवा सरमा के नाराज़गी जताने के बाद गोलपाड़ा जिले में बना मिया मुस्लिमों का म्यूजियम सील कर दिया गया. स्थानीय प्रशासन ने बांग्लाभाषी मिया मुस्लिमों के नाम पर बने मयुजियम को उद्घाटन के अगले दिन बाद ही सील कर दिया. इसके साथ ही प्रशासन ने मकान के मालिक को भी गिरफ्तार कर लिया है. बताया जा रहा है कि प्रशासन ने नियमों के खिलाफ बताते हुए असम मिया मुस्लिम परिषद की तरफ से बने इस म्यूजियम को बंद करवा दिया है. प्रशासन का कहना है कि म्यूजियम प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवंटित मकान में बनाया गया है जो नियमों के खिलाफ है.
म्युज़ियम सील होने पर मकान मालिक ने दिया धरना
प्रशासन के म्यूजियम सील करने के बाद इलाके में तनाव पैदा हो गया. जिस घर में म्युज़ियम बना था उस घर के मकान मालिक अली ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए धरना शुरु कर दिया. इस धरने में उसके साथ उसके दो दोनों नाबालिग बेटों भी शामिल हो गए. अली का कहना था कि वो उसने अपने समुदाय को पहचान दिलाने के लिए ये म्युजियम बनाया था. इस म्युजियम में वो चीजें रखी गई थी जो उसके समुदाय की पहचान है. अली के धरने से हालात खराब होने के खतरे की बात करते हुए प्रशासन और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के सदस्य की शिकायत के बाद शुरु हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के सदस्य अब्दुर रहीम जिब्रान के इस म्यूजियम के खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत करने और थाने में शिकायत दर्ज कराने के साथ हुई. अब्दुर रहीम जिब्रान ने गोलपाड़ा जिले में असम मिया मुस्लिम परिषद के अध्यक्ष मोहर अली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपने मकान में ‘मिया संग्रहालय’ बनाया है. रविवार 23 अक्टूबर को लखीउर थाना क्षेत्र के दपकाभिता इलाके में इस म्यूजियम का उद्घाटन हुआ था. अली के इस म्यूजियम में खेती और मछली पकड़ने में काम आने वाले कुछ औजारों और लुंगी आदि रखी गई हैं. अली का दावा था कि ये सब चीजें ‘मिया मुस्लिम’ समुदाय की पहचान हैं. लेकिन मंगलवार शाम को सरकारी अधिकारियों ने इस म्युज़ियम को सील कर दिया. बीजेपी नेता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने संग्रहालय पर आदेश चिपकाकर उसे सील कर दिया. प्रशासन ने इस कार्रवाई की वजह ये बताई की जिस मकान में संग्राहलय बनाया गया है उसका निर्माण PMAY योजना के पैसे से हुआ है.
मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद सील हुआ संग्राहलय
असम के मुख्यमंत्री सरमा ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में इस संग्रहालय को ‘असमिया पहचान’ के लिए खतरा बताया था. उन्होंने कहा था कि “मिया समुदाय यह दावा कैसे कर सकता है कि हल उनकी पहचान है, जबकि असम के सभी किसान सदियों से हल चला रहे हैं. लुंगी पर केवल वे अपना दावा कैसे ठोक सकते हैं?”
असम में मिया मुस्लिम और खिलोंजिया मुस्लिम है दो समुदाय
सरकार ने इस साल जुलाई में असम के दो अलग-अलग समुदायों के पहचान का काम शुरु किया था. इन दो समुदाय में से एक खिलोंजिया मुस्लिम को असम सरकार स्थानीय निवासी मानती है. इस साल जुलाई में सरकार ने बाकायदा कैबिनेट बैठक में 5 मुस्लिम जनजातियों को खिलोंजिया मुस्लिम के तौर पर चिह्नित किया था. इनमें गोड़िया, मोड़िया, देशी, जुलाहा और सैयद मुस्लिम को शामिल किया गया था. सरकार ने तब कहा था कि इस कदम से भारतीय मुसलमानों को सरकारी मदद देने आसान हो जाएगा. इसलिए सरकार ने राज्य सरकार की बनाई एक एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिश का ये कदम उठाया है.
आपको बता दें असम में मुस्लिमों के दो समुदाय है. एक है असमिया मुस्लिम, जिन्हें खिलोंजिया मुस्लिम कहा जाता है. और सरकार इनको स्थानीय मुस्लिम मानती है. जबकि दूसरा समुदाय है बांगली भाषा बोलने वाला. कहा जाता है कि ये बांग्लादेश से आकर असम में बसे मुसलमान है. इन्हीं मुसलमानों को सरकार मिया मुस्लिम कहाती है.
म्यूजियम बनाने की पहल दो साल पहल भी हुई थी
दो साल पहले 2020 में कांग्रेस के पूर्व विधायक शर्मन अली अहमद ने सरकार के सामने मिया म्युज़ियम बनाने के प्रस्ताव रखा था. तब राज्य सरकार इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.

