Tuesday, March 3, 2026

lion lioness naming controversy पर नपे वन अधिकारी, शेर-शेरनी का नाम रखा था अकबर और सीता

कोलकाता के चिडियाघर में एक शेर शेरनी का आना  तब अच्छा खासा चर्चा का विषय lion lioness naming controversy बन गया जब उनके नाम को लेकर हिंदु वादी संगठनों ने सवाल उठाया. अब इस मामले में त्रिपुरा प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ IFS अधिकारी प्रवीण लाल अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है  और तब कर अगरतला में ही रहने का आदेश दिया है जब तक कि उनके लिए नया आदेश ना दिया जाये.

lion lioness naming controversy क्या है पूरा मामला ?

दरअसल इसी महीने की 12 तारीख को त्रिपुरा के प्राणी उद्यान सिपाहीजाला से  एक शेर और शेरनी के जोड़े को सिलिगुड़ी के बंगाल सफारी पार्क में लाया गया. इस दौरान ये बताया गया है कि इनमें से शेर का नाम अकबर और शेरनी का नाम सीता रखा गया है. शेर शेरनी के नाम का मामला जलपायगुड़ी कोर्ट पहुंचा और न्यायालय की पीठ ने ये कहा कि अधिकारी को ऐसे नाम रखने से बचना चाहिये था. अदालत ने अपने आदेश में ये भी कहा कि पश्चिम बंगाल चिडियाघर प्रशासन को विवेकपूर्ण फैसला लेते हुए इन दोनों जानवरों के नाम को बदलना चाहिये.

दरसअल शेर शेरनी के नाम को लेकर विश्व हिंदु संगठनों ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि मुश्लिम शासक के साथ देवी सीता नाम रखना भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है.इसलिए दोनों जानवरों के नाम बदल जायें.

 एक वर्ग सीता की पूजा करता है इसलिए…

जलपायगुड़ी कोर्ट के जज जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने पूछा था कि देवी देवताओं, नायकों या स्वतंत्रता सेनानियों या नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम पर जानवरों के नाम रखे जा सकते हैं, इसपर न्यायाधीश ने कहा कि बेबजह के विवाद से  बचने के लिए इस तरह के नामकरण से बचना चाहिए. अदालत ने कहा कि वेस्ट बंगाल पहले से ही कई कथित घाटालोओं को कारण विवादों में घिरा हुआ है,इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों  को अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए निर्णय लेने चाहिये और विवादों से बचना चाहिये .

अदालत ने कहा कि भारत एक धर्म निरेपक्ष राष्ट्र हैं ,और हर धर्म को अपनी भावनाओं के पालन का अधिकार है.  देश का एक बड़ा बर्ग सीता की पूजा करता है , जबकि अकबर एक मुगल सम्राट था. अदालत ने कहा जानवरों के ऐसे किसी नाम का समर्थन नहीं करते हैं और अइस तरह के नामकरण से बचना चाहिये .

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