दुनिया भर में कश्मीर का केसर अपनी उम्दा क्वालिटी के लिए जाना जाता है. पिछले कुछ वर्षो से भारत देश के एक हिस्से में केसर की खेती के लिए कोशिशें की जा रही थी और अब वो सफल होती नजर आ रही है.
हम बात कर रहे हैं पूर्वोत्तर भारत में बसे खूबसूरत राज्य सिक्किम की. अब सिक्किम में भी कश्मीर की तरह केसर की खेती की जायेगी. दरअसल पिछले कुछ समय से सिक्किम के कुछ हिस्सो में केसर की खेती के लिए ट्रायल चल रहा था, जिसके अब सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं. इसके बाद राज्य सरकार ने उन इलाको की पहचान की है जहां कश्मीर की तरह केसर की खेती करना संभव हो सकता है .किसानों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. केसर की खेती के लिए एक खास तरह के तापमान और नमी की जरुरत होती है जो कश्मीर और सिक्किम के कई इलाकों में लगभग एक जैसी है.इस देखते हुए सिक्किम इस साल केसर की खेती शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसानों ने इसके लिए कमर कस ली है.
दरअसल सिक्किम में केसर की खेत के लिए जम्मू कश्मीर ने बहुत मदद मिली है. सिक्किम में पहली बार बड़े पैमाने पर केसर की खेती होगी. खेती पर निगरानी रखने के लिए सिक्किम यूनिवर्सिटी , सिक्किम सरकार का बागवानी विभाग और जम्मू कश्मीर के कृषि विभाग ने हाथ मिलाया है .
सिक्किम में 2020 में केसर के खेती के लिए ट्रायल शुरु किया गया था ,उस समय ट्रायल की निगरानी सिक्किम यूनिवर्सिटी के जिम्मे था और इसका बहुत ही उत्साहजनक परिणाम देखने के मिला.
सिक्किम सरकार ने केसर की खेती की संभवानओं की जांच के लिए राज्य के कई हिस्सों में पड़ताल करवाई और पता चल कि राज्य मे कई ऐसे इलाके जहां कि जलवायु केसर की खेती के लिए अनुकूल है. पश्चिम सिक्किम में याक्सम और इसके आसपास के इलाके को इसके लिए उपयुक्त माना गया. साथ ही पूर्वी सिक्किम में पांगथांग, सिमिक, खामडोंग, पदमचेन और आसापास के इलाकों की पहचान की गई.इलाकों की जांच कर रहे अधिकारियों के मुताबिक कश्मीर के पंपोर और सिक्किम के यांगयांग का मौसम और भौगोलिक स्थिति समान है, इसलिए यहां ट्रायल के दौरान भी अच्छे परिणाम सामने आये.
सिक्किम में ये पहला साल है जब खेसर की खेती शुरु की जा रही है. इसके लिए सिक्किम का एक प्रतिनिधि मंडल जुलाई में कश्मीर के दौरे पर गया और दोनों के बीच खेती को लेकर समझौता भी हुआ है. औपचारिक तौर पर खेती शुरु कराने से पहले सिक्किम के बागवानी विभाग ने कश्मीरी एक्सपर्ट की निगरानी में किसानो के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित करवाये हैं.
सिक्किम में इस खास खेती के सपने को साकार करने के लिए कश्मीर ने बहुत मदद की है. सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद राय की कोशिशों और जम्मू कश्मीर के एक्सपर्ट्स की मदद ने इस मुश्किल काम को संभव कर दिखाया है .
राज्यपाल गंगा प्रसाद ने इसके बारे में मीडिया से बात करते हुए कहा कि ट्रालय के दौरान 80 प्रतिशत रिजल्ट आये हैं, जो बहुत ही उत्साहजनक है.
सिक्किम सरकार इस मौके को राज्य के लिए बड़े अवसर के रुप मे देख रही है. इसलिए पूरा प्रशासन इसको सफल बनाने में जोर शोर ले लगा है.

