भारत को अमेरिकी सैन्य मदद देने पर रोक-टोक की मांग, USCIRF ने उठाया मुद्दा

वॉशिंगटन। अमेरिका का सरकारी आयोग USCIRF (अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग) एक बार फिर भारत विरोधी रुख अपनाने को लेकर चर्चा में आ गया है। पिछले महीने अमेरिका में ही एक हिंदू मंदिर पर हुए हमले और भारतीयों के खिलाफ बढ़ रही नस्लीय घटनाओं पर चुप्पी साधे रहने वाले इस आयोग ने उल्टा भारत पर गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों पर हमले के झूठे आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही आयोग ने अमेरिकी सरकार से सिफारिश की है कि वह भारत को दी जाने वाली सैन्य व सुरक्षा सहायता पर शर्तें लागू करे।

भारत को मिलने वाली सुरक्षा मदद पर शर्त लगाने की मांग

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए आयोग ने लिखा कि कमिश्नर डेविड एंडरसन का दावा है कि भारत में सिख गुरुद्वारों को निशाना बनाया जा रहा है। आयोग का कहना है कि अमेरिकी सरकार को अपनी सुरक्षा सहायता को भारत की उस प्रतिक्रिया से जोड़ना चाहिए, जो कथित तौर पर लोगों को उनके धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार (FoRB) का इस्तेमाल करने से रोकती है। आयोग ने अमेरिकी प्रशासन पर दबाव बनाते हुए कहा है कि वह भारत सरकार को गुरुद्वारों, मस्जिदों और चर्चों पर होने वाले कथित हमलों के हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहे।

अमेरिका में हमलों पर साधी चुप्पी, भारत पर अनर्गल आरोप

गौरतलब है कि पिछले महीने अमेरिका में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाने का गंभीर प्रयास किया गया था, लेकिन इस आयोग ने उस घटना पर पूरी तरह मौन साधे रखा। अमेरिका में पिछले कुछ समय से भारतीयों के खिलाफ लगातार हिंसक हमले और नस्लीय टिप्पणियां सामने आई हैं, जिस पर आयोग ने कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके विपरीत वॉशिंगटन में बैठकर भारत के आंतरिक मामलों पर अनर्गल बयानबाजी की जा रही है।

क्या है USCIRF का एजेंडा?

सरल शब्दों में कहें तो USCIRF अमेरिका का एक ऐसा आयोग है, जिसका मुख्य काम दुनिया के अन्य देशों के आंतरिक मामलों में दखल देना और अमेरिकी हितों के हिसाब से सरकारों को बदनाम करना है। हालांकि अमेरिका इसे एक 'स्वतंत्र और द्विदलीय संघीय आयोग' बताता है, जो राष्ट्रपति, विदेश विभाग और अमेरिकी संसद को अपनी सिफारिशें भेजता है। इसकी सिफारिशें कानूनन बाध्यकारी तो नहीं होती हैं, लेकिन अमेरिकी सरकारें दबाव बनाने के टूल के रूप में इसका इस्तेमाल करती रही हैं। यह आयोग बीते कई सालों से भारत को 'विशेष चिंता वाले देशों' की श्रेणी में डालने की मांग कर रहा है, हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने हमेशा उसकी इस मांग को खारिज किया है।

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