‘12 साल में भारत को बहुत नुकसान हुआ है’, बुक लॉन्च से पहले सोनिया गांधी का सरकार पर तंज

कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरपर्सन सोनिया गांधी Sonia Gandhi ने आरोप लगाया है कि पिछले 12 सालों में भारत के ताने-बाने, डेमोक्रेसी और इंस्टीट्यूशन्स को “बहुत नुकसान” हुआ है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के जाने के बाद भी देश के सिस्टम को ठीक होने में समय लगेगा.
अपनी किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के लॉन्च से पहले द हिंदू को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने यह भी बताया कि लोग अब बेचैन होने लगे हैं और नुकसान को पहचानने लगे हैं.

भारत के लोग सही शासन की वापसी का स्वागत करेंगे- सोनिया गांधी

पूर्व कांग्रेस प्रमुख ने कहा, “लेकिन मैं आशावादी हूं और मुझे पता है कि भारत के लोग सही शासन की वापसी का स्वागत करेंगे.”
उन्होंने कहा, “पिछले बारह सालों में हमारे देश, हमारे लोकतंत्र और हमारे संस्थानों के ताने-बाने को बहुत नुकसान हुआ है. इस सरकार के जाने के बाद भी, हमारे सिस्टम को ठीक होने में समय लगेगा और राजनीतिक पार्टियों को बहुत कोशिश करनी होगी.”

मैं इतनी नेगेटिव नहीं हूं- Sonia Gandhi

कांग्रेस की गिरावट और उसकी मौजूदा हालत और उम्मीदों के बारे में पूछे जाने पर, गांधी ने कहा, “मैं इतनी नेगेटिव नहीं हूं. सोचिए कि जब से यह सरकार सत्ता में आई है, कांग्रेस पार्टी और दूसरी विपक्षी पार्टियों को बराबरी का मौका नहीं मिला है.
“सभी संस्थाओं, खासकर इलेक्शन कमीशन पर उनकी पूरी पकड़, मेनस्ट्रीम मीडिया पर उनका कंट्रोल, उनकी मनी पावर और धर्म का शोषण, इन सब बातों पर ध्यान दें.”
गांधी ने कहा, “फिर भी, हमारी पार्टी लड़ रही है और तरक्की कर रही है; असल में, यह अकेली ऐसी पार्टी है जिसमें इस हमले का सामना करने की हिम्मत है.”
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को “हर तरह की ज़ुल्म का सामना करना पड़ा है”.
उन्होंने कहा, “और फिर भी, हर गांव और हर जिले में, कांग्रेस के पुरुष और महिलाएं अभी भी हमारे संविधान में दिए गए मूल्यों के लिए लड़ रहे हैं.”
उन्होंने आरोप लगाया, “और तो और, हाल के महीनों में यह पूरी तरह साबित हो गया है कि कई चुनाव चुराए गए हैं, और लोग अब इसके बारे में ज़्यादा जागरूक हो गए हैं.” उन्होंने कहा, “कांग्रेस एक जैसी सोच वाली पार्टियों के साथ काम कर रही है, और हमारे मौके दिन-ब-दिन बेहतर हो रहे हैं.”

मुझे नहीं लगता कि हमें RSS से सीखने के लिए बहुत कुछ है.- सोनिया गांधी

हार्पर कॉलिन्स इंडिया की पब्लिश ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ एक पर्सनल मेमॉयर है, जिसमें पॉलिटिक्स बैकग्राउंड या “एक तरह का फ्रेमवर्क” देती है, जैसा कि उन्होंने किताब में कहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस को उनके आगे बढ़ने से क्या सबक लेना चाहिए, इस पर गांधी ने कहा, “यह सच है कि वह एक बहुत अलग सोच वाली दुनिया से आते हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी के अंदर पॉलिटिक्स में लोग कई तरीकों से सफल होते हैं, उदाहरण के लिए डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे को ही लें. मुझे नहीं लगता कि हमें RSS से सीखने के लिए बहुत कुछ है.”

वह (मनमोहन सिंह) सरकार को लीड कर रहे थे और मैं पार्टी को लीड कर रही थी

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें हैरानी है कि अगर उन्होंने 2004 में प्रधानमंत्री बनना मान लिया होता तो UPA की पॉलिसी और कांग्रेस की स्ट्रैटेजी कितनी अलग होती, गांधी ने कहा, “नहीं, बिल्कुल नहीं. यह बात मेरे दिमाग में कभी नहीं आई. हमारा अनुभव कुल मिलाकर बहुत पॉजिटिव रहा. हमने एक टीम की तरह काम किया, और हमारे रोल अलग थे, जिसमें वह (सिंह) सरकार को लीड कर रहे थे और मैं पार्टी को लीड कर रही थी.”
पिछले महीने, सोनिया ने कहा था कि दूसरों ने उनकी कहानी बताने में दशकों लगा दिए हैं और अब उनकी बारी है. उन्होंने यह भी कहा था कि जब 10 नवंबर को उनकी मेमॉयर आएगी तो कुछ “तमाशा” ज़रूर होगा.

10 नवंबर को रिलीज होगी “बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव”

हार्पर कॉलिन्स इंडिया 10 नवंबर को भारत में गांधी की 544 पेज की मेमॉयर “बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव” पब्लिश करेगा, जिससे लेखक के रिप्रेजेंटेटिव और पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) के बीच “गतिरोध” के बाद किताब के घरेलू पब्लिकेशन को लेकर बनी अनिश्चितता खत्म हो जाएगी.
PRHI, जो शुरू में इस मेमॉयर को पब्लिश करने के लिए उत्सुक था, ने बाद में कहा कि वह इंडियन पब्लिशर नहीं होगा.
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मैन्युस्क्रिप्ट में एडिटोरियल बदलावों को लेकर पब्लिशर और लेखक के प्रतिनिधियों के बीच मतभेद की खबरें आईं.
कई कांग्रेस नेताओं ने सरकारी दबाव और बोलने की आज़ादी के मुद्दे उठाए थे, कुछ ने आरोप लगाया कि पेंगुइन इंडिया पर प्रधानमंत्री मोदी, RSS और मोदी राज के दौरान भारतीय इलाके पर चीन के “कब्जे” से जुड़े सेक्शन हटाने का दबाव था.
PRHI ने साफ किया कि वे किताब पब्लिश करने के लिए “सच में उत्सुक” थे, इसे “बहुत मुश्किल से मिला एक्विजिशन” बताया, लेकिन आखिर में “एक खास मुद्दे पर रुकावट” के कारण पीछे हटने का फैसला किया.
यह कहते हुए कि कोई बाहरी दबाव नहीं था, PRHI ने कॉन्फिडेंशियलिटी क्लॉज और लेखक के साथ अपने एग्रीमेंट का हवाला देते हुए रुकावट की सही वजह बताने से मना कर दिया.

सोनिया की किताब में है, बचपन, प्यार, शादी, गांधी परिवार और राजनीति का सफर

“बिलॉन्गिंग” सोनिया गांधी के बचपन से शुरू होती है, जो युद्ध के बाद इटली के वेनेटो में बीता था. इसमें उनके कैम्ब्रिज के सफ़र के बारे में बताया गया है, जहाँ 1965 में उनकी मुलाक़ात राजीव गांधी से हुई थी.
इस संस्मरण में राजीव गांधी से उनकी शादी और उनकी सास, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से उनके परिचय के साथ-साथ भारत में ज़िंदगी में ढलने की उनकी कोशिशों के बारे में बताया गया है, जिसमें हिंदी सीखना, साड़ी पहनना और भारतीय खाने और संस्कृति को अपनाना शामिल है.
इसमें गांधी परिवार को बदलने वाली बड़ी दुखद घटनाओं के बारे में बताया गया है, जिसमें संजय गांधी की प्लेन क्रैश में मौत, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और 1991 में राजीव गांधी की हत्या शामिल है.
यह किताब 2004 के चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के आसपास की राजनीतिक घटनाओं पर भी रोशनी डालती है, जब सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से मना कर दिया था और इसके बजाय पार्टी और उसके गठबंधन का नेतृत्व किया था, जिसने एक दशक तक भारत पर शासन किया.

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