Bullet Train नई दिल्ली: देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. प्रस्तावित नॉर्दर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के जरिए दिल्ली को उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम के प्रमुख शहरों से जोड़ने की योजना है. इस हाई स्पीड रेल नेटवर्क के तहत दिल्ली से आगरा का सफर महज 59 मिनट और दिल्ली से कानपुर की यात्रा 1 घंटे 45 मिनट में पूरी होने का अनुमान है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित कॉरिडोर से दिल्ली और उत्तर भारत के कई बड़े शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने नॉर्दर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी दी है.
🚄 The Making of Bharat’s First Bullet Train
📍BEML Factory, Bengaluru#Bharat_BulletTrain https://t.co/L3WhfXMXfG
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) November 1, 2026
दिल्ली से आगरा, कानपुर और लखनऊ पहुंचना होगा आसान
प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क की सबसे बड़ी खासियत प्रमुख शहरों के बीच यात्रा के समय में होने वाली संभावित कमी है. रेल मंत्री की ओर से बताए गए अनुमानित यात्रा समय के मुताबिक:
- दिल्ली से आगरा: 59 मिनट
- दिल्ली से कानपुर: 1 घंटा 45 मिनट
- दिल्ली से लखनऊ: 2 घंटे 12 मिनट
- लखनऊ से वाराणसी: 1 घंटा 21 मिनट
- दिल्ली से वाराणसी: 3 घंटे 35 मिनट
ये प्रस्तावित हाई स्पीड रेल नेटवर्क के लिए बताए गए अनुमानित यात्रा समय हैं। वास्तविक समय ट्रेन के ठहराव, अंतिम रूट और परिचालन योजना पर निर्भर करेगा.
दिल्ली से गुवाहाटी तक जोड़ने की है योजना
नॉर्दर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का उद्देश्य सिर्फ दिल्ली और उत्तर प्रदेश के शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना नहीं है. प्रस्तावित नेटवर्क के जरिए उत्तर और पूर्वी भारत के बड़े शहरों को भी हाई स्पीड रेल सेवा से जोड़ने की योजना है.
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित रूट में आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, पटना, सिलीगुड़ी और गुवाहाटी जैसे शहर शामिल हो सकते हैं. इस नेटवर्क से उत्तर प्रदेश के साथ बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के यात्रियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.
हालांकि, इन शहरों को जोड़ने वाले पूरे कॉरिडोर के अंतिम रूट और स्टेशनों की पुष्टि विस्तृत परियोजना योजना सामने आने के बाद ही होगी.
कारोबार, पर्यटन और रोजगार को मिल सकता है बढ़ावा
हाई स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार से यात्रियों को समय बचाने के साथ कई आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है. दिल्ली, आगरा, कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों के बीच तेज कनेक्टिविटी से व्यापारिक यात्राएं आसान हो सकती हैं.
आगरा जैसे पर्यटन केंद्रों तक कम समय में पहुंचना पर्यटकों के लिए सुविधाजनक होगा. वहीं, कानपुर और लखनऊ जैसे प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच बेहतर संपर्क से कारोबार, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी प्रस्तावित कॉरिडोर के संदर्भ में कहा है कि हाई स्पीड रेल से युवाओं, मध्यम आय वर्ग के परिवारों और छोटे कारोबारियों के लिए आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं.
देश की पहली बुलेट ट्रेन कब चलेगी?
भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर है. इस 508 किलोमीटर लंबे रूट पर जापान की शिंकांसेन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे की योजना पहले चरण में सूरत से वापी के बीच लगभग 97 किलोमीटर लंबे हिस्से पर बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने की है. इसके लिए 2027 में परिचालन शुरू करने का लक्ष्य बताया गया है. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के बाकी हिस्सों पर सेवा शुरू करने की योजना है.
इस परियोजना के शुरू होने से मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय मौजूदा लगभग छह घंटे से घटकर करीब दो घंटे होने का अनुमान है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर और प्रस्तावित दिल्ली-कानपुर नॉर्दर्न कॉरिडोर अलग-अलग परियोजनाएं हैं. पहली बुलेट ट्रेन के परिचालन की समयसीमा को दिल्ली-कानपुर रूट के शुरू होने की तारीख नहीं माना जाना चाहिए.
जापानी तकनीक से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना में जापान की शिंकांसेन प्रणाली पर आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह प्रणाली तेज रफ्तार, उन्नत सिग्नलिंग और सुरक्षा व्यवस्था के लिए जानी जाती है.
भारत में हाई स्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार होने से लंबी दूरी की यात्रा के विकल्प बढ़ सकते हैं. हालांकि, दिल्ली से आगरा, कानपुर और वाराणसी के बीच बुलेट ट्रेन शुरू होने में अभी परियोजना की विस्तृत योजना, निर्माण और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी.

