प्रदूषण से निपटने के लिए नई रणनीति, दिल्ली-NCR में 50% कर्मचारियों को मिलेगी घर से काम करने की सुविधा

नई दिल्ली। सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण के स्तर में होने वाली संभावित बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में कड़े एहतियाती कदम उठाने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 5 से 20 नवंबर तक दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के चिन्हित जिलों में स्थित सरकारी तथा निजी संस्थानों में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ही कार्यालय बुलाने की अनुमति होगी। शेष 50 फीसदी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य रूप से वर्क फ्रॉम होम (घर से कार्य) लागू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस निर्धारित समयावधि में धूल उड़ाने वाली निर्माण गतिविधियों तथा तोड़फोड़ के कार्यों पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

इन जिलों पर लागू होंगे प्रतिबंध और आवश्यक सेवाओं को राहत

यह आदेश राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलावा हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद व सोनीपत तथा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद एवं गौतमबुद्ध नगर जिलों में प्रभावी रहेगा। इन सभी क्षेत्रों के शासकीय और निजी कार्यालयों को अपने स्टाफ की उपस्थिति 50 प्रतिशत तक सीमित रखनी होगी। यद्यपि, ऐसे उद्योगों और आवश्यक आपातकालीन सेवाओं को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है, जहां कार्य की विशेष प्रकृति के कारण घर से काम निष्पादित करना संभव नहीं है।

सड़क, फ्लाईओवर तथा बुनियादी ढांचा निर्माण पर पाबंदी

निर्माण स्थलों से निकलने वाले धूल के कणों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सीएक्यूएम ने 5 से 20 नवंबर के मध्य एनसीआर में सभी प्रकार के बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों को स्थगित रखने का आदेश दिया है। इस रोक के अंतर्गत राजमार्ग, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, विद्युत ट्रांसमिशन लाइन, पाइपलाइन और दूरसंचार से जुड़ी निर्माण परियोजनाएं शामिल रहेंगी। हालांकि, रेलवे, मेट्रो रेल, हवाई अड्डे, अंतरराज्यीय बस अड्डे, अस्पताल, पेयजल आपूर्ति तथा स्वच्छता से संबंधित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा से जुड़े कार्यों पर भी यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

विगत वर्षों के वायु गुणवत्ता आंकड़ों के आधार पर निर्णय

आयोग ने वर्ष 2018 से 2025 के मध्य नवंबर महीने के दौरान दिल्ली-एनसीआर में दर्ज किए गए वायु गुणवत्ता सूचकांक का गहन विश्लेषण करने के उपरांत यह कदम उठाया है। ऐतिहासिक आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि नवंबर के प्रथम व द्वितीय सप्ताह में हवा की गति मंद रहने, मौसमी प्रतिकूलताओं, पराली के धुएं तथा स्थानीय उत्सर्जन के कारण वायु गुणवत्ता कई बार गंभीर व खतरनाक श्रेणी में पहुंच जाती है। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूर्व-निवारक उपाय लागू किए गए हैं। आयोग ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों को इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन कराने का आदेश दिया है।

सीमाओं पर बीएस-6 मानकों वाले वाहनों की सघन जांच

प्रदूषण नियंत्रण अभियान के अंतर्गत 1 नवंबर से गैर-बीएस6 मानकों वाले व्यावसायिक व अन्य वाहनों के राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने के लिए दिल्ली की सिंघु बॉर्डर सहित अन्य सभी प्रमुख सीमाओं पर पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा वाहनों की सघन जांच की जा रही है।

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