हेमंत सोरेन की PMLA याचिका पर 19 नवंबर को अगली सुनवाई, केंद्र सरकार को जवाब देने का मिला समय

Hemant Soren PMLA Case रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े कथित जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार, 28 अक्टूबर को सुनवाई हुई. मुख्यमंत्री ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की कुछ धाराओं, खासकर धारा 44 के प्रावधानों, को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है. उन्होंने यह भी मांग की है कि हाईकोर्ट में याचिका पर अंतिम निर्णय आने तक विशेष अदालत में चल रही मुकदमे की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया.। हाईकोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित कर दी. फिलहाल अदालत ने निचली अदालत में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने का कोई आदेश नहीं दिया है. ऐसे में अब अगली सुनवाई में केंद्र सरकार का जवाब और मामले से जुड़े कानूनी तर्क महत्वपूर्ण होंगे.

PMLA की धारा 44 को हेमंत सोरेन ने क्यों दी चुनौती?

हेमंत सोरेन की याचिका धन शोधन निवारण अधिनियम यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 44 के प्रावधानों से जुड़ी है. इस धारा में मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों और संबंधित अपराधों की सुनवाई की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधान शामिल हैं.

मुख्यमंत्री की ओर से अदालत में यह सवाल उठाया गया है कि जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) अभियोजन शिकायत यानी चार्जशीट दाखिल कर चुका है और इसके बावजूद जांच जारी होने की बात कही जा रही है, तो ऐसी स्थिति में मुकदमे की कार्यवाही किस तरह आगे बढ़ाई जानी चाहिए.

हेमंत सोरेन की ओर से मांग की गई है कि मामले में जांच पूरी होने तक निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए. उनकी याचिका में PMLA की धारा 44 की उपधारा 1 और 2 को चुनौती दी गई है. इस कानूनी चुनौती पर हाईकोर्ट का अंतिम फैसला अभी नहीं आया है.

केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए मिला अतिरिक्त समय

झारखंड हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ कर रही है. पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार को मामले में प्रतिवादी बनाते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था, क्योंकि PMLA केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून है.

28 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा गया. अदालत ने इस मांग को स्वीकार कर लिया और अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय कर दी.

इससे मामले में तत्काल कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है.अगली सुनवाई में केंद्र सरकार के जवाब के साथ-साथ याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों पर आगे विचार किया जा सकता है.

क्या हेमंत सोरेन को ट्रायल पर रोक मिली?

इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को निचली अदालत की कार्यवाही से राहत दी है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, हाईकोर्ट ने फिलहाल ट्रायल पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया है.

हेमंत सोरेन की ओर से दलील दी गई है कि जब जांच जारी होने की बात कही जा रही है, तब मुकदमे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर विचार किया जाना चाहिए। उनकी मांग है कि हाईकोर्ट में याचिका का निपटारा होने तक विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही रोकी जाए.

रांची के बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला

हेमंत सोरेन से जुड़ा यह मामला रांची के बरियातू इलाके में बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन पर कथित अवैध कब्जे और उससे जुड़े दस्तावेजी फर्जीवाड़े के आरोपों से संबंधित है. प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच कर रहा है.

जांच एजेंसी ने जमीन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में हेमंत सोरेन को आरोपी बनाया है. यह मामला विशेष PMLA अदालत में भी चल रहा है. आरोपों का संबंध जमीन के कथित अधिग्रहण और उससे जुड़े दस्तावेजों से है. इन आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अदालत में अभी अंतिम रूप से दोष सिद्ध होने का निर्णय नहीं हुआ है.

किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप तय होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है. मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष को अदालत के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होता है.

विशेष अदालत ने 30 सितंबर को तय किए थे आरोप

इस मामले में 30 सितंबर 2026 को रांची की विशेष PMLA अदालत ने हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय किए थे. इसके बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ने का रास्ता खुला. विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय को 30 नवंबर से गवाह पेश करने और उनके बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था.

हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत के आरोप तय करने के आदेश और वहां चल रही कार्यवाही को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी है. उनकी याचिका का एक प्रमुख उद्देश्य यह है कि जांच जारी रहने के मुद्दे पर कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक ट्रायल की प्रक्रिया को रोका जाए.

अब इस मामले में दो स्तरों पर कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है. एक तरफ हाईकोर्ट में PMLA की धारा 44 के प्रावधानों और ट्रायल पर रोक की मांग पर सुनवाई होनी है, वहीं दूसरी तरफ विशेष अदालत में मुकदमे की आगे की प्रक्रिया से जुड़ी तारीखें भी निर्धारित हैं.

19 नवंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें

हेमंत सोरेन की याचिका पर अब 19 नवंबर 2026 को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होगी. केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मिल चुका है. अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों पर क्या पक्ष रखती है और अदालत आगे क्या निर्देश देती है.

फिलहाल हाईकोर्ट ने न तो PMLA की संबंधित धाराओं पर अंतिम फैसला सुनाया है और न ही विशेष अदालत में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाई है. इसलिए मामले की कानूनी स्थिति में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम 19 नवंबर की सुनवाई और उसके बाद अदालत के आदेशों से स्पष्ट होगा.

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