मां के निधन के बाद भी नहीं रुका झारखंड का कामकाज,नेमरा से फाइलें निपटा रहे CM हेमंत सोरेन

CM Hemant Soren at Nemra : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों निजी जीवन के बेहद दुखद दौर से गुजर रहे हैं. उनकी माता स्वर्गीय रूपी सोरेन के निधन के बाद रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित पैतृक गांव नेमरा में संथाली परंपराओं के अनुसार श्राद्ध-कर्म की रस्में निभाई जा रही हैं. परिवार के साथ शोक में डूबे मुख्यमंत्री इन धार्मिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच राज्य के प्रशासनिक कामकाज पर भी नजर बनाए हुए हैं. नेमरा स्थित अपने पैतृक आवास से ही वह जरूरी सरकारी फाइलों का निपटारा कर रहे हैं और अधिकारियों से संपर्क कर जनहित से जुड़े मामलों की जानकारी ले रहे हैं.

CM Hemant Soren at Nemra
माता के निधन के बाद अपने पैतृक गांव में सीएम सोरेन

मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम में निजी शोक और सार्वजनिक दायित्व, दोनों की झलक दिखाई दे रही है. एक ओर वह मां के निधन के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर राज्य के प्रशासनिक तंत्र के साथ समन्वय बनाए रखकर जरूरी कामकाज को आगे बढ़ा रहे हैं.

मां के निधन के बाद नेमरा में निभा रहे पारंपरिक रस्में

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन का निधन 7 अक्टूबर 2026 को रांची के एक निजी अस्पताल में हुआ था. इसके अगले दिन, 8 अक्टूबर को रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित ढेकानाला घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं अपनी मां को मुखाग्नि दी.

मां के निधन के बाद परिवार संथाली परंपराओं के अनुसार शोक और श्राद्ध-कर्म की रस्में निभा रहा है. इन परंपराओं में निर्धारित अवधि तक विशेष नियमों का पालन किया जाता है. मुख्यमंत्री भी पारंपरिक शोक वेशभूषा में इन रस्मों में शामिल हो रहे हैं. वह सफेद धोती और पैरों में खड़ाऊं पहनकर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं.

श्राद्ध-कर्म के दौरान माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने से जुड़ी विभिन्न रस्में निभाई जा रही हैं. इनमें भोजन, पानी और दातून अर्पित करने सहित बाल और नाखून कटवाने जैसी परंपराएं शामिल हैं. मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी कल्पना सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी इन संस्कारों में हिस्सा ले रहे हैं.

परिवार और गांव में होने वाले आगामी धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर तैयारियां भी जारी हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 17 से 19 अक्टूबर के बीच दशकर्म और संस्कार भोज से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं. इसके लिए बड़े स्तर पर पंडाल और भोजन की व्यवस्था की जा रही है.

नेमरा से ही सरकारी फाइलों का निपटारा कर रहे मुख्यमंत्री

मां के निधन के बाद शोक की अवधि में होने के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरकारी कामकाज से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई है. नेमरा स्थित पैतृक आवास से ही वह जरूरी फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं और प्रशासनिक मामलों की समीक्षा कर रहे हैं.

राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी आवश्यक दस्तावेज और फाइलें लेकर नेमरा पहुंच रहे हैं. मुख्यमंत्री अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न विभागों के कामकाज की जानकारी ले रहे हैं. महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय लेने के साथ-साथ न्यायालयों के आदेशों के अनुपालन से जुड़ी फाइलों पर भी कार्रवाई की जा रही है.

सरकारी कामकाज को जारी रखने के लिए अधिकारियों के साथ संपर्क और समन्वय बनाए रखा गया है. जरूरत के अनुसार मुख्यमंत्री दूरभाष के माध्यम से भी संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश दे रहे हैं। इससे प्रशासनिक स्तर पर जरूरी मामलों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है.

मुख्यमंत्री के नेमरा में रहने के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की आवाजाही भी जारी है. संबंधित अधिकारी जरूरी मामलों की जानकारी दे रहे हैं, ताकि महत्वपूर्ण निर्णयों और सरकारी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी न हो.

स्थानीय लोगों की समस्याएं भी सुन रहे हेमंत सोरेन

नेमरा में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए उनके परिचितों, समर्थकों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी है. मां के निधन पर संवेदना व्यक्त करने आने वाले लोगों से मुलाकात के बीच हेमंत सोरेन स्थानीय लोगों की समस्याएं भी सुन रहे हैं.

लोगों की ओर से सामने रखे जाने वाले मामलों पर वह संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे रहे हैं. स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश देना भी उनके कार्यक्रम का हिस्सा है.

इस तरह मुख्यमंत्री का नेमरा प्रवास केवल पारिवारिक और धार्मिक रस्मों तक सीमित नहीं है. इस दौरान वह अपने क्षेत्र के लोगों से संवाद बनाए रखने और प्रशासनिक मामलों की जानकारी लेने का काम भी कर रहे हैं.

हालांकि, शोक की अवधि में मुख्यमंत्री की प्राथमिकता परिवार के साथ रहकर परंपराओं का निर्वहन करना है.इसके साथ ही जरूरी सरकारी मामलों पर नजर रखना उनके कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है.

श्राद्ध कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा के विशेष इंतजाम

मुख्यमंत्री के पैतृक गांव नेमरा में श्राद्ध-कर्म और संस्कार भोज के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है. बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन के स्तर पर विशेष इंतजाम किए गए हैं.

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 15 से 19 अक्टूबर तक कुल 55 पुलिस अधिकारियों की विशेष प्रतिनियुक्ति की गई है. इनमें 13 भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी और राज्य पुलिस सेवा के 42 अधिकारी शामिल हैं.

इन अधिकारियों की तैनाती का उद्देश्य कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना तथा लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित करना है. मुख्यमंत्री की मौजूदगी और श्राद्ध-कर्म में शामिल होने के लिए आने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं.

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि धार्मिक और पारिवारिक आयोजन के दौरान व्यवस्था सुचारु बनी रहे.

निजी शोक और सार्वजनिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नेमरा से सरकारी कामकाज जारी रखना ऐसे समय में सामने आया है, जब वह अपनी मां के निधन से जुड़े गहरे व्यक्तिगत दुख से गुजर रहे हैं. पारिवारिक परंपराओं का पालन करने के साथ-साथ प्रशासनिक मामलों पर ध्यान देना उनके मौजूदा कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता है.

सरकार चलाने की जिम्मेदारी में कई ऐसे मामले होते हैं, जिनमें समय पर निर्णय और न्यायालयों के आदेशों का अनुपालन आवश्यक होता है. ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखना और जरूरी फाइलों की समीक्षा करना प्रशासनिक निरंतरता के लिहाज से महत्वपूर्ण है.

नेमरा में मुख्यमंत्री की दिनचर्या में धार्मिक रस्में, संवेदना व्यक्त करने पहुंच रहे लोगों से मुलाकात और सरकारी कामकाज के लिए समय निकालना शामिल है. सुबह से देर रात तक चलने वाली इन गतिविधियों के बीच वह राज्य के प्रशासनिक तंत्र से जुड़े रहने की कोशिश कर रहे हैं.

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