नेहा बोरा का ऐलान, ‘पीस बॉन्ड साइन नहीं करूंगी’, हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद सरकार पर निशाना

Neha Bora Peace Bond : दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से जुड़े मामले में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद आज शनिवार (24 अक्टूबर) को नेहा बोरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ हुए आंदोलन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का भी जिक्र किया.

नेहा बोरा की प्रेस कांफ्रेंस

 यह मामला 16 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के बाद शांति बनाए रखने के लिए जारी किए गए नोटिस से जुड़ा है. नोटिस में नेहा बोरा से 10,000 रुपये का निजी बॉन्ड और एक जमानतदार देने को कहा गया था. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए संबंधित सामग्री उपलब्ध कराने और बॉन्ड भरवाने के समय पर विचार करने के निर्देश दिए हैं.

क्या है पूरा मामला?

AISA यानी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा 16 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जा रही थीं. इसी दौरान उन्हें मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था. इस मार्च का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और चुनावी प्रक्रिया के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध से जुड़े आंदोलन से था.

नेहा बोरा की रिहाई के बाद 17 अक्टूबर को नई दिल्ली जिले के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से नोटिस जारी किया गया. इसमें उन्हें जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का निजी बॉन्ड और एक जमानतदार प्रस्तुत करने के संबंध में जवाब देने को कहा गया था.

इस नोटिस को चुनौती देते हुए नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया. उनकी ओर से दलील दी गई कि नोटिस में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और शांति भंग होने की आशंका के समर्थन में जरूरी सामग्री भी उपलब्ध नहीं कराई गई. उनकी याचिका में इन कार्यवाहियों को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को दबाने की कोशिश बताया गया था.

दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 अक्टूबर को नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी. न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि संबंधित मजिस्ट्रेट के पास कार्यवाही शुरू करने के लिए पर्याप्त सामग्री थी. कोर्ट के अनुसार, मामला केवल सुनी-सुनाई बातों पर आधारित नहीं था, बल्कि पुलिस की जनरल डायरी में दर्ज तीन प्रविष्टियों और अन्य संबंधित सामग्री पर भी आधारित था.

हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि नेहा बोरा को नोटिस जारी करने के आधार में इस्तेमाल की गई सभी संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई जाए. मजिस्ट्रेट को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि बॉन्ड जमा करने का आदेश देने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन हो.

हाईकोर्ट ने नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, लेकिन आगे की कार्यवाही में नेहा बोरा को संबंधित सामग्री देखने और अपना पक्ष रखने का अवसर देने के निर्देश भी दिए.

BNSS की किन धाराओं के तहत जारी हुआ नोटिस?

यह मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत शुरू की गई निवारक कार्यवाही से जुड़ा है. इन प्रावधानों के तहत संभावित शांति भंग होने की आशंका के आधार पर संबंधित व्यक्ति से जवाब मांगा जा सकता है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बॉन्ड देने की मांग की जा सकती है.

इस मामले में धारा 135(3) का भी संदर्भ आया, जो जांच पूरी होने से पहले कुछ परिस्थितियों में शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड की मांग से संबंधित है.

SIR आंदोलन और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का जिक्र

शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेहा बोरा ने पिछले कुछ दिनों में हुए आंदोलनों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि देशभर में SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन हुआ है.

उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा. उनके बयान का केंद्र विरोध-प्रदर्शन, चुनावी प्रक्रिया और आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई थी.

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब मामले में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण है. नेहा बोरा को नोटिस के आधार में इस्तेमाल की गई सामग्री उपलब्ध कराने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने के निर्देश हैं. बॉन्ड जमा करने की आवश्यकता और उससे जुड़ी प्रक्रिया पर संबंधित मजिस्ट्रेट को कानून के अनुसार विचार करना होगा.

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