चांद पर भूकंप का खतरा बढ़ा? हजारों दरारों को लेकर NASA की रिपोर्ट ने खींचा ध्यान

वाशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की नवीनतम तस्वीरों से चंद्रमा की सतह पर 10 हजार से अधिक ऐसी दरारों (फॉल्ट) का खुलासा हुआ है, जहाँ भविष्य में भूकंप आने का गंभीर खतरा बना हुआ है। यह अहम खोज 'लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर कैमरा' (एलआरओसी) से मिली हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों के गहन विश्लेषण के बाद सामने आई है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ये दरारें नासा के महत्वाकांक्षी 'आर्टेमिस' मिशन के लिए सुरक्षित लैंडिंग साइट के चयन में नई मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं, जिसके तहत दोबारा इंसानों को चांद पर उतारने की योजना है।

भीतर से ठंडे होने के कारण सिकुड़ रहा है चंद्रमा

वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक, चंद्रमा का आंतरिक भाग धीरे-धीरे ठंडा हो रहा है, जिसके चलते इसका आकार लगातार सिकुड़ रहा है। पिछले करीब 40 करोड़ वर्षों में चांद की त्रिज्या लगभग 45 मीटर तक कम हो चुकी है। इस निरंतर सिकुड़न के कारण चंद्रमा की सतह पर भारी दबाव पड़ता है, जिससे 'लोबेट स्कार्प' और 'मारे रिज' जैसी लंबी व उभरी हुई भूगर्भीय संरचनाओं का निर्माण होता है। एलआरओसी कैमरे ने 8,900 से अधिक लोबेट स्कार्प और 2,000 से अधिक छोटी मारे रिज की पहचान की है। अनुमान है कि चांद की त्रिज्या हर 10 लाख वर्ष में 6 से 11 सेंटीमीटर तक घट रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि यह भूगर्भीय प्रक्रिया आज भी सक्रिय है।

चंद्र भूकंप (मूनक्वेक) का मुख्य कारण हैं ये दरारें

ये दरारें ही चंद्रमा पर आने वाले मूनक्वेक का सबसे बड़ा कारण मानी जाती हैं। वर्ष 2019 में वैज्ञानिक टॉम वॉटर्स और उनके शोध दल ने फॉल्ट और भूकंपीय गतिविधियों के बीच सीधे संबंध के ठोस प्रमाण दिए थे, जब अपोलो मिशन के दौरान स्थापित सीस्मोमीटर ने इन दरारों के आसपास की हलचल को रिकॉर्ड किया था। पृथ्वी की पपड़ी जहां लगभग 15 विशाल टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित है, वहीं चंद्रमा की ऊपरी सतह एक अकेली और ठोस प्लेट की तरह है। यह भिन्नता चांद पर भूकंप आने वाले सटीक स्थानों की भविष्यवाणी करना काफी कठिन बना देती है, क्योंकि हलचल पुराने फॉल्ट में भी हो सकती है और नए फॉल्ट भी आकार ले सकते हैं।

आर्टेमिस मिशन के लिए जरूरी है सतर्कता

यह खोज आगामी आर्टेमिस मिशन के लिए विशेष महत्व रखती है। इससे पहले 2024 के एक अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि इस मिशन के लिए चुनी गई 13 संभावित लैंडिंग साइट्स में से कुछ ऐसी जगहों के करीब हैं, जहाँ भूकंप का जोखिम अधिक है। चंद्र भूकंप के कारण सतह की मिट्टी और चट्टानें खिसक सकती हैं, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों और उनके तकनीकी उपकरणों को भारी नुकसान पहुँच सकता है। हालांकि, वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि यह स्थिति अंतरिक्ष यात्रा को असंभव नहीं बनाती है। जिन क्षेत्रों में चंद्रमा की पपड़ी अपेक्षाकृत मोटी है, वहाँ फॉल्ट कम पाए गए हैं, जिन्हें भविष्य के सुरक्षित अभियानों के लिए बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। चंद्रमा की सतह में हो रहे लगातार बदलावों को देखते हुए इन भूगर्भीय गतिविधियों की सतत निगरानी बेहद जरूरी है।

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