SIR Dispute Opposition meeting नई दिल्ली : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में सियासी पारा चढ़ा हुआ है. विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपने तेवर और तीखे कर लिए हैं. इस बीच उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में अनियमितता की शिकायत सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है.
UP के पीलीभीत में मतदाता सूची में गड़बड़ी, EC की सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में गंभीर धांधली का आरोप सामने आया है.कांग्रेस का आरोप है कि 13,150 मतदाताओं के निर्वाचन फोटो पहचान पत्र (EPIC) नंबर और क्रम संख्या समान रखकर उनके नाम बदल दिए गए. इसके अलावा 884 स्थानीय मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए और 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए, जो उस क्षेत्र में रहते ही नहीं हैं.
मामला गरमाने के बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है. आयोग ने संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से मतदाता सूची के काम से हटा दिया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी रणदीप रिणवा ने दो दिनों के भीतर जिला निर्वाचन अधिकारी से पूरे जिले की वोटर लिस्ट की जांच रिपोर्ट तलब की है.
‘इंडिया’ गठबंधन की रणनीति और 1 नवंबर की दिल्ली रैली
सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रहे विपक्ष की जल्द ही एक अहम बैठक होने वाली है। हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा बुलाई गई आज की ऑनलाइन बैठक फिलहाल टल गई है, लेकिन जल्द ही नेता नई रणनीति पर मंथन करेंगे।
यह बैठक 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली बड़ी रैली की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके साथ ही, कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार जल्द ही महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है, जिसमें परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है।
इससे पहले 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ निकाला था और एसआईआर (SIR) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. 13 अक्टूबर को राहुल गांधी के आवास पर हुई बैठक में विपक्षी दलों ने ‘वोट चोरी’ के खिलाफ इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाने का संकल्प जताया था.
सीजेपी (CJP) का आक्रामक रुख
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया हुआ है. हिरासत से रिहाई के बाद सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने कहा कि ‘ज्ञानेश कुमार को पद से हटना ही होगा’. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इससे जुड़ा वीडियो साझा किया है. मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु में प्रदर्शन कर चुकी सीजेपी जल्द ही अपने अगले कदम का ऐलान कर सकती है.
बीजेपी का जवाब: ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ अभियान
विपक्ष के लगातार हमलों का जवाब देने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी अपनी रणनीति तैयार कर ली है. बीजेपी आज से 5 नवंबर तक देशव्यापी ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ अभियान चलाने जा रही है. पार्टी का उद्देश्य चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रियाओं पर विपक्ष द्वारा खड़े किए जा रहे सवालों का जवाब देना और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पारदर्शिता के प्रति जनता में जागरूकता फैलाना है.

