Amit Shah Punjab Visit : अमित शाह के दौरे का सबसे अहम हिस्सा उन तीन परिवारों से मुलाकात है, जिनके सदस्यों की मौत नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने से जुड़े विवादों के बीच हुई.उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, शाह का कार्यक्रम तीनों जिलों में जाने का है.
मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या
नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि उन्होंने एक मेडिकल स्टोर संचालक से बुजुर्ग को नशे की लत वाली दवाएं बेचे जाने पर सवाल किया था. इस मामले में मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार को गिरफ्तार किया गया.
गुरदासपुर: बिक्रमजीत सिंह का मामला
रिपोर्टों के अनुसार, बटाला के मारी पनवां गांव में 15 अक्टूबर को बिक्रमजीत सिंह की कथित तौर पर धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी. ग्रामीणों ने इसे नशे के कारोबार का विरोध करने से जोड़ा है, हालांकि पुलिस ने हत्या में नशे के एंगल से इनकार किया है.
संगरूर: गुलजार सिंह की मौत
दिरबा क्षेत्र के गुलजार सिंह की जहर खाने के बाद मौत हो गई थी.उन्होंने नशे की उपलब्धता को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल उठाए थे. परिवार ने उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मामले में पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी थी.
नशे के मुद्दे पर बीजेपी और AAP आमने-सामने
अमित शाह ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर आरोप लगाया है कि उसके कार्यकाल में नशे का कारोबार बढ़ा है और इसके कारण अनेक परिवारों को अपने बच्चों को खोना पड़ा है.उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश सफल नहीं होगी.
वहीं, AAP ने केंद्र सरकार पर पलटवार करते हुए सवाल किया है कि देश में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए केंद्र ने क्या ठोस कदम उठाए हैं. पार्टी ने गुजरात के बंदरगाहों के रास्ते कथित तौर पर होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी का मुद्दा भी उठाया.
चुनाव से पहले बीजेपी की रणनीति के लिहाज से अहम दौरा
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए नशे का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है. बीजेपी राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है और नशामुक्त पंजाब को अपने प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल कर रही है.
अमित शाह का यह दौरा केवल दशहरा समारोह तक सीमित नहीं है. नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के परिवारों से मुलाकात के जरिए बीजेपी इस मुद्दे को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर उठाना चाहती है.
हालांकि, नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर्याप्त नहीं होंगे. तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई, नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार, पुनर्वास और युवाओं के लिए रोकथाम संबंधी कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण हैं.
अब मीडिया की गृहमंत्री शाह के 20 अक्टूबर के दौरे पर रहेगी. लुधियाना में ‘ड्रग्स के रावण’ के दहन और तीन परिवारों से मुलाकात के दौरान अमित शाह क्या संदेश देते हैं तथा केंद्र सरकार नशे के खिलाफ आगे कौन-से कदम उठाने की बात करती है, यह देखना दिलचस्प होगा.

