IIIT Ranchi Student Death Case : रांची के IIIT हॉस्टल में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार की मौत के छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच अब संस्थान ने प्रशासनिक कार्रवाई की है.लगातार विरोध प्रदर्शन और हॉस्टल की सुविधाओं पर उठे सवालों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव को 30 दिनों की छुट्टी पर भेज दिया है. उनकी अनुपस्थिति में IIEST शिवपुर के निदेशक प्रो. वी.एम.एस.आर. मूर्ति को IIIT रांची के कार्यवाहक निदेशक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है.
इससे पहले शिक्षा मंत्रालय ने छात्र की मौत की परिस्थितियों और संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी. समिति की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी कर रही हैं. जांच में छात्र कल्याण, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था, काउंसलिंग, मेंटरिंग और शिकायत निवारण प्रणाली की स्थिति की समीक्षा की जाएगी.
निदेशक को छुट्टी पर भेजने की कार्रवाई के बाद छात्रों ने अपना विरोध प्रदर्शन अस्थायी रूप से रोक दिया है. इसके अलावा विवादों में घिरी गैर-शिक्षण पदों की भर्ती प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है. हालांकि, छात्र की मौत के कारणों और संस्थान पर लगाए गए आरोपों की अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.
क्या है IIIT रांची में छात्र की मौत का मामला?
यह घटना 10 अक्टूबर 2026 की रात रांची के खेलगांव परिसर स्थित IIIT कैंपस के हॉस्टल में हुई. प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार का शव उनके हॉस्टल के कमरे में मिला था. वह बिहार के पूर्णिया जिला का रहने वाला था.आदित्य ने इसी साल संस्थान में एडमिशन लिया था. घटना के समय संस्थान में मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही थीं.
बताया गया कि जब हॉस्टल के अन्य छात्रों ने आदित्य के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद पाया और काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उन्होंने संस्थान के प्रशासन को इसकी सूचना दी. दरवाजा खोले जाने पर आदित्य कमरे में मृत मिले.
उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. शुरुआती पुलिस जानकारी के मुताबिक, घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ था.
यह घटना सामने आने के बाद परिसर में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया. छात्रों ने संस्थान की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग शुरू कर दी.
एंबुलेंस और मेडिकल सुविधाओं पर छात्रों ने उठाए सवाल
आदित्य की मौत के बाद छात्रों का सबसे बड़ा सवाल आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर था. प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि जरूरत के समय उन्हें पर्याप्त और समय पर मेडिकल सहायता नहीं मिली.
छात्रों के दावों के मुताबिक, हॉस्टल की लिफ्ट खराब थी और परिसर में उपलब्ध एंबुलेंस में ऑक्सीजन जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी थी. कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि आपात स्थिति में एंबुलेंस और संबंधित कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर परेशानी हुई.
इन आरोपों ने संस्थान में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए.हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, इसकी जांच होना बाकी है.
छात्रों की मांग थी कि परिसर में 24 घंटे आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए.इसके साथ ही स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति, बेहतर एंबुलेंस सेवा और हॉस्टल की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग भी उठाई गई.
प्रदर्शनकारियों ने मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, पेयजल, बिजली और अन्य व्यवस्थाओं पर भी नाराजगी जताई. उनका कहना था कि संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
निदेशक के इस्तीफे की मांग पर कई दिनों तक प्रदर्शन
आदित्य की मौत के बाद छात्रों ने संस्थान परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव के इस्तीफे की मांग की. उनका कहना था कि संस्थान की व्यवस्थाओं और छात्र सुविधाओं को लेकर पहले भी शिकायतें की जाती रही थीं, लेकिन उनकी समस्याओं का उचित समाधान नहीं हुआ.
छात्रों का आंदोलन केवल निदेशक के पद से हटने की मांग तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने हॉस्टल में बेहतर सुविधाएं, प्रभावी मेडिकल सहायता, पारदर्शी प्रशासन और छात्र शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की मांग भी उठाई.
प्रदर्शन के दौरान खेलगांव परिसर के आसपास सड़क पर भी विरोध हुआ. स्थिति को संभालने के लिए पुलिस की तैनाती की गई. संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) ए.के. भट्ट सहित संस्थान के अधिकारी प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने पहुंचे थे.
छात्रों की नाराजगी का एक कारण यह भी था कि वे निदेशक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई चाहते थे, जबकि संस्थान की ओर से जांच और उचित प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा था.
शिक्षा मंत्रालय ने बनाई तीन सदस्यीय जांच समिति
छात्रों के विरोध और संस्थान की व्यवस्थाओं पर उठे सवालों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की. मंत्रालय की 13 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, समिति का उद्देश्य छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की पड़ताल करना और संस्थान में छात्र कल्याण से संबंधित व्यवस्थाओं का आकलन करना है.
समिति में शामिल सदस्य हैं:
- प्रो. रजनी अब्बी: दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की निदेशक और समिति की अध्यक्ष.
- डॉ. जितेंद्र नागपाल: दिल्ली के मूलचंद अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक.
- हीरा लाल पूनिया: शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में उप सचिव.
समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.
जांच समिति किन मुद्दों की पड़ताल करेगी?
समिति को केवल घटना की परिस्थितियों की जांच करने तक सीमित नहीं रखा गया है. उसे संस्थान में छात्र कल्याण से जुड़े व्यापक मुद्दों की भी समीक्षा करनी है.
जांच के प्रमुख बिंदु हैं:
- छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों की पड़ताल.
- जुलाई 2023 के छात्र कल्याण संबंधी दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा.
- हॉस्टल की बुनियादी सुविधाओं और आपातकालीन चिकित्सा सहायता की उपलब्धता एवं कार्यप्रणाली का आकलन.
- छात्रों के लिए काउंसलिंग और मेंटरिंग की व्यवस्था की समीक्षा.
- शिकायत निवारण तंत्र की प्रभावशीलता की जांच.
- संस्थान में व्यवस्था संबंधी कमियों की पहचान कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुझाना.
समिति जरूरत के अनुसार संबंधित पक्षों से बातचीत कर सकती है और उपलब्ध रिकॉर्ड तथा दस्तावेजों की जांच कर सकती है. इसका उद्देश्य संस्थान की व्यवस्थाओं में संभावित कमियों की पहचान कर सुधार के लिए सुझाव देना है.
30 दिन की छुट्टी पर भेजे गए निदेशक राजीव श्रीवास्तव
खबर है कि शिक्षा मंत्रालय ने निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से 30 दिनों की छुट्टी पर भेज दिया. IIIT रांची के प्रभारी रजिस्ट्रार मुनुरेन सैमसन चांपिया ने इस खबर की पुष्टि की है.
प्रो. राजीव श्रीवास्तव की अनुपस्थिति में फिलहाल प्रो. वी.एम.एस.आर. मूर्ति को कार्यवाहक निदेशक बनाया गया है. प्रो. मूर्ति वर्तमान में भारतीय इंजीनियरिंग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIEST), शिवपुर के निदेशक हैं. उन्हें एक महीने या अगले आदेश तक IIIT रांची का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.
विवादित गैर-शिक्षण भर्ती प्रक्रिया भी रद्द
छात्रों के विरोध के बीच संस्थान की गैर-शिक्षण पदों पर भर्ती प्रक्रिया को भी रद्द कर दिया गया है. यह प्रक्रिया पहले से विवादों में थी और इसे लेकर भी सवाल उठाए गए थे.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संस्थान के प्रभारी रजिस्ट्रार की ओर से जारी सूचना में भर्ती प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की जानकारी दी गई. आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की फीस वापस करने की बात भी कही गई है. फीस वापसी से जुड़ी आवश्यक जानकारी और प्रक्रिया संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराने की बात रिपोर्ट में कही गई.
इस फैसले से संस्थान के प्रशासनिक कामकाज और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल भी चर्चा में आ गए हैं. हालांकि, भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के कारणों और उससे जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों से मिलान करके ही प्रकाशित की जानी चाहिए.
कार्रवाई के बाद छात्रों ने अस्थायी रूप से रोका आंदोलन
निदेशक को 30 दिनों की छुट्टी पर भेजने और कार्यवाहक निदेशक की नियुक्ति के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपना आंदोलन अस्थायी रूप से रोक दिया. यह घटनाक्रम संस्थान में जारी प्रशासनिक गतिरोध को कम करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है.

