Hemant Soren Land Case रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं. विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए. आरोप तय होने के बाद अब मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर 2026 की तारीख तय की है.
अदालत में अभियोजन की ओर से लगाए गए आरोपों को पढ़कर सुनाया गया. इसके जवाब में हेमंत सोरेन ने खुद को निर्दोष बताया और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताया. उनके वकील के मुताबिक, उन्होंने आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और मामले में आगे कानूनी लड़ाई जारी रहेगी.
Hemant Soren Land Case:8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल में स्थित करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेजों और जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की गई.
ईडी की जांच के मुताबिक, जमीन रांची के बरियातू रोड स्थित बड़गाईं क्षेत्र में है. एजेंसी का दावा है कि जमीन से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और स्वामित्व दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया था.
31 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई जमीन की कीमत
ईडी की चार्जशीट में इस 8.86 एकड़ जमीन का मूल्य 31,07,02,480 रुपये, यानी करीब 31.07 करोड़ रुपये बताया गया था. यह मूल्य शहरी आवासीय संपत्ति की निर्धारित दर के आधार पर आंका गया था.
जांच एजेंसी का आरोप है कि यह जमीन कथित तौर पर अवैध तरीके से हासिल और अपने कब्जे में रखी गई थी. हालांकि, इस मामले में हेमंत सोरेन ने जमीन से किसी तरह के संबंध से इनकार किया है और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताया है.
मामले में कुल 17 आरोपी
ईडी की जांच के बाद इस मामले में कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है. हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय होने से पहले अन्य 16 आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग चरणों में आरोप तय किए जा चुके थे. अब मुख्यमंत्री के खिलाफ भी आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी हो गई है.
अदालत के इस कदम के बाद अब अभियोजन पक्ष मामले में अपने गवाह और साक्ष्य पेश करेगा. 30 नवंबर से आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है.
हाईकोर्ट में भी चल रही है कानूनी लड़ाई
आरोप तय किए जाने से पहले हेमंत सोरेन ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया था. उन्होंने विशेष पीएमएलए अदालत में चल रही कार्यवाही और आरोप गठन पर रोक लगाने की मांग की थी.
हालांकि, हाईकोर्ट ने तत्काल आरोप गठन पर रोक नहीं लगाई. हाईकोर्ट ने ईडी से मामले में पूरक हलफनामा दाखिल करने को कहा है. रिपोर्टों के मुताबिक हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होनी है.
हेमंत सोरेन की ओर से पीएमएलए की धारा 44(1)(d) को लेकर भी कानूनी चुनौती दी गई है. उनका पक्ष है कि इस प्रावधान के तहत चल रही कार्यवाही पर कानूनी तौर पर विचार किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट में इस पहलू पर सुनवाई जारी है.
जनवरी 2024 में गिरफ्तार हुए थे हेमंत सोरेन
बड़गाईं जमीन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 31 जनवरी 2024 को हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था बाद में जून 2024 में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिली थी. अब इसी मामले में विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद मुकदमे की प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है. हालांकि इस मामले में हेमंत सोरेन ने आरोपों से इनकार किया है और खुद को निर्दोष बताया है. इसलिए अंतिम निष्कर्ष अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध कराए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा.
आगे क्या होगा?
अब 30 नवंबर 2026 को विशेष पीएमएलए अदालत में मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी. अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह और साक्ष्य पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी. साथ ही, हाईकोर्ट में चल रही कानूनी कार्यवाही भी इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेगी.
बड़गाईं जमीन प्रकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक ओर ईडी की ओर से जमीन के कथित फर्जी अधिग्रहण और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं, जबकि दूसरी ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन आरोपों को निराधार बताते हुए अदालत में अपना बचाव कर रहे हैं। अब मामले की असली तस्वीर ट्रायल के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और अदालत के फैसले से स्पष्ट होगी.

