टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनेगा भारत? अश्विनी वैष्णव ने बताया देश का बड़ा प्लान

भारत में सेमीकंडक्टर यानी चिप निर्माण की क्षमता को तेजी से बढ़ावा देने के साथ-साथ अब उन आवश्यक कच्ची सामग्रियों और रसायनों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिनकी मदद से अत्याधुनिक चिप्स तैयार की जाती हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि भारत के सामने वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौतियों में से चुनिंदा जरूरी सामग्रियों की उपलब्धता और उनका कुछ ही देशों या जगहों पर केंद्रित होना है। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत को इन सामग्रियों को समझने, संभालने, बनाने, प्रोसेस करने और सुरक्षित रखने की पूर्ण क्षमता अपने ही देश के भीतर विकसित करनी होगी।

भारत के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम में चरणबद्ध बदलाव

केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के पहले चरण में किसी एक प्रमुख वैश्विक कंपनी को शामिल करने पर मुख्य जोर दिया गया था। इस चरण के तहत कुल 12 प्रमुख परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें से 5 ने अपना व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है। अब सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण में आवश्यक सामग्रियों और घरेलू तकनीक के विकास पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

तकनीकी निर्भरता घटाने के लिए औद्योगिक तंत्र का विकास

अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि भारत को एक ऐसी मजबूत और आत्मनिर्भर व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिसमें तैयार उत्पाद से लेकर उसके विभिन्न कलपुर्जों और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री तक की घरेलू क्षमता हो। किसी भी क्षेत्र में विनिर्माण को दीर्घकालिक रूप से सफल बनाने के लिए एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) का होना अनिवार्य है। भारत इसी रणनीति के तहत सेमीकंडक्टर के साथ-साथ रेलवे और रक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में भी लगातार आगे बढ़ रहा है।

भविष्य की योजनाओं के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य

भारत अपनी नीतियों और योजनाओं को अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक अवधियों में विभाजित करके आगे बढ़ रहा है:

  • अल्पकालिक लक्ष्य: 3 से 5 वर्ष की अवधि।

  • मध्यकालिक लक्ष्य: 5 से 15 वर्ष की अवधि।

  • दीर्घकालिक लक्ष्य: 20 से 25 वर्ष की अवधि।

बदलती हुई भू-राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक राजनीति के अनुसार भारत को अपनी रणनीतियों में निरंतर बदलाव करना होगा। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 2 नैनोमीटर से लेकर 90 नैनोमीटर तक के पूरे तकनीकी दायरे को ध्यान में रखना जरूरी है, जिसमें 28 से 90 नैनोमीटर के चिप निर्माण खंड में वैश्विक निर्भरता का एक बड़ा केंद्र बनने की चुनौती भी शामिल है।

वैश्विक कंपनियों के लिए भारत क्यों है एक भरोसेमंद विकल्प?

वैश्विक तकनीकी कंपनियों के लिए भारत के पुराने और मजबूत रिकॉर्ड को भरोसे का मुख्य आधार बताया गया है। पिछले 40 वर्षों से बड़ी वैश्विक कंपनियों के अनुसंधान व विकास (R&D) केंद्र भारत में नए उत्पादों की डिजाइनिंग और विकास का कार्य कर रहे हैं। इस लंबी अवधि में बौद्धिक संपदा (IP) के उल्लंघन से जुड़ा कोई भी विवाद सामने नहीं आया है। भारत की मजबूत लोकतांत्रिक और कानूनी व्यवस्था वैश्विक कंपनियों को यह पूरा भरोसा देती है कि राजनीतिक या नीतिगत बदलावों के बावजूद वे यहां सुरक्षित रूप से कार्य कर सकती हैं।

साइबर सुरक्षा और भरोसे का बढ़ता महत्व

चिप निर्माण के इस दौर में केवल लागत ही एकमात्र पैमाना नहीं रह गई है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला में साइबर सुरक्षा और आपसी भरोसा भी अत्यधिक अहम हो चुके हैं। भारत डिजाइन, विनिर्माण और तैयार उत्पाद के मूल्यांकन के हर मोर्चे पर दुनिया के लिए एक भरोसेमंद और मजबूत भागीदार के रूप में उभरना चाहता है।

सिस्को की नई तकनीकी व्यवस्था और वैश्विक सहयोग

सिस्को के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चक रॉबिंस ने इस दौरान कहा कि तकनीकी कंपनियों को सरकारों के साथ मिलकर सहयोगात्मक रूप से काम करना चाहिए। भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां बड़े पैमाने पर उन्नत तकनीकी क्षमताएं विकसित की जा सकती हैं।

उन्होंने बताया कि कंपनी ने एक ऐसी विशेष तकनीकी व्यवस्था तैयार की है जिससे डेटा और सिस्टम के संचालन पर संबंधित देश का पूर्ण नियंत्रण बना रहता है। इस व्यवस्था को यूरोप के कई देशों और कनाडा में पहले ही लागू किया जा चुका है, और कंपनी आगामी महीनों में इसे भारत में भी लाने की तैयारी कर रही है।

भारत के लिए भविष्य की मुख्य प्राथमिकताएं

अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत के लिए आगे की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह होगी कि वह केवल तैयार उत्पाद तक सीमित न रहे, बल्कि मॉड्यूल, अत्याधुनिक कलपुर्जों, मूल सामग्रियों और उन्नत मशीनों के निर्माण तक अपनी क्षमताओं का विस्तार करे। इसके लिए लंबे समय तक निरंतर निवेश, उच्च स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता और एक मजबूत औद्योगिक तंत्र की आवश्यकता होगी।

Latest news

Related news