सुप्रीम कोर्ट ने पीएम मोदी के खिलाफ 2018 की टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी Rahul Gandhi के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर रोक लगा दी. यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2018 में की गई उनकी कथित टिप्पणियों को लेकर की गई थी, जिसमें उन्हें “कमांडर-इन-थीफ” कहना भी शामिल था.

Rahul Gandhi ने की थी कार्रवाई पर रोक लगाने की अपील

यह ऑर्डर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच ने लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी की पिटीशन पर पास किया. गांधी ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 8 सितंबर के उस ऑर्डर को चैलेंज किया था जिसमें कार्रवाई रद्द करने से मना कर दिया गया था.
गांधी की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि पिटीशनर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग कर रहा है, क्योंकि यह मेंटेनेबल नहीं है.

4 हफ्ते बाद सुनवाई करेगा कोर्ट

बेंच ने महाराष्ट्र सरकार और शिकायत करने वाले, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मेंबर महेश श्रीश्रीमल को नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद पोस्ट कर दी. कोर्ट के आदेश में कहा गया, “इस बीच, ट्रायल कोर्ट में आगे की कार्रवाई पर रोक रहेगी.”
यह मामला श्रीश्रीमल की एक प्राइवेट शिकायत से शुरू हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि गांधी ने उस साल 20 सितंबर को राजस्थान में एक पब्लिक रैली के दौरान PM मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसमें यह बयान भी शामिल था, “हिंदुस्तान का चौकीदार चोर है”.
श्रीश्रीमल, जिन्होंने इंडियन पीनल कोड की क्रिमिनल डेफेमेशन (सेक्शन 500) के तहत केस शुरू करने की मांग की थी, ने यह भी आरोप लगाया कि गांधी ने 24 सितंबर, 2018 को अपने पर्सनल “X” अकाउंट (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक वीडियो पर कमेंट करते हुए प्रधानमंत्री को “कमांडर इन थीफ” कहा था. उन्होंने तर्क दिया कि ये टिप्पणियां मोदी के साथ-साथ BJP सदस्यों और उनसे जुड़े दूसरे भारतीय नागरिकों के खिलाफ चोरी के आरोपों के बराबर हैं.

बॉम्बे हाइकोर्ट ने कार्रवाई रद्द करने से किया था इनकार

गिरगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 2019 में गांधी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. नवंबर 2021 में फाइल की गई उनकी पिटीशन में आरोपों से इनकार किया गया और कार्रवाई रद्द करने की मांग की गई.
हाई कोर्ट के जस्टिस एनआर बोरकर ने गांधी की इस दलील को खारिज कर दिया कि BJP कोई पहचान वाली संस्था नहीं है. मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए जज ने कहा, “बयान को पहली नजर में पढ़ने पर, PM, जो BJP के सदस्य हैं, को “चोर कमांडर” कहना, सिर्फ पार्टी के सीनियर लीडरशिप तक ही सीमित नहीं कहा जा सकता. क्या आरोप असल में थे और पार्टी के सदस्यों पर इसका क्या असर पड़ेगा, इस पर ट्रायल के स्टेज पर विचार किया जाएगा.”

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