मुंबई में फ्रीजर से मिला 4 साल पुराना शव, परिवार ने क्यों रखा था सुरक्षित?

मुंबई (महाराष्ट्र)। मुंबई के मालाड इलाके से एक अत्यंत चौंकाने वाला और असाधारण मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक बेटी ने अपने पिता के निधन के पश्चात उनके पार्थिव शरीर को लगभग चार वर्षों तक एक फ्रीजर में सुरक्षित संभालकर रखा। बेटी अपने पिता के प्रति इतनी अधिक भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई थी कि वह उनके शव को लंबे समय तक संरक्षित रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही थी। इस हैरान कर देने वाले घटनाक्रम का खुलासा तब हुआ जब क्षेत्र में एक चॉल के पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) के सिलसिले में परिसर को खाली कराने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की गई।

पुलिस की शुरुआती जाँच और प्राकृतिक मौत का खुलासा

स्थानीय पुलिस से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, 78 वर्षीय बुजुर्ग लंबे समय से गंभीर कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे और जून 2022 में दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने के कारण उनका देहांत हो गया था। पिता की मृत्यु के उपरांत बेटी ने नियमानुसार डॉक्टर से उनका मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट) भी बनवा लिया था। पुलिस की शुरुआती जाँच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि बुजुर्ग की मृत्यु पूरी तरह से प्राकृतिक कारणों से हुई थी और इस पूरे प्रकरण में किसी भी प्रकार की आपराधिक साजिश या दुर्भावना के संकेत नहीं मिले हैं।

शव को अमेरिका भेजने की थी योजना

पुलिस पूछताछ में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि बेटी की योजना केवल शव को फ्रीजर में बंद रखने तक सीमित नहीं थी। उसने संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) की एक ऐसी विशिष्ट संस्था से पत्राचार और संपर्क किया था, जो क्रायोजेनिक्स तकनीक के माध्यम से शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की सेवा प्रदान करती है। बेटी की मंशा धन जुटाने और सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अपने पिता के पार्थिव शरीर को अमेरिका भेजने की थी। इसके लिए वह लगातार अमेरिकी संस्था के संपर्क में बनी हुई थी, विधिक सलाह ले रही थी और धन का प्रबंध करने में जुटी थी। इस पूरी अवधि के दौरान वह स्वयं अंधेरी वेस्ट क्षेत्र में निवास कर रही थी।

चॉल खाली कराने के दौरान हुआ राज का पर्दाफाश

इस अनूठे मामले का खुलासा तब हुआ जब लगभग 2,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्रफल में फैली इस पुरानी चॉल के रीडेवलपमेंट की योजना पर काम शुरू हुआ और मकान मालिक ने परिसर को खाली करने का निर्देश दिया। मकान मालिक ने जानकारी दी कि उसने वर्ष 2022 के आरंभ में अब्दुल रहमान नामक व्यक्ति को यह संपत्ति किराए पर दी थी। पश्चात में रहमान ने इस जगह को किसी अन्य प्रबंधन को सौंप दिया, जिसके अंतर्गत वहाँ एक क्लिनिक और डे-केयर सेंटर संचालित किया जा रहा था। मकान मालिक का यह भी कहना है कि उसे इस बात की बिल्कुल भी भनक नहीं थी कि डे-केयर सेंटर के भीतर रखे गए फ्रीजर में किसी इंसान का शव छिपाकर रखा गया है।

यह डे-केयर सेंटर घटना से महज एक महीने पूर्व ही बंद किया गया था। सूचना मिलने पर जब पुलिस दल ने मौके पर पहुँचकर छानबीन की, तो उन्हें फ्रीजर के अंदर बुजुर्ग का शव अत्यंत सुरक्षित अवस्था में बरामद हुआ। पुलिस का मानना है कि इतने लंबे अंतराल तक शव को इस प्रकार फ्रीजर में सहेजकर रखना निस्संदेह अत्यंत असामान्य है, किंतु अब तक की विधिक जाँच में कोई संदेहास्पद या आपराधिक पहलू उजागर नहीं हुआ है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि डे-केयर सेंटर का संचालन करने वालों ने भी कभी स्थानीय पुलिस को इस बात की सूचना नहीं दी थी कि उनके फ्रीजर में कोई शव रखा हुआ है। पुलिस ने मृत बुजुर्ग के परिजनों से विस्तृत संवाद किया है, और अब यह निर्णय परिवार को लेना है कि वे पार्थिव शरीर का पारंपरिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करना चाहते हैं या आवश्यक कानूनी प्रक्रिया तथा शुल्क पूर्ण करने के पश्चात शव को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को सौंपना चाहते हैं।

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