TMC Symbol Dispute : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘घास-फूल’ को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को चार महीने के भीतर अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर बनी अनिश्चितता लंबे समय तक जारी नहीं रहनी चाहिए. आयोग को दोनों पक्षों को सुनकर मामले का निपटारा करना होगा.
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— Live Law (@LiveLawIndia) September 28, 2026
TMC Symbol Dispute :ममता बनर्जी ने अपने सिंबल के लिए सुप्रीम कोर्ट में की थी अपील
यह विवाद तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी पर नियंत्रण को लेकर चल रही खींचतान से जुड़ा है. चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए थे. इस फैसले को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
अदालत ने आयोग को निर्धारित समयसीमा में प्रक्रिया पूरी करने को कहा है. यदि चुनाव आयोग को चार महीने के भीतर फैसला लेने में कोई कठिनाई आती है, तो वह समय बढ़ाने या उचित राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन कर सकता है.
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने का अधिकार दोनों गुटों के राजनीतिक भविष्य और आगामी चुनावों से जुड़ा हुआ है.
ममता बनर्जी की याचिका पर हुई सुनवाई,मूल नाम और चुनाव चिह्न बहाल करने की मांग
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक ‘घास-फूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए दोनों गुटों को अलग-अलग पहचान दी थी.
ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि पार्टी को उसके मूल नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह पार्टी के अस्तित्व से जुड़ा सवाल है. सिब्बल ने अदालत से उचित राहत देने की मांग की, हालांकि उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग नहीं की.
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इससे पहले चुनाव आयोग से पूछा था कि वह दोनों गुटों के दावों पर अंतिम फैसला लेने में कितना समय लगाएगा. अदालत ने शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए कहा था कि इस तरह के मामलों को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए.
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को कौन-सा नाम और चिह्न दिया?
चुनाव आयोग ने पार्टी के भीतर विवाद को देखते हुए अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए थे। यह व्यवस्था विवाद के अंतिम निपटारे तक लागू रहने के लिए की गई है.
गुट | अंतरिम नाम | चुनाव चिह्न |
|---|---|---|
ममता बनर्जी गुट | ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस | फुटबॉल खिलाड़ी |
प्रतिद्वंद्वी गुट | डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस | लिफाफा |
उपचुनाव और आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है असर
TMC के नाम और चुनाव चिह्न का विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित हैं. चुनाव आयोग ने उपचुनाव की प्रक्रिया को देखते हुए दोनों गुटों के लिए अंतरिम व्यवस्था की थी. सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील में ममता बनर्जी ने कहा कि नाम और चुनाव चिह्न पर रोक का असर पार्टी की चुनावी पहचान पर पड़ सकता है.
हलांकि आज की सुनवाई का कोई असर पश्चिम बंगाल में 2 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव पर नहीं पड़ेगा. हां इतना जरुर है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से चार महीने की समयसीमा दिए जाने के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग को अगले 4 महीने के भीतर दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करके निर्णय लेना होगा.

